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This Article is From Jul 26, 2016

जलीकट्टू मामला : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, परंपरा के नाम पर कुप्रथाओं को इजाजत नहीं

जलीकट्टू मामला : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, परंपरा के नाम पर कुप्रथाओं को इजाजत नहीं
जलीकट्टू में शामिल लोग (फाइल फोटो)
  • जलीकट्टू मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की
  • मारा रोक लगाने का फैसला सही नहीं तो मामले को संवैधानिक बेंच को भेज देंगे
  • मामले की अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी।
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नई दिल्ली: जलीकट्टू मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि क्या परंपरा के नाम पर बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को इजाजत दे देनी चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि 18वीं शताब्दी में 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के बाल विवाह होते थे, जो अब नहीं होते,  तो क्या उसे भी इजाजत दी जाए।

कोर्ट ने कहा, जलीकट्टू को क्या इजाजत दे देनी चाहिए भले ही वो 5000 साल पुरानी परंपरा हो और कानून के दायरे से बाहर हो। अगर तमिलनाडू सरकार हमें संतुष्ट करे कि हमारा रोक लगाने का फैसला सही नहीं तो मामले को संवैधानिक बेंच को भेज देंगे। मामले की अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी।

केंद्र सरकार ने जलीकट्टू पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया और कहा कि जलीकट्टू से रोक हटाई जानी चाहिए। यह कोई खूनी खेल नहीं है, न ही सांडों को कोई नुकसान होता है। यह पुरानी परंपरा है जिसमें 30 सेकेंड से लिए सांड को काबू कर शक्ति प्रदर्शन किया जाता है। यह परंपरा महाभारत काल में भी थी जब श्रीकृष्ण ने कंस के महल में सांड को काबू किया और कौशल की राजकुमारी से शादी करने के लिए सात सांडों को काबू करने की कथा भी है। केंद्र ने तमाम कदम उठाए हैं कि खेल के दौरान सांड को कोई नुकसान न हो।

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