दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट संगठन में सुधार लाने के बाद पिछले 12 वर्षों से क्रिकेट प्रबंधन से जुड़ी लंबे समय से लंबित मुकदमों से परेशान होकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और राज्य संघों से पूछा कि उन्हें राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम (National Sports Governance Act) 2025 के तहत क्यों नहीं लाया जाना चाहिए. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल विभिन्न राज्य क्रिकेट संघों और उनके सदस्यों द्वारा दायर की गई कई याचिकाओं का जवाब देते हुए कही है. ये याचिकाएं या तो उनके संविधान में मामूली बदलावों के लिए थीं या फिर नकदी से समृद्ध क्रिकेट प्रबंधन निकायों पर नियंत्रण को लेकर गुटबाजी से उत्पन्न विवादों से जुड़ी थी. इन पर सुनवाई करते हुए पीठ ने अपना रुख स्पष्ट किया. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची व न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दिन की कार्यवाही के अंतिम चरण में बीसीसीआई और उससे संबद्ध राज्य निकायों से पूछा कि उन पर एनएसजी एक्ट लागू क्यों न किया जाए और उनसे उनका जवाब मांगा.
इस बात से परेशान हुआ सुप्रीम कोर्ट
बता दें कि साल 2014 में बीसीसीआई द्वारा दायर मूल याचिका के बाद न्यायमूर्ति आर. एम. लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर अगस्त 2018 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बीसीसीआई के संविधान का ढांचा तैयार किया गया था. इसके बाद सितंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पदाधिकारियों के लगातार कार्यकाल और कूलिंग-ऑफ पीरियड से जुड़े महत्वपूर्ण संशोधनों की अनुमति दिए जाने के बाद भी आवेदनों और याचिकाओं का आना लगातार जारी रहा. इस साल मई में खेल मंत्रालय ने खेल निकायों के बेहतर प्रबंधन और विवादों के निपटारे के लिए एनएसजी अधिनियम के तहत नए नियमों को अधिसूचित किया था.
...तो फिर यह होगा असर
यदि बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघ एनएसजी अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के दायरे में आने के लिए सहमत होते हैं, तो क्रिकेट निकायों के कामकाज और प्रबंधन से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित सभी मुकदमे खेल न्यायाधिकरण में स्थानांतरित हो जाएंगे. इससे पहले से ही अत्यधिक बोझ वाले सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा भार कम हो जाएगा.
इन पहलुओं पर काम करता है एनएसजी
एनएसजी अधिनियम और उसके नियम राष्ट्रीय खेल बोर्ड को केंद्रीय नियामक प्राधिकरण के रूप में अनिवार्य बनाते हैं, जो राष्ट्रीय खेल निकायों को मान्यता देने और शासन, वित्तीय व नैतिक मानकों के अनुपालन की निगरानी करने के लिए जिम्मेदार है. यह अधिनियम पारदर्शी चुनाव और निर्वाचित पदाधिकारियों के कार्यकाल के लिए प्रक्रियाएं भी प्रदान करता है.
F & Q: Frequnetly Asked Questions
प्र:- 1. सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई (BCCI) और राज्य क्रिकेट संघों से क्या पूछा है?
उत्तर:- सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई और राज्य संघों से पूछा है कि उन्हें राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम (NSG Act), 2025 के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए और इस पर उनसे जवाब मांगा है
प्र:- 2. सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को इस अधिनियम के तहत लाने का विचार क्यों किया?
उत्तर:- पिछले 12 सालों से क्रिकेट प्रबंधन, संविधान संशोधन और राज्य संघों की गुटबाजी से जुड़ी याचिकाओं के लगातार आने से परेशान होकर सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम उठाया है.
प्र:- 3. यदि बीसीसीआई NSG अधिनियम के तहत आता है, तो लंबित मुकदमों का क्या होगा?
उत्तर:- सुप्रीम कोर्ट में चल रहे क्रिकेट निकायों से संबंधित सभी लंबित मामले खेल न्यायाधिकरण में स्थानांतरित हो जाएंगे, जिससे सुप्रीम कोर्ट पर मुकदमों का बोझ कम होगा.
प्र:- 4. राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम (NSG Act) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर:- इसका उद्देश्य खेल निकायों के प्रबंधन में सुधार लाना, विवादों का निपटारा करना, पारदर्शी चुनाव कराना और वित्तीय व नैतिक मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना है।
प्र:- 5. NSG अधिनियम के तहत खेल निकायों की निगरानी कौन सी संस्था करेगी?
उत्तर:- इस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय खेल बोर्ड केंद्रीय नियामक प्राधिकरण के रूप में कार्य करेगा, जो खेल निकायों को मान्यता देने और मानकों की निगरानी के लिए जिम्मेदार होगा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं