भारतीय शेयर बाजार में इस समय राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) और इसके प्रमोटर राजेश मेहता (Rajesh Mehta) का नाम हर किसी की जुबान पर है. SEBI ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए राजेश मेहता पर कंपनी के शेयरों में ट्रेडिंग करने से पूरी तरह रोक लगा दी है. सेबी की शुरुआती जांच में जो बात सामने आई है, वो ये हे कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी कुल कमाई का करीब 97 प्रतिशत से 99 प्रतिशत हिस्सा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है.
सेबी ने अपने 109 पन्नों के अंतरिम आदेश में इस गड़बड़ी को इतिहास की सबसे गंभीर वित्तीय अनियमितताओं में से एक बताया है. इस बड़े एक्शन के बाद कंपनी के शेयर धड़ाम हो गए हैं. आइए जानते हैं कि आखिर कौन हैं राजेश मेहता और कैसे उन्होंने फर्श से अर्श तक का सफर तय किया था.
कौन हैं राजेश मेहता?
बेंगलुरु के रहने वाले 60 वर्षीय राजेश जे मेहता, राजेश एक्सपोर्ट्स के फाउंडर और चेयरपर्सन हैं. उन्होंने साल 1989 में इस कंपनी की शुरुआत की थी और अपनी मेहनत की बदौलत इसे दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट कंपनियों में से एक बना दिया. राजेश मेहता ने बहुत कम उम्र में ही कीमती धातुओं के बिजनेस में कदम रख दिया था. उन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी और शुरुआत में चांदी का व्यापार करना शुरू किया था, जिसके बाद वह धीरे-धीरे सोने और जूलरी के बड़े बिजनेस में उतर गए.
सोने की दुनिया में कैसे कमाया बड़ा नाम?
राजेश एक्सपोर्ट्स का बिजनेस मॉडल बेहद मजबूत माना जाता था. यह कंपनी कच्चा सोना खरीदती है, उसे शुद्ध सोने में रिफाइन करती है, गहने बनाती है और फिर उन्हें बाजार में बेचती है. राजेश मेहता के करियर और कंपनी के इतिहास में सबसे बड़ा मोड़ साल 2015 में आया. इस साल राजेश एक्सपोर्ट्स ने स्विट्जरलैंड की मशहूर रिफाइनरी 'वैलकैम्बी' का अधिग्रहण कर लिया. वैलकैम्बी को दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग सुविधाओं में से एक माना जाता है और इस डील के बाद राजेश मेहता का नाम ग्लोबल मार्केट में चमक गया था.
सालाना कमाई और सेबी का गंभीर आरोप
आंकड़ों की बात करें तो राजेश एक्सपोर्ट्स का सालाना रेवेन्यू लगभग 39.2 बिलियन डॉलर (करीब 3.75 लाख करोड़ रुपये) है, जबकि कंपनी करीब 1,465 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज करती है. शेयर बाजार में इस कंपनी की वैल्यूएशन करीब 9,829 करोड़ रुपये है. लेकिन सेबी का कहना है कि कंपनी ने अपनी कुल बिक्री को पूरी तरह से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है. आदेश के मुताबिक, लगभग 97 प्रतिशत से 99 प्रतिशत रेवेन्यू का फर्जी होना एक ऐसा अचंभित करने वाला मामला है जो पहले कभी नहीं सुना गया.
राजेश मेहता पर सेबी के इस हंटर का सीधा असर लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी LIC पर भी पड़ा है. दरअसल, LIC के पास राजेश एक्सपोर्ट्स में 10.8 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी है. जैसे ही सेबी का यह आदेश बाहर आया, LIC के शेयरों में भी 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई.
बाजार के जानकारों का मानना है कि 15.15 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू में इस भारी गड़बड़ी के आरोपों से राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर की कीमत लंबे समय तक पिटी रहेगी, जिससे LIC द्वारा किए गए निवेश की वैल्यू को भारी नुकसान पहुंचेगा. आम निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे फिलहाल इस शेयर से पूरी तरह दूर रहें.
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