गाले में श्रीलंका के खिलाफ़ पहले टेस्ट के चौथे दिन देवदत्त पडिक्कल के पास संतुष्ट महसूस करने की पूरी वजह थी. साई सुदर्शन की गैर-मौजूदगी में नंबर 3 पर मिले मौके का बाएं हाथ के इस बल्लेबाज़ ने पूरा फ़ायदा उठाया. करीब दो साल बाद अपना पहला टेस्ट खेल रहे पडिक्कल ने पहली पारी में 167 और दूसरी पारी में 44 रन बनाए.उनकी शानदार बल्लेबाजी ने भारत को जीत की ओर मजबूत कदम बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई. साई सुदर्शन के चोटिल होने के कारण पडिक्कल को इस मैच में खेलने का मौका मिला लेकिन बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने कहा कि उनका ध्यान भविष्य में मिलने वाले मैचों की संख्या को लेकर चिंतित रहने के बजाय रन बनाने पर है.
गॉल टेस्ट के चौथे दिन का खेल खत्म होने के बाद जब पडिक्कल मीडिया के सामने आए तो उनसे इस टेस्ट के बाद प्लेइंग इलेवन में उनकी जगह को लेकर सवाल हुआ. 25 वर्षीय ने खुलासा किया कि इस सीरीज के बाद प्लेइंग इलेवन में उनकी जगह के बारे में कोई बातचीत नहीं हुई है.
पडिक्कल ने कहा,"मुझे नहीं लगता कि इस तरह की बातचीत होती है. यह महत्वपूर्ण है कि जब भी आपको वह मौका मिले, आप उसका लाभ उठाएं. मैं वास्तव में उन बातचीत की तलाश में नहीं रहता. मेरे लिए, यह महत्वपूर्ण है कि जब भी मुझे वह मौका मिले, मैं प्रदर्शन करूं. मैं वास्तव में खेल या इस तरह की चीजों पर ज्यादा जोर नहीं देता क्योंकि आधुनिक क्रिकेट में, आप वास्तव में इस तरह की चीजों की उम्मीद नहीं कर सकते हैं."
"मुझे लगता है कि जब भी आप वहां जाते हैं, तो आपसे प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है, और यदि आप ऐसा नहीं कर रहे हैं, तो आप हमेशा अपने प्रदर्शन या अपनी नौकरी या जो भी हो, उसके मामले में लाइन में रहते हैं. मुझे लगता है कि जब भी मैं वहां जाता हूं, मैं रन बनाने की कोशिश करता हूं, और अगर मैं ऐसा कर रहा हूं, तो मुझे यकीन है कि मैं और अधिक गेम खेलूंगा."
पडिक्कल ने अभी के लिए नंबर 3 की स्थिति को अपना बना लिया है, लेकिन वह इस बात पर जोर देते हैं कि बहुत आगे देखने का कोई महत्व नहीं है. उन्होंने कहा कि उनका ध्यान अपनी भूमिका के बारे में जरूरत से ज्यादा सोचने के बजाय सामने मौजूद स्थिति पर प्रतिक्रिया देने पर है.
इसके अलावा उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को अपना “अंतिम लक्ष्य” करार दिया और बताया कि कुछ मामूली तकनीकी बदलावों से उन्हें श्रीलंका के खिलाफ जारी पहले टेस्ट में बल्ले से सफलता मिली. पडिक्कल ने कहा,"मैं हमेशा से इस बात को लेकर स्पष्ट रहा हूं कि टेस्ट क्रिकेट मेरा अंतिम लक्ष्य है. इसलिए मैंने अपने खेल को इस तरह ढालने की कोशिश की है कि मैं अपनी बुनियादी तकनीक के साथ खेलते रहूं. मैं यह सुनिश्चित करता हूं कि जब भी जरूरत हो मैं लाल गेंद के क्रिकेट में आसानी से ढल सकूं क्योंकि यह मेरी पहली प्राथमिकता है."
घरेलू क्रिकेट में कर्नाटक की कप्तानी करने वाले पडिक्कल ने माना कि सीमित ओवरों और टेस्ट क्रिकेट के बीच लगातार बदलाव करना आसान नहीं है. इसके लिए उन्हें अपनी बल्लेबाजी में सावधानीपूर्वक बदलाव करने पड़ते हैं.
उन्होंने कहा,"सफेद गेंद के क्रिकेट में मेरी बल्लेबाजी की एक अलग तैयारी होती है. इससे मैं अधिक शॉट खेल सकता हूं और अपने हाथों को थोड़ा खुला रखता हूं. लेकिन लाल गेंद के क्रिकेट में इस पहलू को थोड़ा कसकर रखना जरूरी है. इसमें हाथ शरीर के कुछ ज्यादा करीब रखने पड़ते हैं."
उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलाव के साथ मानसिक बदलाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है. लगातार सफेद गेंद से लाल गेंद के क्रिकेट में आने-जाने के कारण यह आसान नहीं होता, लेकिन उन्होंने इसमें सुधार किया है और आगे भी बेहतर करने की उम्मीद है.
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