- इंटरनेशनल खिलाड़ी का यह क्या हाल!
- यह कोरोना क्या-क्या कराएगा !!
- इंटरनेशनल क्रिकेटर, बीएड की डिग्री...फिर भी रोजगार नहीं!
कोरोना जो न कराए, वह थोड़ा!! कोविड-19 महामारी (Coronavirus Pandemic) ने किसी को भी नहीं छोड़ा है, तो सरकार के सामने ऐसे हालातों को भी ला दिया है, जो किसी भी व्यवस्था के लिए शर्म की बात है. इस दौर में अलग-अलग खेलों से खिलाड़ियों की ऐसी तस्वीरें भी सामने आयी हैं, जो अपना पेट पालने के लिए न जाने क्या-क्या कर रहे हैं. इन्हीं में से एक हैं भारतीय दिव्यांग टीम के कप्तान राजेंद्र सिंह धामी (Rajendra Singh Dhami). राजेंद्र पर हालात की ऐसी मार पड़ी कि यह पूर्व कप्तान अब मनरेगा के तहत पत्थर तोड़ने का काम कर रहा है और इतना होने पर भी अभी तक उत्तराखंड या केंद्र सरकार ने इस अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और बीएड डिग्रीधारी की कोई सुध नहीं ली है.
उत्तराखंड व्हीलचेयर टीम के कप्तान रहे राजेंद्र सिंह धामी को तमाम कोशिशें करने के बावजूद राज्य सरकार से कोई मदद नहीं ही मिली. बता दें कि राजेंद्र सिंह धामी खुद की अपनी टीम भी तैयार कर रहे हैं. वह 19 युवा खिलाड़ियों को कोचिंग भी दे रहे हैं. लेकिन बदनसीबी देखिए कि यह दिव्यांग क्रिकेटर जीवन चलाने के लिए महात्मा गांधी रोजगार योजना के तहत निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पत्थर तोड़ रहे हैं.
This is the life story of Sh Rajendra Singh Dhami from #Pithoragarh #Uttarakhand, once a champion cricketer; now a labourer. The former captain of the Indian wheelchair cricket team is forced to work today under the MNREGA scheme. Hope we can join hands to extend support to him! pic.twitter.com/BeoMHQJlGU
— Anoop Nautiyal (@Anoopnautiyal1) July 27, 2020
राजेंद्र धामी ने कहा कि मैंने देखा है कि कई दिव्यांग लोग बहुत ही तनाव और दबाव में जीवन जी हैं. ये लोग उम्मीद खो रहे हैं. मैं भी कुछ इसी तरह के हालात का शिकार हूं, लेकिन मैं बिल्कुल भी हार मानने नहीं जा रहा. मैं कोशिश कर रहा हूं कि मैं ऐसे लोगों को जीवन का उद्देश्य दे सकूं, जिसके पकड़ वह आगे किसी सितारे की तरह चमक सकें. उन्होंने कहा कि मैं टूर्नामेंटों की तैयारी के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था और दिव्यांग बच्चों को कोचिंग दे रहा था, लेकिन कोविड-19 बीमारी ने सब खराब कर दिया. वर्तमान हालत ने राजेंद्र को रुद्रपुर से उनके राजकोट स्थित पैतृक गांव लौटने पर मजबूर कर दिया.
यहां पर व्यंग्यात्मक बात यह है कि धामी के पास बीएड की डिग्री है और उन्हें दिव्यांग टीम के बारे में साल 2014 में सोशल मीडिया के जरिए पता चला. धामी ने कहा कि शुरुआत में यह मेरे लिए जुनून से ज्यादा शौक था, लेकिन वक्त गुजरने के साथ ही यह मेरे लिए जिंदगी बन गया. धामी ने पांच बार भारतीय दिव्यांग टीम का नेतृत्व किया है और वह काठमांडू, मलयेशिया और बांग्लादेश में खेल चुके हैं. सिर्फ दो साल की उम्र में ही धामी पोलिया का शिकार हो गए थे.
VIDEO: कुछ दिन पहले विराट ने करियर को लेकर बड़ी बात कही थी.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं