देश में जब किसी बड़े स्टार्टअप या टेक कंपनी की बात होती थी, तो सबसे पहले बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर या मुंबई का नाम दिमाग में आता है. लेकिन पिछले कुछ सालों में भारत का बिजनेस लैंडस्केप बदल गया है. अब देश की तरक्की की नई कहानी मेट्रो शहरों में नहीं, बल्कि भारत के छोटे शहरों यानी टियर-2 और टियर-3 में लिखी जा रही है. डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड के आंकड़ों के अनुसार, भारत में अभी तक रजिस्टर्ड टोटल स्टार्टअप्स में से करीब 50% से ज्यादा स्टार्टअप्स अब छोटे शहरों और कस्बों से आ रहे हैं. इंदौर से लेकर जयपुर और कोच्चि तक, हर जगह स्मॉल टाउन, बिग आइडियाज का डंका है.
रिवर्स माइग्रेशन से बदला माहौल
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह रिवर्स माइग्रेशन है. एक समय था जब छोटे शहरों के होनहार आईआईटी और आईआईएम ग्रेजुएट्स नौकरी या बिजनेस के लिए दिल्ली-बेंगलुरु भागते थे. लेकिन डिजिटल कनेक्टिविटी और वर्क-फ्रॉम-होम क पॉलिसी ने इस ट्रेंड को पलट दिया है. अब युवा अपने होमटाउन में रहकर ही ग्लोबल लेवल की कंपनियां खड़ी कर रहे हैं.
छोटे शहरों में स्टार्टअप शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा लोअर ऑपरेशनल कॉस्ट है. मेट्रो शहरों के मुकाबले यहां ऑफिस का किराया और दूसरे खर्च 35 से 40 फीसदी तक कम होते हैं. इसके अलावा, छोटे शहरों में कर्मचारी एट्रिशन रेट यानी नौकरी बदलने का समय, बहुत कम है. जहां बेंगलुरु में कंपनियां कर्मचारियों के बार-बार नौकरी बदलने से परेशान रहती हैं, वहीं इंदौर या चंडीगढ़ जैसे शहरों में स्टेबिलिटी है.
कौन सा शहर किस सेक्टर का बना किंग?
देश में अब कई ऐसे छोटे शहर सामने आ चुके हैं, जो खास सेक्टर्स के ग्लोबल हब बन रहे हैं. इंदौर से लेकर जयपुर, कोच्चि इसमें शामिल है.
- इंदौर
एमपी का सबसे साफ शहर इंदौर अब भारत का सबसे बड़ा आईटी और लॉजिस्टिक्स हब बन चुका है. यहां हर साल 20 हजार से ज्यादा साइंस, टेक, इंजीनियरिंग, मैथ्स ग्रेजुएट्स निकलते हैं, जो नए स्टार्टअप्स को टैलेंट पूल के मामले में मदद करते हैं.
- जयपुर
राजस्थान का जयपुर अब केवल टूरिस्ट के लिए नहीं, बल्कि डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर ब्रांड्स और फिनटेक कंपनियों के लिए जानी जाता है. लोकल मैन्युफैक्चरिंग और दमदार ट्रेडिशनल बिजनेस नेटवर्क ने इसे बड़ा बूस्ट दिया है.
- कोच्चि
केरल स्टार्टअप मिशन के जरिए कोच्चि देश में हार्डवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप्स का गढ़ बन रहा है.
- चंडीगढ़-मोहाली
पंजाब और हरियाणा के बॉर्डर पर बसा ये शहर एग्रीटेक और सॉफ्टवेयर सर्विसेज में नए रिकॉर्ड लगातार बना रहा है.
फंडिंग की बात अब बड़े शहरों से बाहर
कभी माना जाता था कि बड़े वेंचर कैपिटलिस्ट और इन्वेस्टर्स छोटे शहरों के स्टार्टअप्स पर पैसा लगाने से कतराते हैं, लेकिन प्राइमस पार्टनर्स और फिनटेक इंडस्ट्री की रिपोर्ट्स ने इस मिथक को तोड़ा है. आज निवेशक सीधे इंदौर, नागपुर या कोयंबटूर के फाउंडर्स से मिल रहे हैं. सरकार की स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना और राज्यों की अपनी स्टार्टअप नीतियों ने इन शहरों को पहले निवेश की समस्या से फ्री कर दिया है.
चुनौतियां भी रास्ते में मौजूद
सिक्के के हमेशा दो पहलू होते हैं. छोटे शहर स्टार्ट हब की राह पर तेजी से बढ़ रहे हैं पर अभी भी कुछ चुनौतियां इनके सफर में है. सबसे बड़ी चुनौती स्केलेबिलिटी की कमी को लेकर है. शुरुआती लेवल पर तो फंडिंग मिल जाती है, लेकिन जब कंपनी को हजार करोड़ की लीग में शामिल होना होता है, तब उन्हें बड़े नेटवर्क और इंटरनेशनल लेवल के इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है.
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