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यूपी में रियल एस्टेट को मिलेगा बड़ा बूस्ट, 3052 करोड़ के 13 नए प्रोजेक्ट्स से बढ़ेगी निवेश की रफ्तार

यूपी रेरा (UP RERA) ने रियल एस्टेट सेक्टर को रफ्तार देने के लिए 3,052 करोड़ रुपये के 13 नए प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है. इस निवेश का बड़ा हिस्सा दिल्ली-एनसीआर के गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में लगेगा, जबकि लखनऊ, वाराणसी और आगरा में भी नए रेसिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स शुरू होंगे. इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर यूपी अब देश का सबसे बड़ा रियल्टी हब बनने की राह पर है.

यूपी में रियल एस्टेट को मिलेगा बड़ा बूस्ट, 3052 करोड़ के 13 नए प्रोजेक्ट्स से बढ़ेगी निवेश की रफ्तार
Uttar Pradesh Real Estate: यूपी रेरा ने सूबे में कई प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की है.
AI IMAGE

उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट बाजार के लिए बहुत अच्छी खबर है. यूपी रेरा (UP RERA) ने 13 नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है, जिन पर करीब 3,052 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इस बड़े निवेश से राज्य में कंस्ट्रक्शन का काम तो तेज होगा, साथ ही नए बिजनेस आएंगे और लोगों के लिए रोजगार के नए मौके पैदा होंगे. इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे खास बात ये है कि निवेश का एक बहुत बड़ा हिस्सा दिल्ली से सटे एनसीआर के दो बड़े शहर गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में लगाया जाएगा. एक्सपर्ट का कहना है कि इस फैसले से साफ है उत्तर प्रदेश अब देश के सबसे तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट बाजारों में से एक बन चुका है. राज्य में लगातार बनते नए एक्सप्रेसवे, बेहतर होती मेट्रो कनेक्टिविटी, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और टाउनशिप की वजह से अब घर खरीदने वालों का भरोसा यूपी पर बढ़ गया है.

टियर-2 शहरों पर भी रेरा का फोकस

यूपी रेरा (UP RERA) की बैठक में राज्य के कई शहरों के लिए नए रियल्टी प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई. इस बार सबसे ज्यादा फायदा गाजियाबाद को हुआ है, जहां करीब 1,936 करोड़ रुपये के चार बड़े प्रोजेक्ट्स, तीन कमर्शियल और एक रेजिडेंशियल पास हुए हैं, जिनसे 2,199 नए फ्लैट और दुकानें बनेंगी. वहीं, गौतमबुद्ध नगर में भी 420.50 करोड़ रुपये का एक बड़ा कमर्शियल प्रोजेक्ट मंजूर हुआ है, जिसमें 855 दुकानें या ऑफिस स्पेस तैयार होंगे. सबसे खास बात ये है कि इस बार प्रोजेक्ट्स सिर्फ नोएडा और गाजियाबाद में नहीं हो रहे. आगरा, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, मथुरा और बाराबंकी जैसे टियर-2 शहरों में भी नए प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी मिली है. इससे साफ है कि अब उत्तर प्रदेश के छोटे शहरों में भी कॉलोनियां और बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स तेजी से बन रहे हैं.

कहां कितने प्रोजेक्ट्स हो रहे शुरू?

  • आगरा में 246.94 करोड़ रुपये की लागत से 2 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है. इनके तहत 797 रेसिडेंशियल यूनिट्स का निर्माण किया जाएगा.
  • लखनऊ में 216.14 करोड़ रुपये की लागत वाली 2 रेसिडेंशियल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इन परियोजनाओं में 364 रेसिडेंशियल यूनिट्स विकसित होंगी.
  • मथुरा में 10.28 करोड़ रुपये की लागत से एक कमर्शियल परियोजना को मंजूरी मिली है, जिसमें 81 यूनिट्स का विकास किया जाएगा.
  • वाराणसी में 41.12 करोड़ रुपये की लागत वाली एक रेसिडेंशियल परियोजना के तहत 131 रेसिडेंशियल यूनिट्स का निर्माण होगा.
  • प्रयागराज में 102.69 करोड़ रुपये की लागत से एक रेसिडेंशियल परियोजना को स्वीकृति मिली है, जिसके तहत 241 रेसिडेंशियल यूनिट्स विकसित की जाएंगी.
  • बाराबंकी में 78.34 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली एक रेसिडेंशियल परियोजना को मंजूरी दी गई है. इस परियोजना में 104 रेसिडेंशियल यूनिट्स का विकास किया जाएगा.

रियल एस्टेट सेक्टर को कैसे मिलेगा फायदा

एक्सपर्ट के अनुसार नई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलने से बाजार को सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि लोगों के लिए घरों और दुकानों के नए विकल्प खुल जाएंगे. पिछले कुछ सालों में एनसीआर और यूपी के शहरों में सड़कें अच्छी हुई हैं, जिसकी वजह से वहां रहने और काम करने की जगह की डिमांड में इजाफा हुआ है. इसके साथ रेरा (RERA) अब अपने सभी प्रोजेक्ट्स को समय के अंदर पूरा कर रहा है, जिससे बिल्डरों और घर खरीदने वालों दोनों का भरोसा बढ़ा है. सबसे बड़ी बात इन प्रोजेक्ट्स के बनने और शुरू होने से हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए मौके पैदा होंगे.

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डेवलपर्स क्या कहते है आइये जानते हैं

काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर अमित मोदी का कहना है कि, 'पिछले कुछ सालों में उत्तर प्रदेश, खासकर दिल्ली-एनसीआर के शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम तेजी से हुआ है. नए एक्सप्रेसवे, मेट्रो नेटवर्क और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनने से कनेक्टिविटी बेहतर हुई है. इसी वजह से ये शहर अब सिर्फ रहने के काम नहीं आ रहे, बल्कि इन्वेस्टमेंट के बड़े हब बन चुके हैं. साथ ही, यूपी रेरा (UP RERA) के इन नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलना इस बात का सबूत है कि बाजार में घरों और जमीनों की डिमांड लगातार बनी हुई है.'

सीआरसी ग्रुप के मार्केटिंग डायरेक्टर सलिल कुमार का मानना है कि 'रेरा' (RERA) कानून आने से रियल एस्टेट सेक्टर में काफी पॉजिटिव बदलाव आया है. अब इस सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ी है, जिससे घर खरीदने वालों के मन से धोखाधड़ी का डर खत्म हुआ है और उनका भरोसा मजबूत हुआ है. पहले जहां लोग प्रोजेक्ट के समय पर पूरा होने और नियमों को लेकर हमेशा शिकायत करते थे, वहीं अब सरकार ने इनकी स्थिति बेहतर की है.'

निंबस ग्रुप के सीईओ साहिल अग्रवाल का कहना है कि, 'दिल्ली-एनसीआर में घर खरीदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बहुत अच्छी बात है. इसे देखते हुए अब बिल्डर्स भी ऐसे प्रोजेक्ट्स बनाने पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं, जहां आने-जाने के लिए बढ़िया कनेक्टिविटी हो और आने वाले समय में प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ने से अच्छा मुनाफा हो. यूपी रेरा (UP RERA) के नए प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी मिलने से बाजार में नए घरों के ऑप्शन बढ़ेंगे, जिससे इस पूरे सेक्टर में कमाल की ग्रोथ देखनो को मिलेगी. इसके अलावा, जब नए प्रोजेक्ट्स आते हैं, तो इससे ना सिर्फ लोगों को रोजगार मिलेगा, बल्कि सीमेंट, स्टील से जुड़े दूसरे उद्योगों को भी बड़ा फायदा होगा.'

सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का का मानना है कि, 'उत्तर प्रदेश का रियल एस्टेट बाजार अब बदल रहा है. अब लोग यहां सिर्फ सस्ते मकान ही नहीं ढूंढ रहे, बल्कि प्रीमियम और इंटीग्रेटेड सोसायटियों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. क्योंकि सरकार लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बना रही है. साथ ही, रेरा की वजह से इस सेक्टर में और भरोसा बढ़ा है. हरविंदर सिंह सिक्का ने आगे बताया कि नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलने से राज्य में निवेश तो बढ़ेगा ही, साथ ही शहरों का विकास भी होगा. इन सभी बदलावों के चलते, आने वाले समय में उत्तर प्रदेश पूरे देश में रियल एस्टेट का सबसे बड़ा हब बनकर उभर सकता है.'

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