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'घर लौट आओ, भारत को आपकी जरूरत है', Zoho वाले श्रीधर वेम्‍बू ने अमेरिका में रह रहे भारतीयों से क्‍यों की ये अपील?

Zoho के को-फाउंडर श्रीधर वेम्‍बू का यह पोस्ट ऐसे समय में आया जब एच-1बी वीजा प्रोग्राम, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के लिए करती हैं, अमेरिकी प्रशासन की ओर से नए दबाव का सामना कर रहा था.

'घर लौट आओ, भारत को आपकी जरूरत है', Zoho वाले श्रीधर वेम्‍बू ने अमेरिका में रह रहे भारतीयों से क्‍यों की ये अपील?
Zoho Co-Founder श्रीधर वेम्‍बू की अमेरिका में रह रहे भारतीयों से अपील- घर लौट आओ

अमेरिका में बाहरी प्रोफेशनल्‍स के लिए चल रहे वीजा प्रोग्राम विवाद के बीच जोहो (Zoho) के को-फाउंडर और चीफ-साइंटिस्‍ट श्रीधर वेम्‍बू ने सोमवार को अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से भारत लौटने की अपील की है. अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्‍स एच-1बी वीजा प्रोग्राम के जरिये अमेरिकी टेक कंपनियों में काम कर रहे हैं और वहां इस वीजा प्रोग्राम को सस्‍पेंड करने की मांग हो रही है. कंपनियों पर अमेरिकी प्रशासन का भारी दबाव है. ऐसे माहौल में श्रीधर वेम्‍बू ने अमेरिका में रह रहे भारतीयों को खुला खत लिखा है. 

जोहो के को-फाउंडर ने कहा कि अमेरिका में रह रहे भारतीयों को वापस आकर भारत की तकनीकी क्षमता को बढ़ाने और देश के विकास में योगदान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि दुनिया भर में भारतीयों को जो सम्मान मिलता है, साथ ही देश की समृद्धि और सुरक्षा, यह सब भारत की तकनीकी क्षमता पर निर्भर करेगा.

37 साल पहले अमेरिका गए थे, भारत लौटे और सफलता हासिल की  

वेम्‍बू ने एक्स पर भारतीयों को संबोधित करते हुए एक खुला खत पोस्ट किया. इसमें उन्होंने 37 साल पहले अमेरिका जाने के अपने अनुभव को याद किया, जब उनके पास कोई पैसा नहीं था, लेकिन उनके पास भारत से मिली अच्छी शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत थी.

उन्होंने कहा, 'आपने बहुत बड़ी सफलता हासिल की है. अमेरिका हमारे लिए अच्छा रहा है. इसके लिए हमें हमेशा आभारी रहना चाहिए, आभार जताना ही हमारा भारतीय तरीका है.'

हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि इस समय कई अमेरिकी लोगों का मानना है कि भारतीय अमेरिकी लोगों की नौकरियां 'छीन लेते हैं' और अमेरिका में भारतीयों की सफलता को गलत तरीके से देखा जाता है.

वेम्‍बू ने कहा कि अमेरिका में ऐसे विचार रखने वाले लोगों की संख्या शायद बहुमत में नहीं है, लेकिन वह बहुत कम भी नहीं है.

अमेरिका में 'कट्टर दक्षिणपंथी' और 'जागरूक वामपंथी' की लड़ाई 

उन्होंने कहा कि अमेरिकी राजनीति में भारतीय सिर्फ दर्शक की भूमिका में हैं. उन्होंने आगे कहा कि उनके पास केवल 'कट्टर दक्षिणपंथी' और 'जागरूक वामपंथी' के बीच चुनने का विकल्प है. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि इनमें से कोई भी पक्ष विदेशों में भारतीयों के सम्मान की गारंटी नहीं देता.

उन्होंने लिखा, 'आपको लग सकता है कि अगला चुनाव इस समस्या को ठीक कर देगा, लेकिन आपकी पसंद ऐसे लोगों के बीच होगी जो हमारी भारतीय सभ्यता से नफरत करते हैं और ऐसे लोगों के बीच जो सभ्यता से ही नफरत करते हैं. यही ‘कट्टर दक्षिणपंथी' बनाम ‘जागरूक वामपंथी' की लड़ाई है.'

उन्होंने अमेरिका में सफलता पाने वाले लोगों से आग्रह किया कि वे भारत लौटकर अपनी तकनीकी दक्षता से देश के निर्माण में मदद करें. उन्होंने लिखा, 'जैसे-जैसे हम भारत में यह दक्षता विकसित करेंगे, हमारी सभ्यतागत शक्ति स्वयं स्थापित होती जाएगी.'

पोस्ट में कहा गया, 'अगर भारत गरीब बना रहता है, तो ‘वोक लेफ्ट' हमें दया भाव से नैतिक उपदेश देगा और ‘हार्ड राइट' तिरस्कार के साथ अलग तरह के नैतिक उपदेश देगा. हमें इन दोनों में से किसी को भी सम्मान नहीं मानना चाहिए.'

'भारत माता को आपकी जरूरत है'

उन्होंने कहा, 'हालांकि आपमें से कई लोगों के लिए इस बात पर विचार करना मुश्किल हो सकता है, फिर भी कृपया घर लौट आइए. भारत माता को आपकी प्रतिभा की आवश्यकता है. हमारी विशाल युवा आबादी को उस तकनीकी नेतृत्व की जरूरत है, जिसे आपने इन वर्षों में हासिल किया है, ताकि उन्हें समृद्धि की राह पर आगे बढ़ाया जा सके. आइए, हम सब मिलकर इसे एक मिशनरी उत्साह के साथ पूरा करें.'

श्रीधर वेम्‍बू का यह पोस्ट ऐसे समय में आया जब एच-1बी वीजा प्रोग्राम, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के लिए करती हैं, अमेरिकी प्रशासन की ओर से नए दबाव का सामना कर रहा था.

रिपब्लिकन सांसदों के एक समूह ने एक कानून प्रस्तावित किया है, जिसमें एच-1 बी कार्यक्रम को तीन साल के लिए निलंबित करने की मांग की गई है. उनका कहना है कि इस कार्यक्रम का दुरुपयोग करके अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन वाले विदेशी श्रमिकों को रखा जा रहा है.

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