Loan Recovery New Rules: अगर आपने किसी बैंक से पर्सनल लोन, कार लोन या होम लोन लिया है और किसी वजह से उसकी ईएमआई (EMI) चुकाने में देरी हो रही है, तो अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. आपके लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की तरफ से एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर आई है. अक्सर देखा जाता है कि लोन रिकवरी के लिए बैंक और उनके रिकवरी एजेंट ग्राहकों को तरह-तरह से परेशान करते हैं, लेकिन अब आरबीआई ने बैंकों की मनमानी पर पूरी तरह से नकेल कसने की तैयारी कर ली है.
केंद्रीय बैंक ने एक ऐसा नया और बेहद सख्त प्रस्ताव पेश किया है, जिसके बाद बैंक चाहकर भी आपकी एक बेहद जरूरी चीज को हाथ नहीं लगा पाएंगे. आइए जानते हैं क्या है RBI का यह नया मास्टरस्ट्रोक...
लोन रिकवरी के लिए अब मोबाइल ब्लॉक करने पर पूरी रोक
RBI ने प्रस्ताव दिया है कि बैंक अब पर्सनल लोन, कार लोन या होम लोन की वसूली के लिए ग्राहकों के मोबाइल फोन, टैबलेट या अन्य डिवाइस की सुविधाओं को ब्लॉक या डिसेबल नहीं कर सकेंगे. इसके तहत आरबीआई (RBI) ने साफ कहा है कि बैंक रिकवरी टूल के रूप में किसी भी ऐसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं कर सकते जो ग्राहक के मोबाइल फोन या टैबलेट की फंक्शनलिटी को ब्लॉक या सीमित करती हो.यानी सिर्फ EMI डिफॉल्ट होने पर फोन लॉक करना या सर्विस रोकना संभव नहीं होगा.
कब बैंक फोन ब्लॉक कर सकेंगे? जानिए 90 दिनों के नियम और शर्तें
हालांकि, आरबीआई ने इस नियम में एक जायज छूट भी दी है. बैंक केवल उसी स्थिति में किसी मोबाइल डिवाइस को ब्लॉक या रिस्ट्रिक्ट कर सकता है, यदि उस मोबाइल फोन या टैबलेट को खरीदने के लिए खुद उसी बैंक ने लोन यानी फाइनेंस दिया हो.यानी अगर बैंक ने उसी डिवाइस की खरीद के लिए लोन दिया है, तभी ब्लॉकिंग का ऑप्शन इस्तेमाल किया जा सकता है.
फोन फाइनेंस होने के मामले में भी बैंकों के लिए बेहद सख्त नियम
- बैंक तब तक फोन ब्लॉक करने का मैकेनिज्म इस्तेमाल नहीं कर सकता, जब तक कि वह लोन 90 दिनों तक ओवरड्यू न हो गया हो.
- इसके साथ ही, बैंक को फोन ब्लॉक करने से पहले ग्राहक को बकायदा नोटिस देना होगा और डिफॉल्ट को सुधारने का पूरा मौका देना होगा.
- यह छूट केवल उसी स्थिति में होगी जब मोबाइल या टैबलेट खुद उसी बैंक के फाइनेंस (लोन) पर खरीदा गया हो. यानी अगर बैंक ने उसी डिवाइस की खरीद के लिए लोन दिया है, तभी तकनीकी ब्लॉकिंग का विकल्प इस्तेमाल किया जा सकता है.
90 दिन डिफॉल्ट और नोटिस जरूरी
फोन फाइनेंस वाले मामलों में भी बैंक तुरंत कार्रवाई नहीं कर पाएंगे. RBI के ड्राफ्ट के मुताबिक,लोन 90 दिन Past Due होना चाहिए.ग्राहक को पहले नोटिस दिया जाना जरूरी होगा.डिफॉल्ट ठीक न होने पर ही ब्लॉकिंग संभव होगी

फोन ब्लॉक होने पर भी चालू रहेंगी ये जरूरी सेवाएं
आरबीआई ने कर्जदारों के मानवाधिकारों और सुरक्षा का ध्यान रखते हुए कहा है कि अगर बैंक फाइनेंस किए गए फोन को ब्लॉक भी करता है, तो भी वह कुछ जरूरी सेवाओं को बंद नहीं कर सकता. ब्लॉक होने के बाद भी फोन में इंटरनेट एक्सेस, इनकमिंग कॉल्स, इमरजेंसी एसओएस (SOS) फीचर और सरकार या पब्लिक-सेफ्टी की तरफ से आने वाले जरूरी नोटिफिकेशन्स हमेशा चालू रहेंगे.यानी सुरक्षा और बेसिक कम्युनिकेशन सेवाएं जारी रहेंगी.
बैंकों पर लगेगा ₹250 प्रति घंटा जुर्माना,जानिए रिकवरी के नए नियम
आरबीआई ने ग्राहकों की परेशानी को देखते हुए बैंकों पर जुर्माने का भी प्रावधान किया है.RBI ने कड़ा प्रावधान रखा है कि अगर ग्राहक डिफॉल्ट चुका देता है यानी किस्त भर देता है तो बैंक को 1 घंटे के भीतर मोबाइल पर लगी सभी पाबंदियों को हटाना होगा.यदि बैंक गलत तरीके से किसी का फोन ब्लॉक रखता है या डिफॉल्ट सुधरने के बाद उसे चालू करने में देरी करता है, तो बैंक को ग्राहक को ₹250 प्रति घंटे के हिसाब से मुआवजा देना होगा.
रिकवरी एजेंट्स पर भी सख्त नजर,कॉल रिकॉर्डिंग होगी अनिवार्य
अक्सर शिकायतें आती हैं कि रिकवरी एजेंटों द्वारा ग्राहकों को सोशल मीडिया पर बदनाम किया जाता है और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जाता है. RBI ने रिकवरी एजेंट्स और बैंक कर्मचारियों के व्यवहार पर भी कड़े नियम सुझाए हैं.
- बैंकों और उनके रिकवरी एजेंटों को कर्जदार या गारंटर को किए गए सभी कॉल्स का समय और उनकी संख्या का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा.
- एजेंट और ग्राहक के बीच होने वाली पूरी बातचीत (कॉल का कंटेंट/टेक्स्ट) को रिकॉर्ड करना अनिवार्य होगा.
- ग्राहक या गारंटर के कॉल्स भी ट्रैक करने होंगे
ड्राफ्ट में साफ कहा गया है कि रिकवरी के दौरान कोई भी बैंक कर्मचारी या रिकवरी एजेंट डराने-धमकाने वाली भाषा या गाली-गलौज का इस्तेमाल नहीं कर सकता, सोशल मीडिया पर ग्राहक की फोटो-ऑडियो या पर्सनल डिटेल पोस्ट नहीं कर सकता, और न ही बेहिसाब कॉल्स या मैसेजेस करके परेशान कर सकता है.
कब से लागू हो सकते हैं नियम? 31 मई तक मांगे सुझाव
RBI ने इन संशोधित नियमों को 1 अक्टूबर 2026 से लागू करने का प्रस्ताव रखा है. इससे पहले केंद्रीय बैंक ने फरवरी में इस पर ड्राफ्ट जारी किया था, जिस पर मिले फीडबैक के बाद अब यह संशोधित प्रस्ताव (Revised Proposal) लाया गया है. सभी संबंधित पक्ष इस रिवाइज्ड ड्राफ्ट पर 31 मई 2026 तक अपने कमेंट्स और सुझाव आरबीआई को सौंप सकते हैं. यह नियम कमर्शियल बैंकों के अलावा स्मॉल फाइनेंस बैंक, रीजनल रूरल बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक और एनबीएफसी (NBFCs) पर भी लागू होंगे.
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