नई दिल्ली : युवराज सिंह के 2015 वर्ल्ड कप में नहीं चुने जाने को लेकर चाहे मीडिया में जितने विवाद उठ रहे हों लेकिन कप्तान धोनी और युवराज सिंह इन पचड़ों से बिल्कुल अलग और बेफ़िक्र नज़र आते हैं। 2011 वर्ल्ड कप के मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट युवराज सिंह माही की कप्तानी की तारीफ़ करते हैं और कहते हैं कि जिस तरह महेन्द्र सिंह धोनी ने टीम की अगुआई की है इससे साफ़ लगता है कि टीम इंडिया इस बार ख़िताब बचाने में कामयाब रहेगी।
वो ये भी कहते हैं कि 50 ओवरों के खेल में धोनी की रणनीति बड़ी टीमों के ख़िलाफ़ भी बेहद कारगर रही है। धोनी की कप्तानी की तारीफ़ शेन वॉर्न, कपिल देव और सुनील गावस्कर जैसे दिग्गज भी कर रहे हैं।
2015 वर्ल्ड कप की टीम में युवराज सिंह के नहीं चुने जाने को लेकर बड़ा विवाद हुआ। कप्तान धोनी और युवी के बीच दूरियों का भी हवाला दिया गया। थोड़ी देर से ही सही कप्तान एमएस धोनी ने युवी के टीम से बहर रखे जाने की वजहों पर बात की।
फ़ैन्स 2011 के वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के सुपर स्टार रहे युवराज सिंह को भूल नहीं पाए हैं। अपनी बीमारी के बावजूद वे चार मैचों में मैन ऑफ द मैच रहे थे। पूरे टूर्नामेंट में 362 रन बनाकर और कुल 15 विकेट लेने की वजह से वो मैन ऑफ द टूर्नामेंट के ख़िताब से नवाज़े गए। कप्तान धोनी युवराज की तारीफ़ करते हुए बताते हैं कि मौजूदा नियमों के तहत युवी टीम के लिए शायद उतने कारगर साबित नहीं हो पाते।
कप्तान धोनी कहते हैं, 'वनडे क्रिकेट के नए नियमों ने हमसे युवराज जैसा गेंदबाज़ छीन लिया। आपने देखा होगा कि नए नियमों के आने के बाद उन्होंने वनडे क्रिकेट में ज्यादा गेंदबाजी नहीं की। हालांकि वो टी20 क्रिकेट में अभी भी अच्छे गेंदबाज़ बने हुए हैं। धोनी ने तकनीकी वजहों का हवाला देते हुए बताया कि नए नियमों के मुताबिक अब वनडे मैच के दौरान 30 गज के घेरे के बाहर ज़्यादा से ज़्यादा चार फील्डर ही रह सकते हैं। ऐसे में किसी भी पार्ट-टाइम गेंदबाज़ को मुश्किल होती है और युवराज के लिए भी टीम में जगह बनाना आसान नहीं था।
मीडिया में इस बात को लेकर चाहे जो बवाल उठे। ये दोनों दिग्गज इन बातों से बेहद आगे निकल गए नज़र आते हैं। इसे इस बात का इशारा भी माना जा सकता है कि आगे टी20 में ये दोनों दिग्गज कुछ और बड़े कमाल करते नज़र आ सकते हैं।
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