शेयर बाजार में आज गुरुवार, 8 अक्टूबर को बड़ी गिरावट देखी जा रही है. दोपहर करीब 1:40 बजे सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों इंडेक्स में डेढ़ फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई. BSE सेंसेक्स करीब 1,100 अंक से ज्यादा टूट गया और 71,500 के लेवल से भी नीचे आ गया. वहीं दूसरी ओर NSE निफ्टी 50 में भी बड़ी गिरावट देखी गई. ये 1.68 फीसदी या 380 अंक 22,222 के नीचे आ गया.
आज कुछ घंटों के भीतर निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए. आज गुरुवार को जब बाजार खुले थे, BSE सेंसेक्स पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4,70,98,931 करोड़ यानी 4.71 लाख करोड़ रुपये था, जो गुरुवार दोपहर 4,61,95,228 करोड़ यानी 4.61 लाख करोड़ रह गया. यानी इसमें करीब 10 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई.
किन वजहों से टूटा बाजार?
बाजार में इस गिरावट के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बड़ी वजह बताई जा रही है. बताया जा रहा है कि निवेशक RBI की ताजा मॉनिटरी पॉलिसी के असर का आकलन कर रहे हैं, जबकि वैश्विक संकेत और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है. बांड यील्ड में लगातार वृद्धि के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे सत्र में दबाव में नजर आया.

मार्केट एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?
विश्लेषकों का कहना है कि RBI के अपनाए गए 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' रुख और रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद इक्विटी बाजार के वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ सकता है. ऊंची ब्याज दरों के कारण फिक्स्ड इनकम निवेश अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक बन सकते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में निवेशकों का झुकाव फार्मास्यूटिकल्स जैसे उन क्षेत्रों की ओर बढ़ सकता है, जिन पर ब्याज दरों का प्रभाव अपेक्षाकृत कम होता है. ऊंचे वैल्यूएशन के बावजूद ग्रोथ स्टॉक्स में निवेशकों की रुचि बनी हुई है, जबकि वैल्यू स्टॉक्स का प्रदर्शन अभी अपेक्षाकृत कमजोर रहा है.
बाजार जानकारों का कहना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5.3 प्रतिशत से ऊपर बने रहना बड़े शेयरों पर दबाव बनाए रख सकता है.
बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से 6,121 करोड़ रुपए से अधिक की निकासी की. हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने लगभग 4,596 करोड़ रुपए की खरीदारी कर बाजार को कुछ समर्थन दिया.
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, बाजार फिलहाल एक समेकन (कंसोलिडेशन) के दौर में प्रवेश कर सकता है. निफ्टी के लिए 22,439 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जबकि ऊपर की ओर 23,100 का लक्ष्य अभी भी व्यापक दृष्टिकोण में बरकरार है.
वैश्विक स्तर पर भी निवेशकों की धारणा सतर्क बनी हुई है. ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों ने बाजारों को प्रभावित किया है. एशियाई बाजारों में भी गुरुवार को मिश्रित रुख देखने को मिला.
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