दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में ईशान किशन ने 269 गेंदों में दोहरा शतक जड़कर एक बार फिर साबित कर दिया कि उनका नाम भारतीय क्रिकेट के सबसे खतरनाक बल्लेबाजों में क्यों लिया जाता है. यह सिर्फ एक बड़ी पारी नहीं थी, बल्कि उस संघर्ष और मेहनत की कहानी का नया अध्याय था, जिसने 2023 में टीम इंडिया से बाहर हुए ईशान को दोबारा भारतीय टीम का अहम सदस्य बना दिया. ईशान किशन 301 गेंद में 250 रन पूरा करने के बाद रिटायर्ड हर्ट हुए.
That moment when Ishan Kishan reached 2️⃣5️⃣0️⃣ 👏👏
— BCCI Domestic (@BCCIdomestic) September 7, 2026
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ईशान किशन के करियर का सबसे मुश्किल दौर
साल 2023 ईशान किशन के करियर का सबसे मुश्किल दौर माना जा सकता है. टीम इंडिया से बाहर होने के बाद उनके सामने कई सवाल खड़े थे. आलोचनाएं थीं और टीम में वापसी का दबाव भी, लेकिन ईशान ने जवाब शब्दों से नहीं, बल्ले से देने का फैसला किया जिसके बाद घरेलू क्रिकेट में उन्होंने लगातार मेहनत की और दिसंबर 2025 में झारखंड को पहली बार सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का चैंपियन बनाकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया.
कप्तान के रूप में उन्होंने 10 मैचों में 517 रन बनाए और लगभग 200 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए दिखा दिया कि उनका आक्रामक खेल अभी भी पहले जैसा ही खतरनाक है और फाइनल मुकाबले में उन्होंने जो शतक लगाया वो उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.
झारखंड की ऐतिहासिक जीत से चमके थे ईशान
झारखंड की ऐतिहासिक खिताबी जीत के बाद चयनकर्ताओं को भी उन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया. जनवरी 2026 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए उनकी भारतीय टीम में वापसी हुई और मौके का फायदा उठाते हुए ईशान ने फिर विस्फोटक बल्लेबाजी की और खुद को सीमित ओवरों की टीम के लिए मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित कर लिया.
इसके बाद 2026 टी20 विश्व कप में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी. ओपनिंग और नंबर-3 दोनों स्थानों पर उपयोगी पारियां खेलकर टीम मैनेजमेंट का भरोसा जीता. भारत के विश्व कप जीतने के सफर में ईशान का योगदान अहम रहा और उन्होंने साबित किया कि वह सिर्फ एक आक्रामक बल्लेबाज नहीं, बल्कि बड़े मौकों पर टीम के काम आने वाले खिलाड़ी भी हैं.
अब दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में दोहरा शतक लगाकर ईशान ने अपने शानदार सफर में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है. साल 2023 में टीम इंडिया से बाहर होने वाले ईशान आज घरेलू क्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक लगातार रन बना रहा है.
ईशान ने जो वक्त टीम इंडिया से बाहर रहकर गुजारा है उसके आगे दलीप ट्रॉफी फाइनल का ये दोहरा शतक केवल एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह उनके संघर्ष की कहानी है जिन्होंने उन ठोकरों को अपनी ताकत बनाई. ईशान किशन ने अब साबित कर दिया है कि उनकी वापसी कोई संयोग नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत और रन बनाने की भूख का नतीजा है.
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