Virat Kohli On Vijay Hazare Trophy Return: विराट कोहली अब सिर्फ वनडे फॉर्मेट में सक्रिय हैं. 2024 टी20 वर्ल्ड कप के बाद उन्होंने इस फॉर्मेट से संन्यास लिया है. जबकि पिछले आईपीएल के दौरान उन्होंने टेस्ट फॉर्मेट को अलविदा कहा था. 2026 की शुरुआत में चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन हुआ था और उससे पहले बोर्ड ने सभी खिलाड़ियों को घरेलू फॉर्मेट में खेलने को कहा था. जिसके बाद इन दोनों दिग्गजों की वापसी हुई थी. कोहली आखिरी बार 2013 में लिस्ट ए वनडे खेले थे. उन्होंने 12 साल बाद वापसी की थी. हालांकि, फैंस को यह मुकाबला देखने को नहीं मिला था, क्योंकि एक तो मैच का टेलिकास्ट उपलब्ध नहीं था और दूसरा मैच के लिए दर्शकों की एंट्री बंद थी. वहीं अब विराट कोहली ने बिना दर्शकों के मैच खेलने को लेकर बयान दिया है.
विजय हजारे ट्रॉफी में कोहली ने दो मैचों में 208 रन बनाए थे. जिसमें एक ज़बरदस्त सेंचुरी और एक फिफ्टी शामिल थी. BCCI के आदेश के बावजूद उनके टूर्नामेंट मिस करने के बारे में कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन उन्होंने घरेलू 50-ओवर फॉर्मेट में वापसी की. उन्होंने कहा कि वह इस सोच के साथ टूर्नामेंट में उतरे थे कि उन्हें किसी को कुछ साबित नहीं करना है, और वह इसे सिर्फ़ खेल के प्यार के लिए खेल रहे थे.
विजय हजारे ट्रॉफी में खेलने को लेकर विराट कोहली ने कहा,"सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस (बेंगलुरु में, जिसने मैचों की मेज़बानी की थी) में एक भी व्यक्ति नहीं था. मैंने इतने लंबे समय तक खेला है, और सोचा, क्या यह काफ़ी मोटिवेटिंग होगा? लेकिन जिस पल मेरा इरादा बदला, मैं खेलना चाहता था क्योंकि मुझे खेलना पसंद है. मुझे बस बैटिंग पसंद है. और मैं बस उसी पर फोकस करना चाहता था. और मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ा. ऐसा नहीं है कि मुझे महसूस नहीं हुआ." विराट ने कहा कि दिल्ली के लिए विजय हजारे में खेलते हुए, उन्हें "फिर से एक बच्चे जैसा महसूस हुआ". उन्होंने आगे कहा,"मुझे लगा, यह किसी और के बारे में नहीं है. यह मेरे और गेम के बारे में है."
कोहली ने कहा कि उन्हें खेलने में आनंद आता है, लेकिन ऐसे माहौल में नहीं जहां चयन के बाद सवाल उठाए जाते हैं. उन्होंने कहा,"जिस क्षण मुझे लगता है कि लोग मेरे लिए मामले को जटिल बनाने की कोशिश कर रहे हैं तथा 'यह और वह' जैसी बातें कर रहे हैं, तो या तो वे स्पष्ट, ईमानदार और खुलकर बात करें या चुप रहें और मुझे अपना काम करने दें." कोहली ने कहा,"अगर पहले लोग यह कहते हैं कि हमें आपकी क्षमता पर विश्वास है और एक सप्ताह बाद वह सवाल उठाने लगते हैं तो वह मुझे पहले दिन ही बता दे कि मैं अच्छा नहीं कर रहा हूं और मेरी जरूरत नहीं है."
उन्होंने कहा,"लेकिन अगर आप कहते हैं कि मैं अच्छा हूं और आप इसके अलावा कुछ नहीं सोच रहे हैं तो चुप रहें. अगर आप परिणाम के आधार पर अपनी सोच बदलते हैं तो फिर आपके रवैये में कभी निरंतरता नहीं रहेगी."
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