मिडिल ईस्ट में जारी टेंशन के बीच दुनियाभर के शेयर मार्केट में उठा-पटक का दौर देखा जा रहा है. भारत देश भी इस समस्या से अछूता नहीं रहा. बीते हफ्ते में जहां बाजार में गिरावट आई, वहीं आने वाला हफ्ते में भी उतार-चढ़ाव का माहौल बने रहने की संभावना है. निवेशकों की नजर इस समय अमेरिका-ईरान, आरबीआई की पॉलिसी और विदेशी निवेशकों की निकासी पर बनी हुई है. ये बाजार के लिए अहम फैक्टर्स साबित हो सकते हैं. मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि पिछले हफ्ते में बाजार नीचे रहा, अब सोमवार को जब मार्केट खुलेंगे तो ये फैक्टर्स बाजार की दिशा तय करने में अहम रोल निभा सकते हैं.
कैसा रहा मार्केट का आखिरी कारोबारी दिन
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन में निवेशक अलर्ट मोड में नजर आए. हल्की गिरावट के साथ बाजाक बंद हुए थे. सेंसेक्स 117 अंक गिरकर 74,243 तो वहीं निफ्टी 50 अंक लुढ़कर 23,367 पर बंद हुआ.
अमेरिका-ईरान टेंशन ने गर्म किया माहौल
मार्केट एक्सपर्ट ने बताया है कि इस समय अमेरिका-ईरान का मामला बाजार पर सीधा असर डाल रहा है. मिडिल ईस्ट में लगातार हालात बिगड़ते जा रहे हैं. रविवार को अमेरिका सेना ने दावा किया कि उसने दो ईरानी हमलावर ड्रोनों को मार गिराया है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में यातायात को खतरा था. इस पूरे मामले की जानकारी अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बयान जारी कर दी. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ये ड्रोन इलाके में निकल रहे जहाजों पर हमला करने वाले थे. इन सभी बातों से एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने पर संशय खड़ा हो गया है. ये मामला भारतीय शेयर मार्केट पर सीधे तौर पर असर डालेगा.
आरबीआई के एक्शन का दिखेगा रिएक्शन
अमेरिका-ईरान के बाद कुछ घरेलू फैक्टर्स भी मार्केट पर असर डाल सकते हैं. जैसे आरबीआई ने मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है. मिडिल ईस्ट टेंशन की वजह से बढ़ती एनर्जी कॉस्ट के साथ सप्लाई चेन में आई रुकावट ने रिजर्व बैंक को महंगाई की तरफ देखने को मजबूर किया है. हालांकि आरबीआई ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए कई बड़े ऐलान किए. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इक्विटी इंस्टूमेंट्स में नॉन रेसिडेंट भारतीयों और भारत के विदेशी नागरिकों के लिए निवेश की लिमिट बढ़ाने का ऐलान किया. इस फैसले का असर बाजार पर पॉजिटिव रूप में हो सकता है.
विदेशी निवेशकों की दिशा पर सभी की नजरें
भारतीय शेयर मार्केट से विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं. ये निकासी मिडिल ईस्ट टेंशन से पहले शुरू हुई थी. हालांकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और डॉलर के मजबूत होने के बाद इसकी पेस और तेज हो गई. मई 2026 की बात करें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 32,963 करोड़ रुपये मार्केट से निकाल लिए. इसके अलावा जून के पहले हफ्ते में भी यही सिलसिला लगातार जारी रहा, जिसमें विदेशी निवेशकों ने 42,926 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए. साल 2026 के आंकड़ें देखें तो विदेशी निवेशक भारतीय मार्केट से टोटल 2,83,662 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं.
अमेरिका की महंगाई का असर भारतीय मार्केट पर
अमेरिका में महंगाई की आशंका ने ट्रेजरी की यील्ड यानी रिटर्न तेजी से बढ़ा है. दो साल की यील्ड करीब 15 महीने के हाई लेवल पर जा पहुंची है. सिंपल सी बात है कि जब बॉन्ड अच्छा रिटर्न दे रहा हो तो निवेशक शेयर मार्केट से पैसा निकाल कर सरकारी बॉन्ड में लगाना शुरू कर देते हैं, जिससे शेयर मार्केट पर प्रेशर बनता है.
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