US-India Trade Deal Update: एक तरफ जहां अमेरिका और ईरान के बीच टेंशन का माहौल बरकरार है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका-भारत ट्रेड डील पूरा होने के करीब है. दिल्ली में एक कार्यक्रम के बाद केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-यूएस ट्रेड डील का पहला फेज यानी फर्स्ट ट्रेंच लगभग फाइनल हो चुका है. फर्स्ट ट्रेंच मतलब ट्रेड डील का वो पहला हिस्सा जिस पर भारत और अमेरिका दोनों राजी हो चुके हैं. पीयूष गोयल ने बताया कि कई बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है. हम हम उस फेज में जा रहे हैं, जिसके बाद ऑफिशियल ऐलान कर दिया जाएगा. पीयूष गोयल ने साफ कर दिया है कि डील का पहला हिस्सा लगभग तैयार है और औपचारिकताएं अंतिम फेज में हैं.
टैरिफ की कमी चमकाएगी भारतीय प्रोडक्ट्स को
इस डील की सबसे बड़ी हाइलाइट है टैरिफ में कमी. फरवरी के फ्रेमवर्क के अनुसार अभी जिन भारतीय सामानों पर बड़ी ड्यूटी लगती थी, उसे 50% से घटाकर सीधे 18% पर लाने का टारगेट है. इसका सीधा मतलब कि अमेरिका के बाजारों में मेड इन इंडिया प्रोडक्ट सस्ते होंगे और चीन के प्रोडक्ट्स को कड़ी टक्कर देंगे.

US-India Trade Deal Update
डील की खास बातें
- पहला फेज 90% पूरा. जल्दी आधिकारिक ऐलान होने की उम्मीद है.
- ड्यूटी कम होने से छोटे उद्योगों (MSMEs) को बंपर फायदा होगा.
- मेगा डील के जरिए एयरक्राफ्ट और एनर्जी सेक्टर में अमेरिका के साथ बड़े निवेश की तैयारी है.
पीयूष गोयल ने बताया कि भारत अब अमेरिका में सिर्फ एक व्यापारी की तरह नहीं, बल्कि पार्टनर की तरह एंट्री करेगा. इसके लिए खास मैकेनिज्म तैयार हो रहा है, जिसे प्रेफरेंशियल एक्सेस कहते हैं. इससे भारतीय कपड़ा, रत्न-आभूषण और इंजीनियरिंग गुड्स को अमेरिकी बाजार में प्राथमिकता मिलेगी.
500 बिलियन डॉलर की खरीदारी
भारत ने अगले 5 सालों में अमेरिका से $500 बिलियन मूल्य के विमान, ऊर्जा और उच्च तकनीक खरीदने का प्रस्ताव रखा है, जिससे दोनों देशों के बीच बिजनेस का बैलेंस बना रहे और चीन पर निर्भरता कम हो. बातचीत तेज होने की एक वजह ये भी है कि साल 2025‑26 में चीन, भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार बन गया है. उसने इस मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. इससे पहले लगातार चार साल तक अमेरिका बड़ा व्यापार साझेदार था.
पीयूष गोयल पहले भी कह चुके हैं कि भारत की कोशिश है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय सामानों को ज़्यादा रियायतें मिलें. उनका मानना है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर भारत की स्थिति कई दूसरे देशों से अच्छी है. हालांकि बातचीत में कुछ मुश्किलें हैं, लेकिन उनके भरोसेमंद बयान से साफ है कि भारत को अब भी उम्मीद है कि ये समझौता हो सकता है और वो भी ऐसी शर्तों पर जो भारत के लिए फायदेमंद हों.
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