- इजरायल और अमेरिका के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई है
- मिडिल ईस्ट संकट लंबे समय तक जारी रहने पर भारत के रुपये पर दबाव पड़ने की संभावना जताई गई है
- होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग अस्सी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं
मिडिल ईस्ट में भयंकर तनाव चल रहा है. इजरायल और अमेरिका मिलकर ईरान पर हमले कर रहे हैं. इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई है. वहीं, ईरान भी बदले की आग में इजरायल और खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर बमबारी कर रहा है. 28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग को हफ्ताभर गुजर चुका है और अभी हालात सामान्य होने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है. इस बीच वित्त मंत्रालय की मंथली रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर मिडिल ईस्ट का संकट लंबा चलता है तो इससे भारत के रुपये पर दबाव पड़ सकता है.
अपनी मंथली इकनॉमिक रिव्यू में वित्त मंत्रालय ने कहा कि लंबे समय तक संकट चलता है तो इससे ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे भारत के एक्सटर्नल बैलेंस पर असर पड़ सकता है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है. इसका मतलब हुआ कि अगर संकट जारी रहा तो डॉलर की तुलना में रुपया और कमजोर हो सकता है.
वित्त मंत्रालय की यह चेतावनी मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच आई है. इन हमलों के कारण होर्मुज स्ट्रेट के जरिए जहाजों का आना-जाना बंद हो गया है. होर्मुज स्ट्रेट एनर्जी ट्रेड के लिए एक अहम रास्ता है. दुनियाभर में कच्चे तेल की 20% सप्लाई यहीं से होती है. इस कारण पहले ही बेंट क्रूड की कीमतें लगभग 9% बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है, जबकि LNG की कीमतें 50% तक बढ़ गई हैं.
अनिश्चितता के बावजूद भारतीय इकॉनमी मजबूत
वित्त मंत्रालय ने कहा कि अगर कीमतें बढ़ती रहीं तो फर्टिलाइजर और पेट्रोकेमिकल्स जैसे इंपोर्टेड एनर्जी महंगे हो सकते हैं. हालांकि, वित्त मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के असर को मैनेज करने के लिए अच्छी स्थिति में है. मंत्रालय ने कहा कि भारत के पास कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के असर को कम करने के लिए काफी विदेशी मुद्रा भंडार, कम करंट अकाउंट डेफिसिट और कम महंगाई है.
2026-27 की पहली छमाही में देश का करंट अकाउंट डेफिसिट जीडीपी का 0.8 फीसदी रहने की उम्मीद है, जो वैश्विक कारोबार में अनिश्चितता के बावजूद एक्सटर्नल बैलेंस को काफी स्थिर दिखाता है. मंत्रालय ने कहा कि वैश्विक कारोबार में उतार-चढ़ाव के बावजूद एक्सटर्नल सेक्टर स्थिर बना हुआ है.
ट्रेड डिप्लोमेसी से मजबूत स्थिति में भारत
यूरोपियन यूनियन, अमेरिका और ओमान जैसे खास पार्टनर्स के साथ भारत की चल रही ट्रेड डिप्लोमेसी से समय के साथ देश का एक्सटर्नल सेक्टर और मजबूत होने की उम्मीद है. मंत्रालय ने कहा कि भारतीय इकॉनमी लगातार मजबूत हो रही है.
2026-27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है. लेबर मार्केट की हालत में भी सुधार दिख रहा है, और हाल के महीनों में रोजगार के ट्रेंड मजबूत हुए हैं.
वित्त मंत्रालय ने कहा कि बजट में कई घोषणाएं की गई हैं, जिनका मकसद मैनुफैक्चरिंग, एग्रीकल्चर, MSME, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और ह्यूमन कैपिटल फॉर्मेशन को सपोर्ट करना है. इन उपायों से ग्रोथ की रफ्तार बनी रहने की उम्मीद है.
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