मध्य एशिया में जारी लड़ाई का सीधा असर भारत के चावल कारोबार पर पड़ रहा है. बीते दो दिनों से एक्सपोर्ट पूरी तरह ठप होने के कारण डिमांड में भारी कमी आई है. करनाल के चावल कारोबारी विनोद के अनुसार, भारतीय निर्यातकों का लगभग 1200 करोड़ रुपये का चावल या तो समुद्री रास्तों में फंसा है या फिर पोर्ट पर अटका हुआ है.
ईरान समेत खाड़ी देशों में बासमती सेला 1509, 1121, सुगंधा और शरबती जैसे चावलों की भारी मांग रहती है, लेकिन मौजूदा लड़ाई के चलते चावल के कंसाइनमेंट समुद्र या पोर्ट में फंस गए हैं.
बासमती के दामों में आई गिरावट
चावल निर्यात रुकने और नई मांग न होने की वजह से घरेलू बाजार में बासमती चावल के दामों में प्रति क्विंटल 1000 रुपये तक की कमी देखी जा रही है. खुदरा बाजार में भी इसके दाम करीब 10 रुपये प्रति किलो तक गिर गए हैं.
उत्तर भारत के प्रमुख एक्सपोर्टर अनिल कुमार गर्ग ने बताया कि खाड़ी देशों को जाने वाला करीब 4 लाख टन चावल हमेशा रास्ते में रहता है क्योंकि समुद्री मार्ग से पहुंचने में 15 दिन का समय लगता है. अब स्थिति यह है कि रूट बदले जा रहे हैं या माल पोर्ट पर ही रोक दिया गया है. साथ ही, शिपिंग कंपनियों ने अब वॉर चार्जेज भी लगाना शुरू कर दिया है.
ईरान को निर्यात और भारत की चिंता
आंकड़ों के मुताबिक, ईरान पर प्रतिबंधों के बावजूद भारत वहां 1.24 बिलियन डॉलर का सामान निर्यात करता है, जिसमें अकेले चावल का हिस्सा 740 मिलियन डॉलर है. भारत का सालाना चावल निर्यात ग्राफ लगातार बढ़ रहा है; जहां 2023-24 में यह 43 हजार करोड़ रुपये था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है.
भारत सबसे ज्यादा चावल का निर्यात सऊदी अरब को करता है. जानकारों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो निर्यात पर गहरा असर पड़ेगा. कारोबारियों ने सरकार से अपील की है कि शिपिंग कंपनियों से बात कर युद्ध के नाम पर वसूले जा रहे सरचार्ज को खत्म कराया जाए.
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