Vijay Bharadwaj: कभी-कभी टैलेंट होने के बाद भी आपकी किस्मत आपका साथ नहीं देती है. ऐसे कई क्रिकेटर आए हैं जिनके पास टैंलेट की भरमार रही थी लेकिन अपना करियर बड़ा नहीं कर सके. हाल के समय में सबसे बड़ा उदाहरण पृथ्वी शॉ हैं. शॉ में भरपूर काबिलियत है लेकिन इस समय उनका करियर अधर में लटका हुआ है. इससे पहले विनोद कांबली भी ऐसे ही क्रिकेटर के तौर पर याद किए जाते हैं जो विश्व स्तरीय बैटर होने के बाद भी अपनी निजी आदतों के चलते अपने करियर से हाथ धो बैठे थे.
लेकिन इन सबके अलाव एक ऐसा भी क्रिकेटर है जिसने आज कोई याद नहीं करता है, लेकिन उस क्रिकेटर ने अपने डेब्यू सीरीज में ऐसा परफॉर्मेंस किया था जिसे भविष्य की उम्मीद कहा जा रहा था लेकिन वहीं हुआ, किस्मत ने उस क्रिकेटर को बड़ा बनने नहीं दिया. वह क्रिकेटर कोई और नहीं बल्कि विजय भारद्वाज थे. विजय भारद्वाज ने अपने करियर में 3 टेस्ट और 10 वनडे मैच खेले. अपने पहले ही सीरीज में विजय ने मैन ऑफ द सीरीज का खिताब जीता था. डेब्यू सीरीज में विजय भारद्वाज ने गेंदबाजी से 10 विकेट लिए थे और बल्लेबाजी करते हुए 89 रन बनाए थे जिसमें बिना आउट हुए 89 रन बनाए थे.
Do you remember him?
— Sanjeeb (@Sanjeeb2412) July 24, 2026
Dream Debut for India 🇮🇳
🔹️Played 3 Tests and 10 ODIs
🔹️ 🏆 Man of the Series in his debut ODI series .
🔹️Took 10 wickets with an average of 12.2 & scored 89 runs without being dismissed once!
Drop your answers below!👇👇 pic.twitter.com/6XJiVcGn9I
3 टेस्ट 10 वनडे, खत्म हो गया करियर
विजय भारद्वाज ने सदी के बदलाव के समय भारत के लिए 3 टेस्ट और 10 वनडे मैच खेले. उनके करियर का सबसे यादगार पल 1999-2000 में नैरोबी में LG कप था, जहां उन्हें उनके ऑल-राउंड प्रदर्शन के लिए 'मैन ऑफ द सीरीज' चुना गया था. वे रणजी ट्रॉफी में कर्नाटक के लिए एक अहम खिलाड़ी थे और 1990 के दशक में टीम की तीन रणजी ट्रॉफ़ी जीतों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
लेकिन, दुख की बात है कि खेल कभी-कभी बहुत बेरहम हो सकते हैं. विजय का टॉप पर रहने का समय उम्मीद से कम रहा. चोटों और नए टैलेंट के आने की वजह से उन्हें इंटरनेशनल लेवल पर अपना हुनर दिखाने के लिए ज्यादा मौके नहीं मिले. उन्होंने सिर्फ 10 वनडे और 3 टेस्ट मैच खेले. लेकिन जिन लोगों ने उन्हें खेलते देखा, वे मैदान पर उनके शांत और समझदारी भरे खेल को कभी नहीं भूल पाए.
चोट की वजह से जल्द खत्म हो गया करियर
एलजी कप में दमदार प्रदर्शन के बाद विजय न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट और वनडे दोनों ही सीरीज में खेले लेकिन वहां वह कुछ खास परफॉर्मेंस नहीं कर पाए. इसके बावजूद उन्हें ऑस्ट्रेलिया दौरे पर फिर मौका दिया गया. ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में खेले गए टेस्ट मैच में दुर्भाग्य से उन्हें चोट लग गई. यहां से उनके करियर का बुरा दौर शुरू हो गया. इस चोट के कारण उन्हें स्लिप डिस्क हो गया और वह करीब डेढ़ साल तक बिस्तर पर रहे. फिट होने के बाद उन्होंने फिर से घरेलू क्रिकेट में अपना दम दिखाया और फिर से टीम इंडिया में पहुंचे. लेकिन इस बार विजय की चमक गायब थी.
आंख की सर्जरी ने खत्म कर दिया करियर
इसके बाद जब विजय ने चोट से वापसी की तो उन्हें किसी ने आंख की सर्जरी कराने को कहा, यह फैसला उनके करियर के लिए घातक साबित हुआ. विजय ने आंखों की सर्जरी कराई, जिसके बाद उनकी आंखों की रोशनी कम होते चली गई. फिर बाद में उन्हें गेंद खेलने और देखने में ज्यादा परेशानी होने लगी. उन्हें चश्मा पहनकर खेलना पड़ा रहा था. उन्हें ल्डिंग के दौरान गेंद देखने में परेशानी होने लगी. उनका करियर फिर ढलान पर जाने लगा.
विजय को साल 2002 में आखिरी बार जिम्बाब्वे के खिलाफ खेलने का मौका मिला लेकिन वह पहली ही गेंद पर आउट हो गए. इसके बाद फिर उन्हें कभी भी भारत के लिए खेलने का मौका नहीं मिला.
एक चैंपियन की कहानी, आंख की सर्जरी ने दे दिया धोखा
विजय भारद्वाज की बात करना एक ऐसे व्यक्ति की बात करना है जिसे क्रिकेट से गहरा लगाव था. हो सकता है कि उनके करियर में बहुत सारे मैच या रिकॉर्ड तोड़ने वाले आंकड़े न हों, लेकिन उनके जुनून, समर्पण और जबरदस्त टैलेंट ने उन्हें सबसे अलग बना दिया. वे इस बात की मिसाल हैं कि खेल के प्रति प्यार के लिए खेलना, गर्व के साथ अपनी टीम की जर्सी पहनना और ऐसी छाप छोड़ना क्या होता है जो मैदान से हटने के बाद भी लोगों को प्रेरित करती रहे. एक ऐसा खिलाड़ी जिसने पूरे दिल और जान से खेला, और एक ऐसा व्यक्ति जो हर तरह से इस खेल का सच्चा चैंपियन था. यही विजय भारद्वाज की कहानी है, एक ऐसी कहानी जो क्रिकेट के बारे में तो है ही, साथ ही खेल के प्रति प्यार के बारे में भी है.
रणजी सीजन में 1400+ रन और 21 विकेट
1998-99 का घरेलू सीजन उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, जब उन्होंने 1463 रन बनाए और 21 विकेट लिए. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने 96 फर्स्ट-क्लास मैचों में 5553 रन बनाए और 59 विकेट लिए थे.
कोच, कमेंटेटर और स्काउट की भूमिका
संन्यास के बाद वे कोचिंग, कमेंट्री और टैलेंट स्काउटिंग में सक्रिय रहे, विजय आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स से भी जुड़े, IPL 2025 के लिए दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें टैलेंट सर्च/स्काउटिंग प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी थी.
ये भी पढ़ें-'उसे लगातार यही कहते हैं' ईशान किशन ने बताया वैभव सूर्यवंशी को कैसे प्रोटेक्ट करती है टीम इंडिया
ये भी पढ़ें- जिम्बाब्वे को धोते ही आईसीसी T20I टीम रैंकिंग में फिर से बॉस बना भारत, टॉप-5 में इन देशों का दबदबा
ये भी पढ़ें- अभिषेक पीछे, तिलक नंबर 1, पिछले 2 सालों में T20I में चेज करते हुए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-10 बैटर
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं