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This Article is From Apr 16, 2020

भारत में इस विवादित खिलाड़ी से बड़ा स्विंगर नहीं हुआ, वीडियो सबूत देख लीजिए, आज 57 के हो गए

प्रभाकर ने खेले 39 टेस्ट मैचों में 32.65 के औसत से 1600 रन बनाने के साथ ही 96 विकेट चटकाए और 130 वनडे मैचों में 24.12 के औसत से 1858 रन बनाने के अलावा 157 विकेट भी लिए. मनोज प्रभाकर की स्विंग ऐसी रही, जो आज तक किसी भारतीय सीम गेंदबाज में नहीं देखी गई. 

भारत में इस विवादित खिलाड़ी से बड़ा स्विंगर नहीं हुआ, वीडियो सबूत देख लीजिए, आज 57 के हो गए
मनोज प्रभाकर की फाइल फोटो
  • ..इसलिए कपिल देव ने बताया था अपना गुरु!
  • ..बाद में कपिल चेहरा तक नहीं देखना चाहते थे
  • भारत के लिए खेल चुके हैं 3 वर्ल्ड कप
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नई दिल्ली:

भारतीय क्रिकेट में एक से बढ़कर ऐसे स्विंग के महारथी हुए हैं, जिन्होंने अपने नाम का डंका बखूबी बजाया. इनमें कपिल देव, चेतन शर्मा, श्रीनाथ से लेकर जहीर खान तक रहे हैं. लेकिन एक क्रिकेटर ऐसा आया, जिसे कपिल देव ने एक खास मामले में अपना गुरू बताया! हालांकि, यह बात अलग है कि बाद में कपिल देव इस खिलाड़ी का चेहरा देखना तो दूर, नाम लेने भर से ही लाल-पीले हो जाते थे. और यह स्थिति आज तक बरकरार है. यह खिलाड़ी कोई और नहीं, बल्कि स्विंग के सुल्तान मनोज प्रभाकर हैं. आज मनोज प्रभाकर का जन्मदिन है और वह 57 साल के हो गए हैं. 

मनोज प्रभाकर भारत के उन चुनिंदा या उंगलियों पर गिने जा सकने वाले खिलाड़ियों में रहे, जिन्होंने लंबे समय तक या कहें नियमितता के साथ बैटिंग में पारी की शुरुआत की, तो टीम के लिए पहला ओवर भी फेंका. 

प्रभाकर ने खेले 39 टेस्ट मैचों में 32.65 के औसत से 1600 रन बनाने के साथ ही 96 विकेट चटकाए और 130 वनडे मैचों में 24.12 के औसत से 1858 रन बनाने के अलावा 157 विकेट भी लिए. मनोज प्रभाकर की स्विंग ऐसी रही, जो आज तक किसी भारतीय सीम गेंदबाज में नहीं देखी गई. 

मनोज प्रभाकर अपने करियर में रिवर्स स्विंग के लिए जाने गए. और खुद कपिल देव ने यह माना कि उन्होंने रिवर्स स्विंग की कला मनोज प्रभाकर से सीखी. मनोज प्रभाकर इन और आउट स्विंग के महारथी होने के अलावा रिवर्स स्विंग के बड़े कारीगर रहे, लेकिन एक  समय साथी खिलाड़ियों पर लगाए गए मैच फिक्सिंग के आरोपों के बाद वह क्रिकेट की दुनिया से ही दूर हो गए. मनोज प्रभाकर साल 1987, 92 और 96 में भारतीय टीम के सदस्य रहे. लेकिन 1996 विश्व कप के बाद ही उन्होंने क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया. 

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वैसे पिछले कुछ सेशन में मनोज प्रभाकर दिल्ली रणजी ट्रॉफी टीम के बॉलिंग कोच रहे. दो राय नहीं कि चाहे जैसे भी हालात रहे हों, लेकिन एक बात कही जा सकती है कि मनोज प्रभाकर जैसा स्विंगर फिर से देखने को नहीं मिला. 

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