Aakash chopra on Rishabh Pant: टीम इंडिया के विकेटकीपर ऋषभ पंत (Rishabh Pant) के दिन अच्छे नहीं चल रहे हैं. यह सही है कि वह अफगानिस्तान के खिलाफ खेले रहे टेस्ट मैच में खेल रहे हैं, लेकिन पिछले दिनों टीम आईपीएल में लखनऊ सुपर जॉयंट्स के खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें कप्तानी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा, तो टेस्ट टीम इंडिया की उप-कप्तानी भी उनसे छिटक कर केएल राहुल के पास चली गई. बहरहाल, पूर्व ओपनर आकाश चोपड़ा का मानना है कि पंत को उप-कप्तानी से हटाने का बीसीसीआई का फैसला गलत है क्योंकि उन्हें दूसरे फॉर्मेट में बेहतर न करने के लिए सजा दी गई है.
चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो में कहा, 'ऋषभ पंत को अब यहां से रन बनाने होंगे क्योंकि उनका डिमोशन (पदावनति) कर दिया गया है. बिना किसी ठोस वजह के उनका डिमोशन हुआ है. उनके आंकड़े बेहतरीन हैं, लेकिन चूंकि उन्होंने अन्य प्रारूपों में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है, इसलिए उन्हें दंडित किया गया है.' वैसे आकाश चोपड़ा ने यह सवाल कर चयन पॉलिसी पर ही सवाल उठा दिया है जो बदलती हुई दिखाई पड़ रही है क्योंकि बात पंत को उप-कप्तान पद से हटाने भर की ही नहीं है. यहां मुद्दा साई सुदर्शन का भी है
असिस्टेंट कोच ने किया था पंत का समर्थन
भारत की टेस्ट टीम की उप-कप्तानी खोने के बावजूद, पंत रेड-बॉल (टेस्ट) योजनाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं, जैसा कि भारत के सहायक कोच रयान टेन डोएशचेट का कहना है. अफगानिस्तान टेस्ट से पहले सहायक कोच ने कहा था, 'मुझे नहीं लगता कि इस तरह के बड़े सेट-अप में लीडर बनने के लिए आपको किसी औपचारिक पद (टाइटेल) की आवश्यकता होती है. मुझे लगता है कि ऋषभ इस बात को समझते हैं, और मुझे लगता है कि वह एक अच्छे रोल मॉडल और एक सीनियर खिलाड़ी बनने के लिए प्रतिबद्ध हैं.'
उन्होंने आगे कहा, 'ऋषभ की प्रतिभा के साथ, हम वह सब कुछ छीनना नहीं चाहते जो वह मैदान पर करते हैं. कभी-कभार, अगर वह स्थिति के अनुसार अपने खेल को थोड़ा और ढाल सकें, तो मुझे लगता है कि यह कुछ ऐसा है जिस पर आप उन्हें काम करते हुए देखेंगे. लेकिन वह फिर से बेहतरीन लय और उत्साह में दिखे हैं. वह उन खिलाड़ियों में से एक हैं जो खुश और हंसमुख रहते हैं और टीम की ऊर्जा को बढ़ाते हैं. हमें उनसे कोई शिकायत नहीं है. आप यह नोटिस भी नहीं कर पाएंगे कि लीडरशिप स्ट्रक्चर (नेतृत्व संरचना) में उनकी भूमिका बदल गई है। इसलिए, ऋषभ को लेकर कोई चिंता नहीं है, और मैं उन्हें फिर से मैदान पर देखने के लिए उत्सुक हूं'
साई सुदर्शन का चयन क्यों?
कुछ ऐसा ही बात अफगानिस्तान के इलेवन में साई सुदर्शन को XI में खिलाने को लेकर भी है. पूर्व दिग्गज और तमाम पंडित इस बात से हैरान है कि पिछले रणजी ट्रॉफी सीजन में पांच सौ से ऊपर रन बनाने वाले देवदत्त पडिक्कल को क्यों बाहर रखा गया? क्यों व्हाइट बॉल फॉर्मेट की फॉर्म के आधार पर टेस्ट टीम में साई सुदर्शन को जगह दी गई? आखिर कौन ये फैसले ले रहा है? यह गौतम गंभीर की टीम है या फिर चयन समिति की? कुल मिलाकर पॉलिसी पटरी से उतरती दिखाई दे रही है. यह अफगानिस्तान के खिलाफ तो काम कर सकती है, लेकिन किसी बड़े विदेशी दौरे में ऐसी नीति से भारत को खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है
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