
वनडे में फ़ील्डिंग के दौरान 30 गज के दायरे में खिलाड़ियों की संख्या को लेकर आईसीसी के नियम पर कई दिग्गजों ने ऐतराज़ जताना शुरू कर दिया है। पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ ने आईसीसी को इस नियम पर फिर से ग़ौर फ़रमाने को कहा है।
12 शतक और 83 अर्द्धशतकों के सहारे वनडे में दस हज़ार से ज़्यादा और टेस्ट में 36 शतकों के सहारे 13 हज़ार से ज़्यादा रन बनाने वाले राहुल द्रविड़ ख़ासकर वनडे में बल्लेबाज़ों के दबदबे को लेकर ख़ासे फ़िक्रमंद नज़र आते हैं। इस बार वर्ल्ड कप के 42 लीग मैचों के दौरान आख़िरी दस ओवरों में 17 बार 100 से ज़्यादा रन बने। जबकि 2011 में सिर्फ़ 6 बार आख़िरी दस ओवरों में 100 से ज़्यादा रन बने थे।
यही नहीं अबतक लीग मैचों में बल्लेबाज़ों ने 388 छक्के लगाए हैं, जबकि 2011 वर्ल्ड कप में इसकी तुलना में 258 छक्के लग पाए थे।
ईएसपीएन क्रिकइन्फ़ो को दिए गए एक इंटरव्यू में द्रविड़ कहते हैं कि 30 गज के घेरे के अंदर हमेशा पांच फ़ील्डरों के नियम को लेकर ही परेशानी है। मुझे लगता है आईसीसी इस पर ज़रूर ग़ौर फ़रमाएगा। वो कहते हैं कि इससे गेंदबाज़ों पर दबाव बढ़ रहा है और टीमें इसका फ़ायदा उठाकर बड़े स्कोर बना रही हैं जो शायद इस खेल के लिए अच्छा नहीं है।
द्रविड़ कहते हैं कि इस नियम की वजह से टूर्नामेंट में ज़्यादा नज़दीकी मुक़ाबले नहीं देखने को मिल रहे। इससे खेल का रोमांच घट जाएगा। वो ये भी मानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में शायद स्लो पिच की वजह से टीमें ज़्यादा रन बना रही हैं।
मौजूदा नियमों के मुताबिक पहले दस ओवरों में सिर्फ़ दो फ़ील्डर्स 30 गज के घेरे के बाहर रह सकते हैं। बैटिंग पावरप्ले (40 ओवर से पहले) के दौरान सिर्फ़ तीन फ़ील्डर बाहर रह सकते हैं। जबकि बाक़ी वक्त में भी चार फ़ील्डर से ज़्यादा 30 गज के घेरे के बाहर नहीं रह सकते।
सचिन तेंदुलकर की तरह ही राहुल द्रविड़ ने भी वर्ल्ड कप में असोसिएट सदस्यों की मौजूदगी की तरफ़दारी की है। द्रविड़ कहते हैं कि 14 टीमों का टूर्नामेंट में होना अच्छी बात है। जबकि सचिन तेंदुलकर पहले ही 25 टीमों के वर्ल्ड कप में शरीक होने की तरफ़दारी कर चुके हैं।
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