अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इस समय चीन के दौरे पर हैं, लेकिन इस बार सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि बड़े बिजनेसमैन भी चर्चा में हैं. एलन मस्क, टिम कुक जैसे कई बड़े कंपनियों के CEO उनके साथ बीजिंग पहुंचे हैं. अब सवाल ये है कि ये सिर्फ औपचारिक यात्रा है, या फिर इसके पीछे बड़ा बिजनेस फायदा छिपा है. दरअसल, ऐसे दौरे में कंपनियां नई डील, निवेश और कारोबार बढ़ाने के मौके तलाशती हैं, जिससे अरबों डॉलर का फायदा हो सकता है. यानी ये दौरा राजनीति के साथ‑साथ बड़े व्यापारिक हितों से भी जुड़ा हुआ है.

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CEOs की मीटिंग में क्या बोले शी जिनपिंग?
शी जिनपिंग ने इस बैठक में साफ तौर पर कहा कि चीन अमेरिकी कंपनियों के साथ मिलकर काम करना चाहता है और दोनों को इससे फायदा हो सकता है. उनका कहना है कि चीन में अमेरिकी कंपनियों के लिए आगे और ज्यादा मौके बनेंगे.
ये बात ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर, ताइवान मुद्दा और टेक्नोलॉजी को लेकर तनाव चल रहा है. फिर भी शी जिनपिंग ने याद दिलाया कि पहले अमेरिकी कंपनियों ने चीन के विकास में बड़ा रोल निभाया है और इससे दोनों देशों को फायदा हुआ है.
ट्रंप की बिजनेस ब्रिगेड में कौन-कौन शामिल?
जब ट्रंप चीन के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने पहुंचे, तो उनके साथ अमेरिका के बड़े-बड़े कारोबारी भी मौजूद थे. इस प्रतिनिधिमंडल में टेस्ला और स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क, एप्पल के सीईओ टिम कुक, एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग, गोल्डमैन सैक्स के डेविड सोलोमन और ब्लैकरॉक के चेयरमैन लैरी फिंक शामिल थे.
इनके अलावा बोइंग की सीईओ केली ओर्टबर्ग भी इस टीम का हिस्सा थीं. साथ ही सिटीग्रुप, फाइजर, मास्टरकार्ड और वीजा जैसी बड़ी कंपनियों के बड़े अधिकारी भी इस बैठक में शामिल हुए, जिससे ये साफ होता है कि ये सिर्फ राजनीतिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि इसमें बड़े स्तर पर बिजनेस और निवेश से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई.
क्या है इन CEOs का निजी एजेंडा?
- एलन मस्क (Tesla)
एलन मस्क के लिए चीन बहुत बड़ा मार्केट और मैन्युफैक्चरिंग सेंटर है. उनकी शंघाई फैक्ट्री में सबसे ज्यादा गाड़ियां बनती हैं. इसलिए वे चाहते हैं चीन से सस्ते उपकरण लेकर ज्यादा प्रोडक्शन करें और अपनी सेल्फ-ड्राइविंग टेक्नोलॉजी (FSD) को वहां मंजूरी मिले.
- टिम कुक (Apple)
एप्पल के ज्यादातर iPhone अभी भी चीन में बनते हैं. भले ही भारत में कुछ प्रोडक्शन शुरू हुआ हो, लेकिन पूरी सप्लाई चेन अभी चीन पर ही टिकी है. मतलब: चीन से दूरी नहीं बना सकते, क्योंकि कंपनी उसी पर निर्भर है
- जेन्सेन हुआंग (Nvidia)
Nvidia की AI चिप्स की दुनिया में बहुत मांग है, खासकर चीन में. अमेरिका ने कुछ रोक लगाई हुई है, लेकिन Nvidia फिर भी चीन में अपना बिजनेस बनाए रखना चाहता है. मतलब कि चीन के बड़े AI मार्केट को खोना नहीं चाहते.
- बोइंग (Boeing)
बोइंग चीन को सैकड़ों विमान बेचना चाहता है. अगर चीन के साथ डील हो जाती है, तो कंपनी को बड़ा फायदा होगा.
ट्रंप का ये दौरा केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि पूरी तरह से व्यावसायिक है. जहां एक तरफ ट्रंप अपनी राजनीतिक विरासत बचाने की कोशिश में हैं, वहीं ये सीईओ अपनी कंपनियों के भविष्य को सुरक्षित करने में जुटे हैं. अगर ये शिखर सम्मेलन सफल रहता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा बदल सकती है.
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