Gold Vs Venom: दुनियाभर में सांपों के प्रति लोगों की उत्सुकता, आकर्षण और डर का भाव हमेशा से बना रहा है. WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनियाभर में मौजूद सांपों की 3,000 से ज्यादा प्रजातियों में से महज 10% यानी 300 से भी कम प्रजातियां जहरीली होती हैं. ताइपन जैसी कुछेक प्रजातियां तो ऐसी हैं, जिनके एक ही डंक (दंश) में इतना जहर होता है, तो 100 लोगों की जान ले सकता है. एक रिपोर्ट बताती है कि सांप के काटने से हर साल 1,40,000 लोगों की मौत हो जाती है. इसी आंकड़े से समझिए कि सांप के जहर के लिए दवा बनाना कितना जरूरी है और ये दवा बनती है, सांप के जहर से ही.

हाल के दिनों में गुजरात के धरमपुर स्थित सर्प अनुसंधान संस्थान (Snake Research Institute) भी चर्चा में है, जो दवा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. गुजरात सरकार समर्थित इस संस्थान ने हाल ही में कोबरा, कॉमन क्रेट, रसेल वाइपर जैसी प्रजातियों के हाई क्वालिटी विष की ई-नीलामी में उम्मीद से कहीं ज्यादा कीमत पाई. अब यहां अहम सवाल ये कि सांप का विष आखिर कितना कीमती होता है. ये भी जानेंगे, लेकिन उससे पहले जानिए कि सांप में ये जहर बनता कहां है और इसे कैसे निकाला जाता है.

कैसे निकाला जाता है सांप का जहर?
सांपों के काटने से बड़ी संख्या में लोगों की मौतें होती हैं और इसी को देखते हुए एंटीडॉट यानी विष रोधी दवा बनाने का महत्व और जरूरत दोनों बढ़ जाती है. Let's Talk Science के अनुसार, सांप के सिर के पिछले हिस्सेकी ग्रंथियों में विष यानी रह बनता है और काटने के बाद शरीर में एंट्री करता है. जब विष रोधी दवा बनाते हैं तो सांप का जहर बड़ी सावधानी से निकाला जाता है. विष निकालने के प्रोसेस में सांप को किसी पात्र में काटने दिया जाता है, फिर उस पात्र में छोड़े गए विष को जमा कर लिया जाता है. या फिर दूसरे तरीके में उसके मुंह में विष फेंकने वाली जगह से विष एकत्र किया जाता है.
यहां देखिए वीडयो:
VIDEO | Gujarat is set to develop its own region-specific antivenom to reduce snakebite deaths, with the Dharampur-based Snake Research Institute playing a pivotal role in venom extraction and research.
— Press Trust of India (@PTI_News) February 22, 2026
Backed by the Gujarat government, the institute received… pic.twitter.com/BywHZIdOFm
सोने से कितना कीमती सांप का जहर?
फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के अनुसार, विष की मात्रा अलग-अलग प्रजातियों के सांपों में अलग-अलग होती है, जो 1 मिलीग्राम से लेकर 850 मिलीग्राम या उससे अधिक तक हो सकती है. कुछ सांपों का जहर दर्द निवारक और खून के थक्के करने में इस्तेमाल किया जाता है.

किंग कोबरा का जहर प्रोटीन से भरपूर माना जाता है, जो कि पुराने दर्द के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं में उपयोग किया जाता है. इसे दुनिया का दूसरा सबसे महंगा जहर बताया जाता है, जिसकी कीमत 1.5 लाख डालर/ गैलन बताई जाती है. स्मिथसोनियन पत्रिका के अनुसार, विषरोधी दवा की एक खुराक की कीमत 14,000 डॉलर तक हो सकती है.
1 ग्राम सोने की कीमत, फिलहाल 166-167 डॉलर/ग्राम के भाव चल रही है. यानी 13,000 डॉलर में करीब 78-79 ग्राम सोना आ जाएगा. ये 24 कैरेट सोने का रेट है. और यदि 22 या 18 कैरेट में गहने बनवाए जाएं तो ठीक-ठाक गहनों के दाम निकल जाएंगे.
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