नई दिल्ली : आईसीसी के तीस गज के घेरे के बाहर किसी भी वक्त चार खिलाड़ियों से ज़्यादा नहीं रखे जाने के नियम से कई क्रिकेट दिग्गजों के साथ कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी बेहद नाराज़ हैं। कप्तान धोनी ने कई बार इसे लेकर अपनी नाराज़गी खुलकर ज़ाहिर की है।
कप्तान कहते हैं कि इससे भारतीय गेंदबाज़ी पर काफ़ी असर पड़ा है। ये असर ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सिडनी में हुए सेमीफ़ाइनल के दौरान भी देखा गया जब पांचवें गेंदबाज़ के रूप में बॉलिंग करते जडेजा को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी। जडेजा ने सेमीफ़ाइनल में 10 ओवर में 56 रन खर्चे और कोई विकेट हासिल नहीं कर सके।
कप्तान धोनी मानते हैं कि इस नियम को बदल देना चाहिए। वो दलील देते हैं कि वनडे क्रिकेट के इतिहास में दोहरे शतक पहले देखने को नहीं मिले और अब वर्ल्ड कप में दो दोहरे शतक लगे।
सचिन तेंदुलकर ने वनडे में पहला दोहरा शतक दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ फ़रवरी 2010 में लगाया। तब से लेकर अबतक सिर्फ़ पांच साल में छह दोहरे शतक लग चुके हैं। इस वर्ल्ड कप में अबतक रिकॉर्ड 38 शतक लग चुके हैं। 11 वर्ल्ड कप के इतिहास में लगे 165 शतकों में से सबसे ज़्यादा 38 अबतक इसी वर्ल्ड कप में लग चुके हैं और अभी फ़ाइनल मैच होना बाक़ी है।
माही ये भी कहते हैं कि कई लोग दलील द रहे हैं कि एक्स्ट्रा खिलाड़ी के अंदर आने से डॉट गेंदें ज़्यादा पड़ी हैं। कप्तान कहते हैं कि अगर ये बात सही है तो सभी 11 खिलाड़ियों को तीस गज के घेरे के अंदर ले आना चाहिए इससे डॉट गेंदों की संख्या और भी बढ़ जाएगी। धोनी की आवाज़ का असर मौजूदा हालात में जल्दी ही खेल पर दिखना चाहिए। वरना इसे लेकर सुर और खिलाड़ियों का गुस्सा और भी तेज़ हो सकता है।
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