Jammu and Kashmir Captain Paras Dogra Story: भारतीय क्रिकेट में अक्सर कई सितारों की चर्चा होती है, लेकिन घरेलू क्रिकेट में भी ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने अपने दमदार प्रदर्शन से मजबूत पहचान बनाई है. 41 वर्षीय पारस डोगरा उन्हीं खिलाड़ियों में शामिल हैं. हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में जन्मे डोगरा ने अपने लंबे करियर में न सिर्फ रन बनाए, बल्कि जम्मू-कश्मीर क्रिकेट की तस्वीर भी बदल दी. कप्तान और जम्मू-कश्मीर की टीम का वो हौसला ही था, जिसके दम पर टीम ने रणजी ट्रॉफी में 67 साल का लंबा इंतजार शनिवार को खत्म कर दिया. जम्मू-कश्मीर ने 8 बार की चैंपियन कर्नाटक के खिलाफ फाइनल में ड्रॉ खेला और पहली पारी के आधार पर बढ़त के चलते ट्रॉफी अपने नाम की.
जम्मू कश्मीर ने 1959 में खेला रणजी ट्रॉफी में अपना पहला मुकाबला
जम्मू कश्मीर ने रणजी ट्रॉफी में अपना पहला मुकाबला 1959 में खेला था. शुरुआती दौर में बड़ी टीमों के लिए जम्मू-कश्मीर को हराना बाएं हाथ का खेल हुआ करता था और 90 के दशक में जम्मू-कश्मीर की टीम मैदान पर उतरती और अंत में हारकर ड्रेसिंग रूम लौट आती. जम्मू-कश्मीर साल 2013-14 के रणजी सीजन में पहली बार क्वार्टर फाइनल का टिकट हासिल करने में सफल रही। इस प्रदर्शन ने जम्मू-कश्मीर को वो आत्मविश्वास दिया, जिसकी जरूरत टीम को लंबे समय से थी. जम्मू-कश्मीर के लिए सबसे बड़ा पल 2014-15 के रणजी सीजन में आया जब परवेज रसूल की कप्तानी में जम्मू-कश्मीर ने इस घरेलू टूर्नामेंट की सबसे सफल टीम मुंबई को ग्रुप स्टेज में हराते हुए हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा था.
10,000 से ज्यादा रन, 34 शतक आंकड़े खुद दे रहे गवाही
पारस डोगरा का प्रथम श्रेणी (फर्स्ट क्लास) करियर शानदार रहा है. उन्होंने 152 मैचों की 244 पारियों में 48.02 की औसत से 10,517 रन बनाए हैं. उनके नाम 34 शतक और 36 अर्धशतक दर्ज हैं. 253 रन उनका सर्वोच्च स्कोर रहा है. घरेलू क्रिकेट में 10,000 से अधिक रन बनाना किसी भी बल्लेबाज के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. डोगरा ने यह मुकाम अपनी निरंतरता और धैर्य से हासिल किया.
साल 2012-13 का सीजन बना करियर का टर्निंग पॉइंट
डोगरा के करियर का सबसे यादगार दौर 2012-13 का रहा. उस सीजन में उन्होंने 8 मैचों में 5 शतक लगाए, जिसमें लगातार तीन पारियों में तीन शतक शामिल थे. इस शानदार प्रदर्शन के चलते उन्हें 2013 में वेस्टइंडीज-ए के खिलाफ इंडिया-ए क्रिकेट टीम में जगह मिली. इसके बाद 2015-16 सीजन में उन्होंने त्रिपुरा और सर्विसेज के खिलाफ लगातार दो दोहरे शतक जड़कर अपनी काबिलियत फिर साबित की.
डोगरा आईपीएल में भी रहे कई टीमों का हिस्सा
भले ही इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले, लेकिन वे कई बड़ी फ्रेंचाइजी का हिस्सा रहे. उन्होंने राजस्थान रॉयल्स, पंजाब किंग्स, कोलकाता नाइट राइडर्स और गुजरात लायंस के साथ समय बिताया. टी20 क्रिकेट में उन्होंने 105 मैचों में 2,324 रन बनाए हैं, जिसमें 13 अर्धशतक शामिल हैं.
जम्मू-कश्मीर टीम को दिलाई नई पहचान
जम्मू-कश्मीर की टीम जब बदलाव के दौर से गुजर रही थी, तब पारस डोगरा की वापसी ने टीम को मजबूती दी. उनके अनुभव से मिडिल ऑर्डर मजबूत हुआ और युवा खिलाड़ियों को दिशा मिली. कप्तान के तौर पर उन्होंने फिटनेस, अनुशासन और मानसिक मजबूती पर जोर दिया. उनकी कप्तानी में टीम ने रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन कर खुद को मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित किया.
अनुशासन और समर्पण की मिसाल
करीब से जानने वाले बताते हैं कि डोगरा की सबसे बड़ी ताकत दबाव में टिककर लंबी पारी खेलना है. 41 साल की उम्र में भी उनका फिटनेस स्तर और खेल के प्रति समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणा है. भले ही वो सुर्खियों में कम रहे हों, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा.
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