- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान युद्ध की नीति से यूरोप के दक्षिणपंथी नेता उनके खिलाफ हो गए हैं
- इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिका को अपनी जमीन पर ईरान पर हमले की अनुमति नहीं दी है
- फ्रांस की दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने ट्रंप के युद्ध लक्ष्यों को यूरोप के लिए खतरा बताया है
ईरान के साथ युद्ध ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की साख को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. कल तक यूरोप दिग्गज दक्षिणपंथी नेता ट्रंप के 'राष्ट्रवाद' के मुरीद थे, आज वही उनके खिलाफ मोर्चा खोलकर खड़े हो गए हैं. व्हाइट हाउस में ट्रंप की वापसी के साथ जिस ग्लोबल राइट-विंग एलायंस की नींव रखी गई थी, वह ईरान के साथ युद्ध की आहट के बीच दरकती नजर आ रही है. इटली की जॉर्जिया मेलोनी से लेकर फ्रांस की मरीन ले पेन तक, यूरोप के कई बड़े नेताओं ने साफ कर दिया है कि उनकी 'नेशन फर्स्ट' की नीति में अब ट्रंप के युद्ध के लिए कोई जगह नहीं है.
इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने बनाई ट्रंप से दूरी
जिन दक्षिणपंथी नेताओं ने डोनाल्ड ट्रंप से दूरी बनाई है उसमें सबसे बड़ा नाम इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का है. इटली ने ही अमेरिका को सबसे बड़ा झटका दिया है. मेलोनी ने साफ कर दिया है कि वे ईरान पर हमले के लिए इटली की जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देंगी. इटली की सरकार ने अमेरिकी फाइटर जेट्स को ईरान पर हमलों के लिए सिसिली स्थित नेवल एयर स्टेशन सिगोनेला का इस्तेमाल करने से रोक दिया है. मेलोनी ने इटली की संसद में कहा कि रोम वाशिंगटन की कार्रवाइयों का पूरी तरह से समर्थन नहीं करता है. उन्होंने खुद को ट्रंप के अधीन कहे जाने के दावों को सख्ती से खारिज करते हुए कहा कि यूरोप को अपनी रक्षा क्षमताएं खुद विकसित करनी चाहिए ताकि उसे अमेरिका पर निर्भर न रहना पड़े.
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फ्रांस की मरीन ले पेन ने भी नहीं दिया ट्रंप का साथ
मेलोनी के अलावा फ्रांस की प्रमुख दक्षिणपंथी नेता और नेशनल रैली चीफ मरीन ले पेन भी ट्रंप के इस कदम के खिलाफ मुखर हो गई हैं. ले पेन ने ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध लक्ष्यों को पूरी तरह से अस्थिर बताया. फ्रांस के राष्ट्रवादी धड़े का मानना है कि मिडिल ईस्ट में छिड़ा यह नया युद्ध यूरोप के लिए गंभीर रणनीतिक और आर्थिक खतरे पैदा कर रहा है. ईंधन की बढ़ती कीमतें और शरणार्थी संकट का डर यूरोप के राइट-विंग को अमेरिका से दूरी बनाने पर मजबूर कर रहा है.

जर्मनी की राइट विंग पार्टी ने भी ट्रंप के खिलाफ
इसके अलावा जर्मनी की राइट विंग पार्टी 'अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (AfD) ने इस जंग के बहाने अमेरिका के खिलाफ सबसे आक्रामक रुख अपनाया है. AfD के नेता टीनो क्रुपाला ने मांग की कि अमेरिका, जर्मनी में तैनात अपने 40 हजार सैनिकों को वापस बुलाए और सभी सैन्य ठिकानों को खाली करे. क्रुपाला का कहना है कि जब तक जर्मनी में विदेशी सैन्य अड्डे मौजूद हैं और उन पर उनका कोई कंट्रोल नहीं है, तब तक जर्मनी खुद को एक संप्रभु देश नहीं कह सकता. उन्होंने अमेरिकी सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल न करने देने के लिए स्पेन की लेफ्ट सरकार की भी तारीफ की.
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चौतरफा घिरते दिख रहे ट्रंप
मिडिल ईस्ट में जिस तरह ट्रंप ने आक्रामक रुख अपनाया और भीषण जंग को आग दी, उसने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं. ईरान जंग के खिलाफ अमेरिका में ही ट्रंप के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन हुए हैं. कई अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप के बयानों और एक्शन की खुलकर आलोचना की. ट्रंप के खिलाफ संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए हटाने तक की मांग की गई. इसके अलावा NATO देशों ने भी ईरान युद्ध में ट्रंप का खुलकर साथ नहीं दिया. ट्रंप ने भी NATO देशों को कागज का शेर बताया. वहीं अब यूरोप में बैठे उनके दोस्त और समर्थक भी उनके खिलाफ खड़े दिख रहे हैं.
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