भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. इस माहौल में घरेलू निवेशक किसी तरह बाजार को संभाल रहे हैं, लेकिन विदेशी निवेशक भारत से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं और लगातार अपने पैसे निकाल रहे हैं. ऐसे में सभी के मन में सवाल है कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के बावजूद विदेशी निवेशक भारत से क्यों बाहर जा रहे हैं. इस सवाल का जवाब मार्केट एक्सपर्ट अजय श्रीवास्तव ने दिया. एनडीटीवी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसके पीछे कोई छोटी वजह नहीं, बल्कि बाजार की एक बड़ी कमजोरी है. उनके अनुसार भारतीय मार्केट में चार नए जमाने के सेक्टर की कमी है और यही सबसे बड़ी वजह है कि विदेशी निवेशक यहां से अपना पैसा निकाल रहे हैं.
ग्लोबल इन्वेस्टर को क्या चाहिए नए सेक्टर्स
मार्केट एक्सपर्ट अजय श्रीवास्तव के अनुसार, पिछले करीब दो सालों से विदेशी निवेशक धीरे-धीरे भारतीय शेयर बाजार में अपना पैसा कम कर रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि अब दुनिया भर में निवेश का तरीका बदला है. आज बड़े ग्लोबल फंड सेक्टरों की बजाय मोर्डन इंडस्ट्री में पैसा लगाना चाहते हैं. भारत के पास ऑटो, बैंकिंग और फार्मा जैसे पुराने सेक्टरों की मजबूत कंपनियां जरूर हैं और उन्होंने अच्छा रिटर्न भी दिया है. लेकिन जब बड़े स्तर पर विदेशी निवेश की बात आती है, तो निवेशकों को भारत में नए सेक्टर कम नजर आते हैं, जहां वो लंबे समय के लिए बड़ा निवेश कर सकें. रकम लगा सकें.
देश में ये चार मिसिंग सेक्टर्स
अजय श्रीवास्तव ने बताया कि इस समय दुनिया में निवेशक बड़ा पैसा खास तौर पर चार नए सेक्टर्स में लगा रहे हैं, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी शामिल है. लेकिन समस्या ये है कि भारतीय शेयर बाजार में इन सेक्टरों से जुड़ी बड़ी और पूरी तरह काम करने वाली कंपनियां नहीं हैं. यही वजह है कि जब कोई विदेशी फंड भारत में निवेश के मौके देखता है, तो उसे यहां एआई या रोबोटिक्स जैसी बड़ी कंपनियां नहीं मिलतीं, जैसी अमेरिका में आसानी से मिल जाती हैं. इस कमी की वजह से विदेशी निवेशक भारत में बड़ा पैसा लगाने से बच रहे हैं और अपना निवेश उन देशों की ओर ले जा रहे हैं, जहां उन्हें ऐसे आधुनिक सेक्टरों में अच्छे मौके मिलते हैं।
कैसे आएगा विदेशी निवेशकों का पैसा?
अजय श्रीवास्तव के अनुसार विदेशी निवेशकों की वापसी कराने के लिए भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम और न्यू-एज कंपनियों को तेजी से शेयर बाजार में लिस्ट होना होगा. जब तक भारत के पास डीप-टेक, एआई और रोबोटिक्स से जुड़ी बड़ी लिस्टेड कंपनियां नहीं होंगी, तब तक विदेशी निवेशक की ये बिकवाली का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा.
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