यह कहना गलत नहीं होगा कि इंग्लैंड के खिलाफ बुधवार को पहले वनडे के साथ ही अगले साल दक्षिण अफ्रीका सहित तीन देशों में खेले जाने वाले फिफ्टी-फिफ्टी विश्व कप की 'प्लानिंग प्रक्रिया' का भी आगाज हो गया. और इसकी पुष्टि बड़ी सहजता से कप्तान शुभमन गिल (Shubman Gill) ने पूर्व संध्या पर यह कहकर कर दी, उन्होंने विराट से इस बारे में बात की कि फिलहाल जो खिलाड़ी टीम में हैं, उनमें कौनअगले साल विश्व कप टीम का हिस्सा बन सकते हैं. और कौन ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्हें विश्व कप सेट-अप (प्लान) में शामिल किया जा सकता है.'हालांकि, भारतीय कप्तान ने यह नहीं बताया कि उनके सवालों का कोहली ने क्या जवाब दिया (न ही यह व्यावहारिक था), लेकिन यह अब सार्वजनिक हो चुका है कि विश्व कप 2027 (World Cup 2027) की 'गंभीर प्लानिंग प्रक्रिया' का आगाज इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे मैच से हो चुका है. इसमें कोई दो राय नहीं कि टीम चुने जाने तक या आने वाले कुछ महीनों में अगर सबसे ज्यादा मीडिया की तरफ से सवाल होंगे, या किसी विषय पर पूर्व दिग्गजों या फैंस के बीच चर्चा होगी, तो वह यही ही होगा कि क्या रोहित शर्मा (Rohit Sharma) और विराट कोहली (Virat Kohli) वनडे विश्व कप टीम का हिस्सा होंगे. यह बहुत ही अहम और बड़ा सवाल है, लेकिन फिलहाल इसका 'आधा हिस्सा' रहस्य की परतों में लिपटा हुआ है.
कप्तान गिल के बयान का मतलब समझे आप?
शुभमन गिल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो सार्वजनिक मंच पर कहा, "मैंने कोहली से वर्तमान टीम में विश्व कप सेट में कौन शामिल है और कौन ऐसे खिलाड़ी हैं, जो हो सेट-अप में हो सकते हैं." गिल का यही बयान अपने आप में 'पूरी तस्वीर' साफ कर देता है. यहां किसी को ज्यादा यह डिकोड करने की जरूरत नहीं. यहां बहुत ही अहम प्वाइंट है! गिल विराट से पूछ रहे हैं? लेकिन सीनियर रोहित से उन्होंने यह बात क्यों नहीं की? बहरहाल, पूर्व कप्तान विराट से विश्व कप को लेकर 'ऐसा संवाद' यह समझाने और बताने के लिए काफी है कि कम से कम कोहली तो अगले विश्व कप की प्लानिंग का हिस्सा हैं. आखिरकार कप्तान कोहली से बहुत ही अहम मुद्दे पर सलाह मांग रहा है. जाहिर है कि अब ऐसे में संशय के बादल रोहित शर्मा का रुख कर लेते हैं.
विराट का केस अपने आप में बहुत ज्यादा मजबूत
ऐसा नहीं कि गौतम ने कोशिश नहीं की होगी! गंभीर की राय विराट को लेकर किसी से छिपी नहीं है!. और यह तो सार्वजनिक है ही कि गंभीर कितने ज्यादा जिद्दी हैं. लेकिन यह कोहली हैं, जिन्होंने पिछले 2 साल के भीतर 'गंभीर एंड कंपनी' को एक सूत का मौका भी नहीं दिया. और शायद यही वजह है कि अगरकर एंड कंपनी और बीसीसीआई विराट के साथ खड़े होने पर मजबूर हैं. कोहली ने पिछले दो साल (24 जुलाई 2024 से, 24 जुलाई, 2026 तक) खेले 20 मैचों में 56.11 के औसत और 4 शतक, 5 अर्द्धशतकों से 954 रन बनाए हैं. और जब प्रदर्शन ऐसा है, तो फिर भला कौन कोहली को वर्ल्ड कप 2027 प्लानिंग से बाहर कर सकता है?

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...लेकिन रोहित का केस उतना मजबूत नहीं
इसी समयावधि (24 जुलाई 24, से 24 जुलाई 26) तक रोहित ने भी प्रभावी प्रदर्शन किया है, लेकिन कोहली के मुकाबले यह खासा पीछे छूट जाता है. इस दौरान रोहित ने खेले 24 वनडे मैचों की इतनी ही पारियों में 44.43 के औसत, 2 शतक, 7 अर्द्धशतक से 1022 रन बनाए हैं, लेकिन पचास का औसत न छूना एक ऐसा तर्क है, जो प्रबंधन को मौका दे सकता है. लेकिन असल और एक बड़ी बात औसत से कहीं और कहीं आगे की है.
अब यह मुद्दा बहुत अहम हो चला हैं "यहां से"
औसत से इतर स्ट्राइक-रेट अब एक ऐसा पहलू हो चला है, जिसकी अनदेखी "यहां से" नहीं की जा सकती. और यह भी एक वह पहलू है, जो रोहित के मामले में सेलेक्टर और प्रबंधन लपक सकता है! साल 2023 से लेकर 2025 चैंपियंस ट्रॉफी तक रोहित ने 67.41 का औसत और 122.56 का स्ट्राइक रेट निकाला. मगर, पिछले साल अक्टूबर 2025 से अभी तक (14 जुलाई , 26) उनका औसत 44.50 और स्ट्राइक-रेट 86.12 पर आ गया. वैसे एक अंतर यहां बहुत अहम है कि पहली अवधि में रोहित टी20 भी खेल रहे थे? तो क्या माना जाए कि टी20 फॉर्मेट से अलग होने का असर रोहित के वर्तमान औसत और खासकर स्ट्राइक-रेट पर पड़ा है? यूं तो कोहली का स्ट्राइक-रेट भी सौ से नीचे का ही है, लेकिन नंबर-3 और ओपनर के स्ट्राइक-रेट की तुलना का कोई मतलब नहीं है. या क्या है?

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बात रोहित के इस पहलू पर भी होगी ही होगी!
यह बच्चा-बच्चा बता देगा कि रोहित फिटनेस के मामले में कहां खड़े हैं और विराट कहां हैं. विराट की फिटनेस, इच्छाशक्ति और उनका वर्क एथिक्स ऐसा है कि वह अगले कई और साल तक इसके दम पर अपना करियर खींच सकते हैं, लेकिन रोहित को लेकर फिटनेस को मिलाते हुए एक और बड़ा सवाल मुंह उठाए खड़ा होगा. और इसकी अनदेखी न ही सेलेक्टर कर सकते हैं और न ही बीसीसीआई. और यह है उनकी उम्र. अगले विश्व कप के समय जहां विराट कोहली 38 साल के होंगे, तो वहीं रोहित शर्मा मेगा इवेंट से कई महीने पहले ही 40 के होकर 41वें साल में चल रहे होंगे? ऐसे में उनकी चपलता, मैदान पर फील्डिंग, कोई और दावेदार वैकल्पिक ओपनर, उनके स्ट्राइक-रेट सहित उस समय उनकी फॉर्म की भी समीक्षा अगरकर एंड कंपनी के दायरे आ जाएगी. क्या ऐसा नहीं है?
रोहित का फुटवर्क, तकनीक 'वहां' की तेज पिचों पर मुफीद रहेगी?
इसमें कोई दो राय है ही नहीं कि रोहित व्हाइट-बॉल फॉर्मेट के सबसे महान खिलाड़ियों में से एक हैं. यह भी सही है कि उन्हें रन बनाने के लिए पैर चलाने की अभी तक तो जरूरत नहीं ही पड़ी है. खासकर भारतीय उपमहाद्वीप की पिचों पर. बाकी बल्लेबाजों की तुलना में कुछ माइक्रो सेकेंड ज्यादा का होना ही रोहित के लिए रन निकालने के लिए काफी है, लेकिन 'यहां से' बड़ा सवाल यह भी होने जा रहा है कि क्या रोहित 2027 के विश्व कप के मेजबान देशों (दक्षिण अफ्रीका, जिंबाब्वे और नामीबिया) की तेज और जीवंत पिचों पर 41वें साल में सफल रहेंगे? क्या इन पिचों पर रोहित के फुटवर्क की जरूरत पड़ेगी या नहीं? कहीं इन तेज पिचों पर उनका एलीगेंस (बैटिंग की सहजता, सुंदरता) बरकरार रहेगी? और अगर रहेगी, तो यह कितनी रहेगी? 'यह एलीगेंस' बड़े से बड़े धुरंधर नैसर्गिक बल्लेबाज को साधने के लिए 'बहुत कुछ' करना होता है. एलीगेंस को लेकर यह भी अहम है कि यह किस स्तर का है? यह अपने चरम का भी है या नहीं? रोहित की मेहनत पर कोई मूर्ख ही शक करेगा, लेकिन 41वें साल में हालात विशेष के लिए जरूरी उनका एलिगेंस या इसके स्तर को लेकर सवाल तो बराबर रहेगा. खासकर एक ऐसे समय में, जब पूर्व कप्तान सिर्फ एक ही फॉर्मेट में खेल रहे हैं. तेज पिचों पर फुटवर्क को एक बार को किनारे रख देते हैं.
विश्व कप से पहले टीम इंडिया के पास 27 वनडे? रोहित के पास कितने?
'यहां से (14 जुलाई 2026)' से अगले साल के आखिर में होने वाले वर्ल्ड कप तक टीम इंडिया द्विपक्षीय सीरीज में लगभग 20 वनडे मैच खेलेगी. वहीं, अगर भारत अगले साल एशिया कप में फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लेता है, तो इसमें 7 वनडे मैच और जोड़ लीजिए. विश्व कप से पहले करीब-करीब 27 वनडे मैच. ऐसे में रोहित और खासकर टीम इंडिया के चयन से पहले तक पूर्व कप्तान को कितने मैच मिलेंगे? बात यह है कि कुल मिलाकर जितने भी मिलेंगे, रोहित को उन्हीं मैचों में फॉर्म, औसत, स्ट्राइक-रेट, एलीगेंस, वगैरह-वगैरह को बनाकर रखना होगा. इंग्लैंड के बाद भारत विंडीज से घर में 3 वनडे मैचों की सीरीज खेलेगा, लेकिन शर्मा जी का असल टेस्ट इसके बाद न्यूजीलैंड की जमीन पर इसी साल नवंबर में खेले जाने वाली 5 मैचों की सीरीज पर होगा. और इसी सीरीज में उन पर बराबर 'गंभीर नजर' टिकी होगी रोहित के बारे में स्पष्ट राय बनाने के लिए. और न्यूजीलैंड की स्पॉन्जी बाउंस (टेनिस बॉल जैसा बाउंस) वाली पिचों पर प्रदर्शन विश्व कप की प्लानिंग में फिट होने के लिहाज से रोहित के लिए कई मानक स्थापित करेगा.
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