MS Dhoni for IPL 2026: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) में इस बार जहां कुछ टीमों ने शानदार आगाज किया है, तो वहीं स्थापित टीमें जूझ रही हैं. फिर चाहे किंग खान की केकेआर हो, या फिर बुधावर को किसी तरह आखिरी में दिल्ली को 1 रन से पस्त करने वाली गुजरात टाइटंस, लेकिन इन सबके बीच जो टीम एकदम दयनीय बन कर रह गई है, वह है पांच बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स (CSK). मानो इस टीम का पूरा आभामंडल किसी गगनचुंबी इमारत की तरह भरभरा कर गिर गया है. और इस पहलू से सिर्फ अपवाद हैं, तो पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, लेकिन उनके खेल और वर्तमान टीम में उनकी प्रासंगिकता को लेकर सवालों में वजन अब अपने चरम पर है. दक्षिण भारतीय क्षेत्र के फैंस के लिए उनका 'थाला' वहां के ऐसे फिल्मी नायकों सरीखा हो चला है, जिनके मंदिर बना कर उन्हें पूजा जाता है. धोनी भले ही इस स्तर से दूर हैं, लेकिन खासे नजदीक हैं. वह चेन्नई के फैंस के दिलों में ऐसी छवि बना चुके हैं, जो किसी फिल्म में मेहमान कलाकार का रोल करने वाले एक्टर की तरह ही धोनी के क्रीज पर देखने भर के लिए टिकट लेकर आते हैं. फिर इसके कोई मायने नहीं कि माही चलते हैं या नहीं, धोनी चेन्नई के लिए कितने प्रासंगिक हैं या नहीं? या फिर चेन्नई प्रबंधन का बहुत ज्यादा धोनी मोह के कारण टीम के हित कितना असर पड़ा है..वगैरह..वगैरह..चेन्नई और धोनी को लेकर अब पंडितों के मन में एक नहीं अनेक सवाल खड़े हो चले हैं. सवाल जैसे आखिर चेन्नई की बदहाली की असल वजह क्या है? सुपर किंग्स एकदम से सुपर फिसड्डी कैसे हो गए?
1. अब धोनी चेन्नई के लिए कितने प्रासंगिक?
पिछले कुछ सालों से धोनी की उपस्थिति चेपक स्टेडियम को भले ही खचाखच भर दे रही हो, लेकिन सवाल बड़ा यह है कि माही आज की तारीख में टीम के लिए कितने प्रासंगिक हैं? चेन्नई ने उनकी कप्तानी में 2023 में जब खिताब जीता, तो धोनी कौ औसत 26.00 का रहा था. साल 2024 में उनका प्रदर्शन सुधरा जरूर, लेकिन पिछले दो साल में धोनी सहित टीम का बिखरता प्रदर्शन, माही की बढ़ती उम्र और चोट, खिताब का सूखा और साल 2026 के अति दयनीय हालात से चेन्नई और धोनी आज जहां खड़े हैं, वह यह सवाल एकदम वाजिब हो चला है कि पूर्व कप्तान वर्तमान में टीम के लिए कितने 'सुपर किंग' हैं? चोट के कारण वह शुरुआती मैचों से बाहर हो चुके हैं. वापसी की चर्चा जरूर है, लेकिन हालात बहुत ही रहस्यमी से हो चले हैं. और अगर वह लौटते भी हैं, तो टीम का कितना भला कर पाएंगे?
2. चेन्नई की बदहाली की असल वजह क्या है?
वहीं, अगर धोनी को एक तरफ रख दें, तो सवाल यह भी है कि सुपर किंग्स की बदहाली का क्या कारण है? इस सीजन में जिस तरह चेन्नई शुरुआती तीनों मैच हारा है, वह साफ संकेत हैं कि उसका इस बार कुछ भी नहीं होने जा रहा. धोनी जैसा कद्दावर आभामंडल वाला खिलाड़ी गया, तो मानो खिलाड़ी किसी बिना अभिवावक के दिखाई पड़े. लेकिन सवाल यह भी है कि अगर वह होते भी तो क्या कर लेते? वर्तमान कप्तान गायकवाड़ एकदम जंग लगे दिखाई पड़ रहे हैं, टॉप ऑर्डप एकदम से टांय-टांय फिस्स रहा है. विश्व कप के सुपरस्टार संजू भी नहीं चले, तो उसकी गेंदबाजी भी हत्थे से उखड़ी दिखाई पड़ी. इसी से और सवाल पैदा होते हैं:
3. 'धोनी मोह' में क्या सही समय पर ट्रांजिशन नहीं?
चेन्नई प्रबंधन का धोनी प्रेम सहज ही समझा जा सकता है? प्रबंधन की मजबूरी भी समझी जा सकती है कि चेपक ठसाठस धोनी के कारण ही रहता है. लेकिन बड़ा सत्य यह जो आज स्थिति है, वह कभी न कभी तो होनी ही थी. इसी से सवाल पैदा होता है कि क्या चेन्नई प्रबंधन कुछ साल पहले ट्रांजिशन (परिवर्तन) काफी पहले ही शुरू नहीं कर सकता था? अगर प्रबंधन ऐसा करता है, तो क्या उसका समय नहीं बच जाता? क्या धोनी का साल 2023 में खिताबी जीत के साथ ही अलविदा कहना चेन्नई के लिए अच्छा नहीं होता? आज के हालात देखकर तो ऐसा साफ लगता कि ऐसा हो जाना चाहिए था. यह सही है कि धोनी के स्तर का कप्तान एकदम से नहीं ही मिलता, लेकिन साफ है कि न तो चेन्नई प्रबंधन समय रहते अगला कप्तान ही तैयार कर सका और न ही टीम ही खड़ी कर सका. इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि चेन्नई के पास न तो मुंबई इंडियंस सरीखा टैलेंट स्काउट दल है और न ही टूर्नामेंट. इंडियंस का स्तर यह है कि वे मुंबई में अंडर-19 खिलाड़ियों की अपनी लीग रहे हैं और इससे कई अच्छे खिलाड़ी उन्हें मिले हैं.
4. आखिर चेन्नई की यह कैसी प्लानिंग?
चेन्नई की प्लानिंग कितनी सुपर है, यह आप इससे समझ सकते हैं कि उसकी टीम में वर्तमान में एक नहीं बल्कि चार विकेटीपर हैं. धोनी को मिलाकर गुजरात के उर्विल पटेल, संजू सैमसन और राजस्थान से आए कार्तिक शर्मा. आखिर यह प्रबंधन की कैसी रणनीति है, जहां एक दल में एक समय में चार विकेटकीपरों का कुनबा जमा हो चुका है. धोनी को अगर अलग रख भी दें, तो शायद ही किसी और दूसरी टीम में आपको तीन विकेटकीपर देखने को मिलें. निश्चित तौर पर बेहतर प्लानिंग हो सकती थी. और इनकी जगह दूसरे विशेषज्ञ या ऑलराउंडरों पर जोर दिया जा सकता था. वहीं, प्रशांत वीर को लाया गया, तो उन्हें शुरुआती मैचों में बाहर बैठा दिया गया, जो फिर से प्लानिंग की पोल खोलने का एक और सबूत है.
5. धोनी की लार्जर देन लाइफ छवि...और विवाद!
निश्चित तौर पर धोनी की छवि चेन्नई और दक्षिण क्षेत्र के फैंस में यहां के किसी अभिनेता जैसी हो चली है. धोनी इनके लिए 'गॉड' सरीखे हो चले हैं, लेकिन धोनी मोह की कीमत फिलहाल चेन्नई चुका रही है. धोनी की उपस्थिति स्टेडियम में भारी भीड़ भले ही लाती हो, लेकिन खेल के पहलू से आज इसके जैसे हाल हैं, उसे देखकर कोई आम फैन भी यह बता सकता है कि इस साल इसका क्या भविष्य होने जा रहा है. वहीं, पिछले कुछ सालों में रवींद्र जडेजा जैसे दिग्गज का साथ छोड़कर जाना या रविचंद्रन अश्विन का एकदम से चले जाना कुछ ऐसी बातें रहीं, जो धोनी सहित प्रबंधन की इस मामले में विफलता को ज्यादा बयां करती है.
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