
भारत में क्रिकेट के बॉस की कुर्सी पर दोबारा बैठने के लिए एन श्रीनिवासन पिच छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने अगले दो हफ्ते के अंदर चेन्नई सुपर किंग्स में अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला कर लिया है, ताकि वह बीसीसीआई अध्यक्ष के पद के लिए चुनाव लड़ सकें।
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में अपने करीबियों से उन्होंने फोन पर संपर्क साधकर अपने फैसले से उन्हें अवगत करा दिया है। साथ ही उनके सामने श्रीनिवासन ने फिर दोहराया कि उन्होंने कुछ भी ग़लत नहीं किया है। दो हफ्ते के अंदर वह चेन्नई सुपर किंग्स में अपनी हिस्सेदारी बेचकर कोर्ट को हलफनामा दे देंगे कि अब उनके चुनाव लड़ने के रास्ते में हितों में टकराव जैसी कोई बात नहीं है।
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने स्पॉट-फ़िक्सिंग मामले पर फ़ैसला सुनाया और कहा कि श्रीनिवासन या आईपीएल टीम को चुन सकते हैं या बोर्ड के अध्यक्ष पद को। अदालत ने बोर्ड के फरवरी 2008 में 6.2.4 नियम को भी कानून की नज़रों में ग़लत बताया था, जिसके ज़रिये क्रिकेट प्रशासकों को आईपीएल और चैंपिंयस लीग में टीम ख़रीद कर व्यवसायिक काम करने की इजाज़त मिली थी। इसी नियम में बदलाव के बाद श्रीनिवासन भी टीम के मालिक बने थे। अदालत ने साफ कहा था कि श्रीनिवासन का टीम मालिक होना ही सारे विवाद की जड़ है। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था कि श्रीनिवासन सहित कोई भी शख्स जिसका व्यवासयिक हित हो, वो बीसीसीआई में किसी पद के लिए अयोग्य होगा और ये अयोग्यता तब तक प्रभावी होगी। जब तक ऐसे व्यक्ति के व्यवसायिक हित रहेंगे।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में बोर्ड को छह सप्ताह के अंदर चुनाव कराने को कहा है। अब बोर्ड में वापसी के लिए श्रीनिवासन के पास एक ही चारा है कि वह सीएसके को छोड़ दें, और श्रीनिवासन इसी संभावना को तलाश रहे हैं। बहरहाल इस घटनाक्रम के बीच मुंबई में 3 फरवरी को होने वाली आईपीएल गर्वनिंग काउंसिल की बैठक फिलहाल टाल दी गई है।
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