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This Article is From Jun 23, 2015

'मौक़ा-मौक़ा' से 'बच्चा अब बच्चा नहीं रहा' तक धोनी की साख दांव पर

'मौक़ा-मौक़ा' से 'बच्चा अब बच्चा नहीं रहा' तक धोनी की साख दांव पर
फाइल फोटो
नई दिल्ली: "मौक़ा-मौक़ा" से "बच्चा अब बच्चा नहीं रहा" के बीच भारतीय क्रिकेट में बहुत कुछ बदल गया।

आईसीसी रैंकिंग में सातवें पायदान पर खड़ी बांग्लादेश की टीम ने पहली बार भारत से सीरीज़ जीत ली। वर्ल्ड नंबर-2 भारत को हराकार वर्ल्ड कप कप का बदला भी ले लिया। टेस्ट कप्तानी छोड़ चुके कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं। आलोचकों ने धोनी पर दबाव बढ़ा दिया है, लेकिन पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर धोनी का बचाव करते हुए कहा है कि कप्तानी छोड़ने या न छोड़ने का फ़ैसला धोनी पर छोड़ देना चाहिए।

सुनील गावस्कर ने एनडीटीवी से कहा, धोनी सम्मान के हक़दार हैं। उन्हें कप्तानी छोड़ने के लिए कहना ग़लत होगा। आप उनसे उनकी उपलब्धियां छीन नहीं सकते। वे भारत के सबसे सफल कप्तान रहे हैं। हमें इस बात का सम्मान करते हुए उन्हीं पर फ़ैसला छोड़ देना चाहिए।

टीम इंडिया को 2007 में टी20, 2011 में वर्ल्ड और 2013 में चैंपियंस ट्रॉफ़ी जीताने वाले धोनी भारत के सबसे सफल कप्तान हैं, लेकिन पिछले साल जनवरी से टीम का प्रदर्शन नीचे की ओर जाता दीख रहा है।

धोनी की कप्तानी में भारत ने कुल मिलाकर 60 प्रतिशत मैच जीते हैं, लेकिन पिछले जनवरी से जीत प्रतिशत घटकर 50 हो गया है।

सुनील गावस्कर कहते हैं, धोनी से भारत को कई ऐतिहासिक जीत दिलाई है, चाहे वो T20 हो या फिर वनडे मैच। धोनी की अगुवाई में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफ़ी और वर्ल्ड कप जीते, टेस्ट में नंबर एक बनी। धोनी की उपलब्धियां अनगिनत हैं।

चाहे स्टीव वॉ हों या रिकी पॉन्टिंग या फिर सौरव गांगुली, दुनिया के तमाम कामयाब कप्तानों को ऐसे दौर से गुजरना पड़ा है। लेकिन इन सबने वापसी की। धोनी भी यों आसानी से मैदान छोड़ कर जाने वाले शख्स नहीं हैं।

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