SachinTendulkar vs Vaibhav Sooryavanshi : यूं तो सचिन तेंदुलकर से वैभव सूर्यवंशी की तुलना करना बईमानी है, लेकिन जिस मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैच में जसप्रीत बुमराह को 15 साल के वैभव ने तीन गेंद में दो छक्के लगाए, उसे देखकर कहीं न कहीं सचिन तेंदुलकर के शुरुआती दिन की याद ताजा हो गई. दुनिया के सबसे महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने साल 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया था, पाकिस्तान के उस दौरे में एक एग्जीबिशन मैच भी खेला गया था. वह एग्जीबिशन मैच 20-20 ओवर का था. उस मैच में सचिन ने पाकिस्तान के बड़े से बड़े गेंदबाजों का सामना किया था. सचिन ने उस मुकाबले में इमरान खान, वसीम अकरम, आकिब जावेद, वकार यूनिस, अब्दुल कादिर और मुश्ताक अहमद जैसे गेंदबाज के सामने बल्लेबाजी की थी.

जब 16 साल के सचिन ने विश्व के महान गेंदबाजों के खिलाफ की बल्लेबाजी
दरअसल, 16 दिसंबर 1989 को खेले गए उस एग्जीबिशन मैच में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी की और 20 ओवर में 157 रन बनाए थे. उस समय सचिन तेंदुलकर की उम्र 16 साल थी. ऐसे में तेंदुलकर को नंबर 5 पर बैटिंग करने का मौका मिला था. केवल 16 साल की उम्र में सचिन ने पाकिस्तानी तेज गेंदबाजी अटैक के खिलाफ ऐसी बल्लेबाजी की जिसे देखकर हर किसी को यकीन हो गया कि यह बल्लेबाज विश्व क्रिकेट में कुछ अलग करेगा. दरअसल, इस मैच में सचिन ने अब्दुल कादिर के एक ओवर में 4 छक्के लगाए थे.

अब्दुल कादिर को उस समय विश्व क्रिकेट का सबसे बेहतरीन लेग स्पिनर माना जाता था. ऐसे में तेंदुलकर ने 16 साल की उम्र में जिस निडरता का सबूत दिया था उसने ही यह साबित किया कि यह बल्लेबाज कुछ बड़ा करने वाला है. उस मैच में सचिन ने 18 गेंद पर 53 रन बनाए थे. सचिन की उस पारी ने उन्हें दुनिया भर में अमर कर दिया था. उस पारी को देखकर ही लोगों ने भविष्यवाणी कर दी थी कि सचिन दुनिया पर राज करने वाले हैं.
जैसे सचिन वैसे वैभव..
ऐसा ही पल 2026 में आईपीएल में खेले गए मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैच में आया, जब दुनिया के नंबर वन गेंदबाज के खिलाफ 15 साल के वैभव ने 3 गेंद पर 2 छक्के लगाए. खासकर पहली बार बुमराह का सामने करने पर वैभव ने छक्का लगाया. वैभव की इस निडरता ने उन्हें एक खतरनाक बल्लेबाज बना दिया है. बुमराह की पहली ही गेंद पर छक्का लगाना कोई तुक्का नहीं है. यह भविष्य की ओर कुछ इशारा कर रहा है. भले ही यहां सचिन औऱ वैभव की तुलना नहीं हो सकती लेकिन जो अंदाज वैभव ने खासकर टी-20 में दिखाया है उससे कहीं न कहीं एक बड़े खिलाड़ी की ओर बढ़ने का एक बड़ा कदम है.

बेहतरीन गेंदबाजों के खिलाफ निडर रवैया
ठीक वैसे ही जैसे 16 साल की उम्र में तेंदुलकर ने अब्दुल कादिर के खिलाफ निडर होकर बल्लेबाजी की थी. वैभव भी आज के महान गेंदबाजों के सामने कोई डर नहीं दिखा रहे हैं. क्रिकेट विशेषज्ञों ने उनकी "हिम्मत" की तारीफ की है, जब उन्होंने जसप्रीत बुमराह की पहली ही गेंद पर छक्का जड़ा और मोहम्मद सिराज और राशिद खान जैसे गेंदबाजों पर हावी रहे. नवजोत सिंह सिद्धू और सबा करीम जैसे पूर्व खिलाड़ियों ने कहा है कि 15 साल की उम्र में वैभव, तेंदुलकर की उसी उम्र की तुलना में कहीं ज्यादा जोर और बल्ले की गति पैदा करते हैं. यह अद्भूत है.
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