Who is Qamran Iqbal: रणजी फाइनल शुरू होने से एक दिन पहले तक कामरन इकबाल को पता नहीं था कि उनकी किस्मत कैसे बदलने वाली है. दरअसल, रणजी फाइनल में शतक लगाने वाले कामरन मैच वाले दिन सुबह वेन्यू पर पहुंचे थे और इतिहास का हिस्सा बने. हुआ ये कि फाइनल से ठीक पहले जम्मू-कश्मीर के स्टार ओपनर शुभम खजूरिया के चोटिल हो गए जिसके बाद कामरान इकबाल को तुरंत ही टीम में शामिल किया गया. फाइनल शुरू होने से एक दिन पहले तक उन्हें इसका अंदाजा तक नहीं था कि उनके बल्ले से जम्मू कश्मीर की टीम इतिहास रचने में सफल हो जाएगी.
भागते हुए एयरपोर्ट से निकले बाहर
जब कामरन इकबाल को टीम में शामिल होने का बुलावा आया तो इकबाल तुरंत एयरपोर्ट पहुंचे और रात साढ़े 11 बजे श्रीनगर से फ्लाइट पकड़ी, रात करीब 1.55 पर मुंबई पहुंचे और चार घंटे के इंतजार के बाद सुबह 7.35 बजे हुबली लैंड किए, जैसे ही एयरपोर्ट पर इकबाल लैंड किए वो भागते हुए वहां से बाहर निकले और कार लेकर मैदान पर पहुंचे, मैच के आगाज से ठीक आधे घंटे पहले इकबाल वेन्यू पर पहुंचे.
रणजी ट्रॉफी फाइनल मैच के आखिरी दिन,कामरान इकबाल ने सेंचुरी बनाकर जम्मू-कश्मीर को पहला रणजी ट्रॉफी का खिताब दिलाने काम किया.
2001 में जन्मे कमरन इकबाल लगातार जम्मू-कश्मीर के सबसे भरोसेमंद युवा बल्लेबाजों में से एक बनकर उभरे हैं. इस इलाके के एज-ग्रुप स्ट्रक्चर की पैदाइश, उन्होंने जूनियर क्रिकेट में तेज़ी से तरक्की की और फिर नेशनल यूथ लेवल पर पहचान बनाई. साल 2018 और 2019 में भारत अंडर-19 को रिप्रेजेंट किया. उन शुरुआती मौकों ने उनके मिजाज को और मज़बूत किया और एक ऐसी टेक्निक को बेहतर बनाया जिसे पहले से ही उनके साथियों में सबसे कॉम्पैक्ट में से एक माना जाता था.
छोटे फॉर्मेट में भी दमदार हैं कामरान इकबाल
फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में, उन्होंने 14 मैचों में 31.12 की औसत से 747 रन बनाए हैं, जिसमें एक नाबाद 133 रन और 6 हाफ-सेंचुरी शामिल हैं, जो उनकी रेड-बॉल की काबिलियत को दिखाता है. लिस्ट A क्रिकेट में, उन्होंने 20 मैचों में 36.83 की औसत से 663 रन बनाए हैं, जिसमें एक सेंचुरी (116) और 6 फिफ्टी शामिल हैं, जो 50 ओवर के फॉर्मेट में कंसिस्टेंसी दिखाते हैं. T20s में, उन्होंने 25 मैचों में 121.93 के स्ट्राइक रेट से 617 रन बनाए हैं, जिसमें 3 हाफ-सेंचुरी शामिल हैं, जो सबसे छोटे फॉर्मेट में ढलने की उनकी काबिलियत को दिखाता है.
करियर का सबसे बड़ा मोड़
कामरान के करियर का सबसे बड़ा मोड़ रणजी ट्रॉफी 2025-26 में आया है. इसी सीजन में दिल्ली के खिलाफ अरुण जेटली स्टेडियम में कामरान ने 179 रन की पारी खेली थी. इस पारी ने साबित किया कि यह बल्लेबाज केवल एक 'होनहार खिलाड़ी' नहीं हैं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की बल्लेबाजी की रीढ़ है. उन्होंने 2018-19 सीजन में अपना डेब्यू किया और तब से वह तीनों फॉर्मेट (रणजी, विजय हजारे और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी) में टीम के भरोसेमंद स्तंभ बन गए हैं.
बैलेंस और डिसिप्लिन है सबसे बड़ी ताकत
दाएं हाथ के ओपनर, कमरन की ताकत बैलेंस और डिसिप्लिन में है. वह देर तक खेलते हैं, ऑफ स्टंप के काफी बाहर गेंद छोड़ते हैं, और शांत रहकर अपनी पारी को आगे बढ़ाते हैं. वह केवल मुश्किल क्रिकेट तक ही सीमित नहीं हैं. जब ज़रूरत होती है, तो वह स्मार्ट तरीके से तेज़ी से गेम को आगे बढ़ाते हैं, स्ट्राइक रोटेट करते हैं और ढीली गेंदों का भरपूर फ़ायदा उठाते हैं.
दबाव में उनका शांत रहना जल्दी ही उनकी एक खासियत बन गई है , एक ऐसी क्वालिटी जो हाई-स्टेक मैचों में बार-बार सामने आई है. अगर दिल्ली के ख़िलाफ़ उनकी सेंचुरी ने उनके आने का ऐलान किया, तो आज के रणजी ट्रॉफ़ी फ़ाइनल में उनके प्रदर्शन ने इसे और पक्का कर दिया है. घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े स्टेज पर उम्मीदों के बोझ तले बैटिंग करते हुए, कमरन ने नाबाद 94 रन बनाए, और दूसरे दिन धैर्य और अधिकार के साथ पारी को संभाला और शतक जमाने का काम किया.
क्या टीम इंडिया के लिए खेल पाएंगे
अभी भी बीस साल के आस-पास के कामरान इकबाल अब सिर्फ़ एक उम्मीद जगाने वाले खिलाड़ी नहीं रहे, बल्कि वे जम्मू और कश्मीर की बैटिंग लाइन-अप की रीढ़ बन रहे हैं. दिल्ली के ख़िलाफ़ पहली फ़र्स्ट-क्लास सेंचुरी और अब रणजी ट्रॉफ़ी फ़ाइनल में नाबाद 160 रन बनाकर, उन्होंने दिखा दिया है कि वे बड़े मंच के लिए बने हैं.
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