Lucknow Super Giants vs Delhi Capitals: निश्चित ही पांच मैचों का मानक बहुत ही कम है, लेकिन इसके बावजूद मेगा टूर्नामेंट में अभियान से पहले ऋषभ जिस मोड़ पर खड़े थे, उनके पास कोई विकल्प भी नहीं था. नतीजन इस सीजन में उन्होंने खासी चुनौतीपूर्ण राह चुन ली. बुधवार को दिल्ली ने टॉस जीतने के बाद लखनऊ को घरेलू मैदान इकाना स्टेडियम में पहले बल्लेबाजी थमाई, तो कप्तान ऋषभ पंत (Rishabh Pant) मिचेल मार्श के साथ पारी की शुरुआत करने उतरे, जो दुर्भाग्यपूर्ण अंदाज में रन बन आउट होने के साथ खत्म हो गई. बहरहाल, बात यह है कि इस सीजन में पंत ने ओपनर बनने का फैसला किया है. और वास्तव में यह चैलेंज बड़ा नहीं, बल्कि बहुत बड़ा है क्योंकि वह हालात विशेष में फंस गए हैं.
चैलेंज लेने की सबसे बड़ी वजह
यह तो साफ ही है पंत का पिछले सीजन में मिड्ल ऑर्डर में कई नंबरों पर खेलने के बावजूद सीजन नाकाम ही साबित हुआ. पिछले सीजन में भी ऋषभ ने एक बार पारी की शुरुआत की, तो साल 2026 में चार बार. साफ है कि पिछले सीजन की नाकामी के बाद टीम के बेहतर संतुलन के लिए उन्हें एक ऐसा नया क्रम तलाशना ही था, जहां वह खुलकर बैटिंग कर सकें. लेकिन इससे ऊपर बात यह है कि अब टीम इंडिया में 20 फॉर्मेट में विकेटकीपर की पॉलिसी पूरी तरह बदल चुकी है.
पंत के पास अब कोई विकल्प नहीं!
विश्व कप टीम चयन के टीम ऐलान के समय प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूर्यकुमार यादव ने बता दिया था कि प्रबंधन ऐसा विकेटकीपर चाहती थी, जो ओपनर हो. यही वजह रही कि जितेश शर्मा समीकरण से बाहर हुए, तो सैमसन के बैक-अप के रूप में आए इशान किशन भी ऐसे विकेटकीपर रहे, जो पारी शुरू कर सकते हैं. जब मुकाबले का पैमाना ऐसा हो गया है, तो पंत के लिए टीम इंडिया में वापसी करने के लिए खुद को अब बतौर ओपनर साबित करने के अलावा दूसरा कोई भी विकल्प नहीं ही बचा है. और अगर लखनऊ कप्तान इस सीजन में इस नई भूमिका में प्रभावित करने में नाकाम रहते हैं, तो उनके पास क्या 'विकल्प' होंगे, यह ईश्वर ही जानता है!
कितना और कैसे खरा उतर पाएंगे पंत?
कुल मिलाकर आईपीएल में अभी तक बतौर ओपनर 6 मैचों में पंत के खाते में 132 रन बनाए हैं. और औसत है 22 रन प्रति मैच. और यही अब पंत का सबसे बड़ा चैलेंज है. टीम इंडिया में वापसी के लिहाज से भी और लखनऊ सुपर जॉयंट्स में पैर जमाने के पहलू से भी. लेकिन बुधवार को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ चंद मिनटों की बैटिंग (हालांकि यह बहुत कम समय है) को आधार बनाया जाए, तो पंत के लिए यह रोल भी बहुत बड़ी चुनौती दिख रहा है. तकनीक के लिहाज से भी, रन बनाने के पहलू से भी. उनके अटपटे शॉट खेलने की मनोदशा अभी भी उनसे चिपकी हुई सी ही दिखती है.
ये कम्पटीशन नहीं आसां...!
बहरहाल, देखते हैं कि पंत चुनौती के इस ट्रैक पर कितने नंबर से पास होते हैं क्योंकि 29वें साल में चल रहे ऋषभ के लिए टी20 में वापसी के लिए मुकाबला संजू सैमसन और ईशान किशन से ही नहीं, बल्कि पंजाब किंग्स के लिए खेलने वाले 25 साल के प्रभसिमरन सिंह सहित विकेटकीपर-ओपनर बल्लेबाज से हो चला है. यह सीजन पंत के लिए बतौर ओपनर आग का दरिया सरीखा हो चला है! हर मैच में पंडितों और मीडिया की उन पर बारीक नजर रहने जा रही है. पहले मैच से पंत तुलनात्मक रूप से बदले-बदले इस बार दिखाई पड़ रहे हैं. वह पिछले सीजन के मुकाबले कहीं ज्यादा गंभीर दिख रहे हैं. निश्चित तौर पर उन्हें पूरा अहसास है कि यह आईपीएल हैं. और यहां किसी को भी "केएल राहुल" बनने में देर नहीं लगती!
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