आप कल्पना कीजिए कि जब किसी 22 साल के क्रिकेटर को आईपीएल में 3-4 करोड़ रुपये अपने पहले ही अनुबंध में मिल जाएं, तो उसकी और पूरे परिवार की जिंदगी कैसे 360 डिग्री पर बदल जाती है, लेकिन इसके उलट भारतीय पूर्व बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा की जिंदगी में छप्पर फाड़ कर पैसा आया, तो उन्हें अलग ही अनुभव हासिल हुए. उथप्पा ने लिंकडिन पर लिखा कि इस बड़ी रकम ने उन्हें लगभग खत्म कर दिया. पूर्व बल्लेबाज ने युवाओं को बड़ी सीख देते हुए अनुभव साझा किया कि पैसा आने पर उन्हें क्या-क्या परेशानियां झेलनी पड़ीं. और इनसे निपटने के लिए क्या करना चाहिए
'पूरे परिवार की पीढ़ियों से ज्यादा कमा लिया'
रॉबिन उथप्पा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंकडिन पर लिखे लंबे पोस्ट में लिखा , 'मुझे 2008 में अपना पहला IPL अनुबंध मिल और यह 3.2 करोड़ रुपये का था. तब मैं 21 साल का था. मैंने कभी इतने पैसे कमाने की कल्पना भी नहीं की थी. 30 साल की उम्र में भी नहीं. 40 साल में भी नहीं. शायद कभी नहीं. बात यह नहीं है कि आपके पास बहुत सारा पैसा आ गया है. बात यह है कि आपने अपनी 22वीं सालगिरह से पहले ही सिर्फ एक सीज़न में अपने पूरे परिवार की पीढ़ियों से ज़्यादा कमा लिया.' उथप्पा आगे लिखते हैं, 'और कोई भी आपको सलाह देने के लायक नहीं होता क्योंकि आपके आसपास किसी ने भी कभी इस समस्या को हल नहीं किया होता. मैं अब हर उस युवा उद्यमी, हर एथलीट, हर फ़ाउंडर से यही कहता हूं. जिनके साथ मैं काम करता हूं और जिन्हें अचानक कोई बड़ी रकम मिलती है. पहला दौर, पहली लिक्विडिटी इवेंट या पहला बड़ा साल.'
'पैसे के साथ आती हैं समस्याएं'
पूर्व बल्लेबाज ने लिखा' 'बहुत सारे पैसे के साथ बहुत सारे लोग आते हैं. इसके साथ बहुत सारी समस्याएं भी आती हैं. आप समझ नहीं पाते कि इसका क्या करें और आपको सही तरह के मार्गदर्शन की ज़रूरत होती है. अगर आपके पास वह नहीं है, तो यह कई ऐसी समस्याओं को जन्म दे सकता है जो आपको बहुत लंबे समय तक उस चक्र में फंसाकर रख सकती हैं. चलिए मैं आपको बताता हूं कि "बहुत सारी समस्याओं" का असल में क्या मतलब होता है.'

उन्होंने पोस्ट में लिखा, 'जब किसी मध्यमवर्गीय परिवार के पास अचानक उस तरह का पैसा आता है, तो आपके दिमाग में दस लाख विचार आते हैं. वे दस लाख विचार दस लाख उलझनें पैदा करते हैं. वे उलझनें दस लाख गलतफहमियों का कारण बनती हैं. और इससे बहुत-बहुत मुश्किल परिस्थितियाँ पैदा हो जाती हैं. कोई भी आपको इसके लिए तैयार नहीं करता. एक ही नीलामी चक्र में मध्यम वर्ग से अमीर बनने के लिए कोई ओरिएंटेशन प्रोग्राम नहीं होता. बड़े परिवार (रिश्तेदारों) को यह समझाने के लिए कोई नियम-पुस्तिका (प्लेबुक) नहीं है कि आपका पैसा आपका है, उनका नहीं. किस चीज़ में निवेश करना है, किस पर भरोसा करना है और अचानक आपके करीब आने की कोशिश करने वाले लोगों को कैसे संभालना है, इस पर कोई क्लास नहीं होती. ये बातें स्कूलों में नहीं सिखाई जातीं.'
'गलत लोगों पर कर लेते हैं भरोसा'
उथ्पपा ने किसी दार्शनिक की तरह लिखऱते हुए कहा, ' उस स्थिति में, हम में से ज़्यादातर लोग सिर्फ प्रतिक्रिया (रिएक्ट) देते हैं. जहां हमें 'ना' कहना चाहिए, वहां हम 'हाँ' कह देते हैं. हम उन लोगों पर भरोसा कर लेते हैं जिन पर नहीं करना चाहिए. हम ऐसे निवेश करते हैं जिन्हें हम खुद नहीं समझते. हम चेक लिखकर परिवार की समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करते हैं. हम पैसे के दम पर शांति खरीदने की कोशिश करते हैं. इनमें से कुछ भी काम नहीं करता.. और इससे भी बुरी बात यह है कि इनमें से ज़्यादातर चीज़ें स्थिति को और बिगाड़ देती हैं.'
'मेरे लिए पैसे का कोई मतलब नहीं रह गया'
रॉबिन ने लिखा, 'साल 2009 तक जब मैं नैदानिक रूप से अवसाद (क्लीनिकली डिप्रेस्ड) से जूझ रहा था और दक्षिण अफ्रीका के एक होटल के 23वें माले की खिड़की की मुंडेर पर बैठा था, तब जो भी पैसा मैं कमा रहा था, उसका मेरे लिए कोई मतलब नहीं रह गया था. उसका कोई फर्क नहीं पड़ रहा था. ज़रा सा भी नहीं और बिल्कुल भी नहीं. यही वह मुख्य बात है जो मैं चाहता हूँ कि इसे पढ़ने वाला हर युवा, जो भारी कमाई कर रहा है, वह इस बात को समझे. पैसा आपको उन चीज़ों से नहीं बचा सकता जो वास्तव में मायने रखती हैं.'
'पैसा डिप्रेशन से नहीं बचाता'
उन्होंने लिखा,'यह आपको डिप्रेशन से नहीं बचाता. यह उस परिवार को ठीक नहीं करता जो आपके अमीर होने से पहले ही संघर्ष कर रहा था. यह आपके लिए समय, शांति या आत्म-सम्मान नहीं खरीदता. यह आपके आस-पास के लोगों के व्यवहार को आपके प्रति बेहतर नहीं बनाता. अगर कुछ करता भी है, तो यह उनके व्यवहार को ऐसे तरीकों से बदल देता है जिसके लिए आप तैयार नहीं थे. पैसा सिर्फ उस चीज़ को और बढ़ा देता है जो पहले से वहां मौजूद थी. अगर आपके परिवार में पहले से ही वित्तीय संस्कृति स्वस्थ थी, तो पैसा उसे और मज़बूत बनाता है. अगर नहीं थी, तो पैसा उन दरारों को ऐसा बना देता है ,जिन्हें नज़रअंदाज़ करना असंभव हो जाता है. अगर आपके पास पहले से ही एक मज़बूत आत्म-बोध था, तो पैसा आपको उस पर आगे बढ़ने देता है. अगर नहीं था, तो पैसा आपके उस कमज़ोर व नाज़ुक वजूद को भी धीरे-धीरे मिटा देगा.'
पूर्व बल्लेबाज की युवाओं को अहम सलाह
साल 2007 टी20 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रॉबिन ने कहा, 20 के दशक के हर उस व्यक्ति के लिए जो इसे पढ़ रहा है और जिसका अभी-अभी एक शानदार साल रहा है, कोई बड़ा बोनस, पहला राउंड, कोई एग्ज़िट, या अचानक मिला कोई धन-लाभ, उसे यहां मेरी सलाह है. ज़रूरत पड़ने से पहले ही मदद लें. एक ऐसा वित्तीय सलाहकार (फाइनेंशियल एडवाइज़र) खोजें जिसके हित आपके हितों से मेल खाते हों. एक थेरेपिस्ट या काउंसलर जिसकी आपके पैसे में कोई हिस्सेदारी न हो. ऐसे उम्रदराज़ लोगों का एक छोटा सा दायरा जिन्होंने यह सब पहले अनुभव किया हो और जिनका आपसे कोई स्वार्थ न हो.'
'पैसा आने से पहले यह तय कर लें'
'पैसा आने से पहले ही यह तय कर लें कि इसे लेकर आपके सिद्धांत क्या हैं. आप किसकी मदद करेंगे. कैसे करेंगे. क्यों करेंगे और आप क्या बिल्कुल नहीं करेंगे, चाहे कोई भी आपसे कहे. और यह समझें कि पैसा जीत नहीं है. यह एक परीक्षा है. जो लोग इसे अच्छी तरह से संभालते हैं, वे वे नहीं हैं जो सबसे ज़्यादा कमाते हैं. वे वे लोग हैं जो पैसा आने से पहले ही उसे संभालने का ढांचा (स्ट्रक्चर) तैयार कर लेते हैं'
'अगर आप पहले से ही इस तूफ़ान के बीच में हैं, अगर आपको पैसा मिल चुका है और आप पहले से ही महसूस कर रहे हैं कि आप कितने अप्रशिक्षित थे, तो अभी भी बहुत देर नहीं हुई है. लेकिन अगर आपको मदद की ज़रूरत है, तो तुरंत और अपने उस पारिवारिक दायरे से बाहर के लोगों से लें, जिसकी सहनशक्ति का परीक्षण फिलहाल यह पैसा कर रहा है. सबसे बड़ी गलती जो मैं लोगों को करते देखता हूं, वह है मदद मांगने से मना करना क्योंकि मदद मांगने का मतलब यह स्वीकार करना होगा कि उन्हें नहीं पता था कि वे क्या कर रहे थे.आपको नहीं पता था. हममें से किसी को नहीं पता था. यह कोई चरित्र की कमी या ऐब नहीं है. यह सिर्फ एक स्थिति है. फिर भी मदद लें. इसके लिए पैसे दें, यह आपको सालों-साल, बल्कि दशकों के दर्द से बचा लेगा'
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं