देश में खेल के त्योहार आईपीएल के 19वें सीजन के आगाज में गिनती के महज छह दिन शेष रह गए हैं. हर बार की तरह इस बार भी क्रिकेट प्रेमियों को कांटे के कई टक्कर देखने को मिलेंगे. प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का आगाज हो. उससे पहले बात करें 2010 में खेले गए किंग्स XI पंजाब (मौजूदा समय में पंजाब किंग्स) और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच उस मुकाबले के बारे में जिसने सबकी सांसे रोक दी थी, तो वो आज भी फैंस के जेहन में बना हुआ है. टूर्नामेंट का 54वां मुकाबला धर्मशाला में खेला जा रहा था. जहां चेन्नई की टीम को अगले दौर में पहुंचने के लिए यह मुकाबला हर हाल में जीतना था. यहां सीएसके की टीम टॉस जितने में कामयाब रही. मगर उन्होंने पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया.
शॉन मार्श का धमाका, 192/3 रन बनाने में कामयाब रही पंजाब
विपक्षी टीम की तरफ से पहले बल्लेबाजी का न्योता मिलने के बाद पंजाब की तरफ से महेला जयवर्धने और शॉन मार्श पारी का आगाज करने मैदान में आए. जयवर्धने (18) का बल्ला तो इस मुकाबले में कुछ खास नहीं चला. मगर मार्श ने इस मुकाबले में अपने बेहतरीन बल्लेबाजी से जमकर चमक बिखेरी. उन्होंने सीएसके के खिलाफ कुल 57 गेंदों का सामना किया. इस बीच 154.38 की स्ट्राइक रेट से नाबाद 88 रन बनाने में कामयाब रहे. इस दौरान क्रिकेट प्रेमियों को उनके बल्ले से आठ चौके और पांच खूबसूरत छक्के देखने को मिले. उनके अलावा पांचवें क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए इरफान पठान ने 27 गेंदों में तेजी से नाबाद 44 रनों का योगदान दिया. नतीजन टीम 20 ओवरों में तीन विकेट के नुकसान पर 192 रन तक पहुंचने में कामयाब रही. वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें.
सीएसके की शुरुआत रही खराब, मगर मध्यक्रम ने संभाल लिया मौर्चा
विपक्षी टीम की तरफ से जीत के लिए मिले 193 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए सीएसके की शुरुआत कुछ खास नहीं रही. टीम ने तीसरे ओवर में ही मैथ्यू हेडन (05) का विकेट गंवा दिया था. यहीं नहीं चौथे ओवर में मुरली विजय (13) भी आउट हो गए. जिसके बाद टीम के ऊपर हार का खतरा मंडराने लगा था.
मगर तीसरे और चौथे क्रम पर बल्लेबाजी करने आए सुरेश रैना (46) और एस बद्रीनाथ (53) ने पारी को संवार लिया. दोनों खिलाड़ियों के बीच तीसरे विकेट के लिए 62 रनों की अर्धशतककीय साझेदारी हुई. हालांकि. टीम सुखद स्थिति में पूरी तरह से पहुंच पाती. रैना 89 रन के कुल योग पर आउट हो गए.
रैना के आउट होते ही सीएसके की नाव एक बार फिर से बीच मझदार में फंस गई थी. किसी को उम्मीद नहीं थी कि टीम यहां से जीत पाएगी. मगर पांचवें क्रम पर बल्लेबाजी के लिए धोनी ने अपने आतिशी पारी से हर किसी को चौंका दिया. मैच के दौरान उन्होंने कुल 29 गेंदों का सामना किया. इस बीच देखते ही देखते 186.20 की स्ट्राइक रेट से 54 रन कूट डाले और टीम को जीत दिलाकर ही वापिस लौटे.
आखिरी ओवर में जीत के लिए थी 16 रन की दरकार और धोनी ने कर दिया कमाल
सीएसके की टीम को आखिरी ओवर में जीत के लिए 16 रनों की दरकार थी. विपक्षी टीम की तरफ से यह ओवर इरफान पठान ने डाला. वहीं बल्लेबाजी छोर पर धोनी मौजूद थे. धोनी ने पठान के इस ओवर की पहली गेंद पर लॉन्ग-ऑफ की दिशा में चौका बटोरा. दूसरी गेंद पर वह डबल लेने में कामयाब रहे. तीसरी गेंद पर उन्होंने वाइड लॉन्ग-ऑन के ऊपर से छक्का लगाया.
टीम को आखिरी के तीन गेंदों में पांच रनों की दरकार थी. यहां से मुकाबला किसी भी दिशा में घूम सकती थी. मगर माही ने फैंस को ज्यादा इंतजार नहीं करवाया और चौथी गेंद पर वाइड लॉन्ग-ऑन के ऊपर से एक और जोरदार छक्का लगाते हुए टीम को जीत दिला दी.
फैंस आज भी धोनी के इस मैच जिताऊं पारी को याद करते हैं. माही को इस बेहतरीन पारी के लिए उस दौरान 'प्लेयर ऑफ द मैच' भी चुना गया था. आगे टीम फाइनल मुकाबले में मुंबई इंडियंस को शिकस्त देते हुए खिताब उठाने में भी कामयाब रही.
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