Gold-Silver Prices Crash: पिछले कुछ दिनों से रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छू रहे सोने और चांदी के भाव ताश के पत्तों की तरह ढह रहे हैं. हाई लेवल पर की गई भारी मुनाफावसूली और वैश्विक उथल-पुथल ने घरेलू बाजार में 'लोअर सर्किट' की नौबत ला दी है. चांदी में इस समय ज्यादा अफरा-तफरी है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर रविवार को चांदी 9% लुढ़क कर 2.65 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई. पिछले सिर्फ दो दिनों में चांदी की कीमतें 1,34,241 रुपये तक टूटी हैं. 23 जनवरी को जो चांदी 3.34 लाख रुपये पर थी, वह अब अपने उस लेवल से करीब 37% नीचे ट्रेड कर रही है.
क्यों आई बाजार में गिरावट?
एक्सपर्ट के अनुसार अमेरिकी फेड चेयरमैन जेरोम पावेल ने संकेत दिए हैं कि ब्याज दरों में कटौती जल्द होने की उम्मीद नहीं है. इससे डॉलर मजबूत हुआ और सोने-चांदी पर दबाव बढ़ा. इसके अलावा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वार्श को अगला फेड चेयरमैन बनाने की बात कही. साथ ही शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) में सोना 11.39% और चांदी 31.37% तक टूटे थे, जिसका असर रविवार को भारतीय बाजारों पर दिखा.
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रणव मेर के अनुसार, 'कीमतें जिस तेजी से बढ़ी थीं, उतनी ही तेजी से टूट रही हैं. अगले कुछ दिनों में अभी और तकनीकी सुधार देखा जा सकता है, जिसके बाद कीमतें स्थिर होने की उम्मीद है.' बाजार में आई इस गिरावट ने नए खरीदारों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं, लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए एक्सपर्ट्स सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं.
एक्सपर्ट्स ने पहले भी चेताया था
व्हाइट ओक कैपिटल म्यूचुअल फंड (White Oak Capital MF) की एक रिपोर्ट ने निवेशकों को अलर्ट किया है. रिपोर्ट के अनुसार चांदी अपनी लिमिट से ज्यादा महंगी हो चुकी है और अब इसमें कभी भी बड़ा विस्फोट हो सकता है. रिपोर्ट में गोल्ड-सिल्वर रेश्यो के गिरने की बात कही गई है. बताया गया है कि आमतौर पर यह रेश्यो 80:1 होता है, लेकिन अब यह गिरकर 46:1 पर आ गया है. इतिहास से पता चलता है कि जब भी चांदी सोने के मुकाबले इतनी महंगी हुई है, उसके बाद उसमें बहुत बड़ी गिरावट आई है.
...तो फिर आपको कोई नहीं बचाएगा!
रिपोर्ट में साल 2011 में आई चांदी की गिरावट का भी जिक्र है. इसमें बताया है कि चांदी के टॉप बनाने के बाद उसे रिकवर होने में 9 साल लगे थे. वहीं 2012 के बाद सोने को वापसी करने में 7 साल का समय लगा. क्या आप इतना लंबा इंतजार करने के लिए तैयार हैं? रिपोर्ट आगे कहती है कि अगर ग्लोबल मार्केट में गिरावट आती है, तो गिरता हुआ रुपया भी आपके निवेश को डूबने से नहीं बचा पाएगा.
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