- आरबीआई ने मॉनेटरी पॉलिसी में महंगाई मापने के ढांचे में सोने और चांदी को भी शामिल करने का फैसला लिया है
- सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से इन्हें महंगाई के प्रमुख कारकों में माना जाएगा
- रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है, जिससे लोन की ईएमआई में कोई वृद्धि नहीं होगी
RBI Policy: आरबीआई ने आज मॉनेटरी पॉलिसी के आंकड़े सभी के सामने रखे. साथ ही इस बैठक में एक ऐसा फैसला लिया, जिसने बाजार के दिग्गजों का ध्यान अपनी तरफ खींचा. अब तक हम महंगाई की बात करते समय सिर्फ खाने-पीने की चीजों जैसे आलू, प्याज और टमाटर का जिक्र सुनते थे, लेकिन अब आरबीआई की महंगाई वाली लिस्ट में सोने और चांदी की भी एंट्री हो गई है.
क्या है पूरा मामला?
शुक्रवार को हुई RBI की बैठक में रेपो रेट को स्थिर रखने के साथ-साथ महंगाई मापने के ढांचे में बड़ा बदलाव किया गया है. अब से इनफ्लेशन मॉनिटरी फ्रेमवर्क में सोने और चांदी की कीमतों को भी शामिल किया जाएगा. इसका मतलब कि आरबीआई अब कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतों को भी महंगाई के एक बड़े फैक्टर के रूप में मॉनिटर करेगा.
सोना-चांदी और सब्जियां एक ही लाइन में?
RBI ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि पिछले कुछ समय में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. एक्सपर्ट के अनुसार ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव और घरेलू मांग की वजह से इनका असर पूरी इकोनॉमी पर पड़ता है. अब सोने-चांदी को प्याज-टमाटर वाली कैटिगरी में रखने से आरबीआई को महंगाई का सटीक और पूरी जानकारी मिल सकेगी.
क्या आपके लिए सोना सस्ता होगा?
आरबीआई के इस फैसले का सीधा असर कीमतों के घटने या बढ़ने पर फौरन तो नहीं पड़ेगा, लेकिन इससे सरकार और आरबीआई को नीतियां बनाने में आसानी होगी. दिसंबर के आंकड़े बताते हैं कि अगर सोने-चांदी को हटा दें, तो महंगाई दर सिर्फ 2.6% पर स्थिर है. यानी सोना-चांदी ही महंगाई का ग्राफ बढ़ा रहे हैं.
आज के भाव पर एक नजर
बाजार में मची हलचल के बीच एमसीएक्स पर सोने का भाव 1.53 लाख रुपये (प्रति 10 ग्राम) के आसपास पहुंच गया है, वहीं चांदी में गिरावट देखी गई और यह 2.40 लाख रुपये प्रति किलो के करीब कारोबार कर रही है.
मॉनेटरी पॉलिसी के बड़े फैसले
केंद्रीय बैंक RBI ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा है. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी ने इकोनॉमिक आंकड़ों को देखते हुए रेपो रेट में बदलाव नहीं किया गया है. साफ है कि रेपो रेट से लिंक्ड आपके होम लोन, कार लोन या अन्य लोन की EMI नहीं बढ़ेगी. यानी आपको इन लोन्स के लिए ज्यादा किस्त नहीं भरनी होगी.
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