जब भारतीय टीम ने सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली, तो उम्मीद थी कि आखिरी दो मैचों में बेंच पर बैठे खिलाड़ियों को मौका दिया जाएगा. हालांकि, कुछ ही खिलाड़ियों को प्लेइंग 11 में शामिल किया गया. कुलदीप यादव, शिवम दुबे, आकिब नबी और कुमार कुशाग्र जैसे खिलाड़ी एक भी मैच नहीं खेल पा. पूरी सीरीज के दौरान दुबे को बेंच पर बिठाए रखने के फैसले ने पूर्व भारतीय ओपनर बल्लेबाज आकाश चोपड़ा ने गौतम गंभीर की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं. आकाश चोपड़ा का कहना है कि जब दुबे को मौका नहीं देना था तो टीम में उन्हें क्यों चुना गया.
क्रिकइन्फो से बात करते हुए, आकाश चोपड़ा ने इस बात पर हैरानी जताई कि एशियन गेम्स के फाइनल में अच्छा प्रदर्शन करने और इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में खेलने के बावजूद, शिवम दुबे को इस सीरीज में एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला.
चोपड़ा ने कहा, "दुबे ने एशियन गेम्स का फाइनल खेला और रन बनाए, साथ ही उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ वनडे क्रिकेट भी खेला है. आप बस यह नहीं कह सकते कि अब उनकी कोई जरूरत नहीं है. अगर उन्हें पूरी तरह से बाहर कर दिया जाता है, तो मुझे हैरानी होगी. हां, नीतीश कुमार रेड्डी ने अच्छा काम किया है. वह एक बेहतर गेंदबाज हैं, लेकिन शिवम दुबे एक बेहतर फिनिशर हैं. "
भारत के पूर्व बल्लेबाज ने अपनी बात आगे ले जाते हुए अपनी राय रखी और कहा, "आप एक खिलाड़ी से जो उम्मीद करते हैं, वही अंततः आपके चयन का आधार बन सकती है, लेकिन इसके लिए, हमें खिलाड़ी की सोच को भी समझना होगा. नीतीश आपको कुछ ओवर तो दे सकते हैं, लेकिन दुबे मैच फिनिश कर सकते हैं. वर्ल्ड कप फाइनल, एशियन गेम्स और एशिया कप.. ये ऐसे मौके रहे हैं जहां शिवम दुबे ने खुद को साबित किया है. मैं उन्हें इतनी जल्दी खारिज करने की कोई जल्दबाजी नहीं दिखाऊंगा."
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