Rajasthan Pachpadra Refinery: आज का दिन भारत के इतिहास में, खास तौर पर एनर्जी सेक्टर में, सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है. एक ऐसे समय में जब पूरी दुनिया कच्चे तेल की अनिश्चित सप्लाय चेन और वैश्विक संकटों से जूझ रही है, भारत ने अपनी आत्मनिर्भरता की ओर एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 4 जुलाई, शनिवार को राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में देश की सबसे आधुनिक और पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया. मौके पर राजस्थान के राज्यपाल के साथ-साथ केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा भी मौजूद रहे.
संदेश साफ है कि भारत, ऊर्जा के क्षेत्र में और तेजी से आगे बढ़ रहा है. ये सिर्फ एक फैक्ट्री या रिफाइनरी का उद्घाटन नहीं है, बल्कि राजस्थान के रेतीले धोरों से उठती देश के चहुंमुखी विकास की एक ऐसी गूंज है, जो आने वाले दशकों में भारत की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करने का शंखनाद है.

आम आदमी के लिए इसका सीधा मतलब क्या है?
बहुत से लोग सोच सकते हैं कि रिफाइनरी से आम नागरिक का क्या लेना-देना? इसे बहुत ही सरल शब्दों में समझें. अब तक भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है और फिर उसे देश के अलग-अलग हिस्सों में साफ (रिफाइन) किया जाता है. पचपदरा की यह रिफाइनरी इतनी विशाल है कि यह हर दिन देश की लाखों कारों, बाइकों और ट्रकों की टंकी फुल करने जितना ईंधन अकेले तैयार कर सकती है. जब हमारे अपने देश में, आयातित तेल के साथ-साथ हमारी अपनी जमीन से निकलने वाले तेल को अत्याधुनिक तकनीक से साफ किया जाएगा, तो देश का पैसा बाहर जाने से बचेगा.
ये परियोजना हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार की साझी ताकत का नतीजा है. इसमें एचपीसीएल की 74 प्रतिशत और राजस्थान सरकार की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है. यह रिफाइनरी केवल तेल साफ नहीं करेगी, बल्कि बाड़मेर के बेसिन से निकलने वाले कच्चे तेल को सीधे इस्तेमाल के योग्य बनाएगी, जिससे परिवहन का खर्च बचेगा और देश में स्वच्छ ईंधन (BS-VI ग्रेड पेट्रोल-डीजल) की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित होगी.

10 प्वाइंट में समझें रिफाइनरी का महत्व | Mega Maths of Refinery at a Glance
इस विशाल कॉम्प्लेक्स को धरातल पर उतारने के लिए 79,450 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम पूंजी निवेश किया गया है. इस विशाल प्रोजेक्ट का महत्व और इसकी क्षमता को समझने के लिए जरा इन आंकड़ों पर एक नजर डालिए-
- सालाना तेल प्रोसेसिंग क्षमता: यह रिफाइनरी हर साल 9 मिलियन मीट्रिक टन (90 लाख टन) कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता रखती है.
- दैनिक क्षमता का गणित: पचपदरा में हर दिन करीब 1.8 लाख बैरल कच्चे तेल की सफाई की जाएगी, जो न्यूजीलैंड और वियतनाम जैसे देशों की कुल क्षमता से भी अधिक है.
- पेट्रोकेमिकल उत्पादन: तेल के साथ-साथ यहां हर साल 2.4 मिलियन मीट्रिक टन मूल्यवान पेट्रोकेमिकल उत्पादों का निर्माण होगा.
- वर्ल्ड क्लास नेल्सन इंडेक्स: इस रिफाइनरी का 'नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स' 17.0 है. यानी ये दुनिया की सबसे उन्नत रिफाइनरियों में से एक है.
- कमाल की क्षमता: भारत अपनी जरूरत के लिए अलग-अलग देशों से हल्का, भारी, गाढ़ा हर तरह का कच्चा तेल आयात करता है और ये रिफाइनरी सबको रिफाइन कर सकती है.
- पेट्रोकेमिकल यील्ड: इसका पेट्रोकेमिकल यील्ड 26% से अधिक है, जो वैश्विक स्तर पर इसे सबसे कुशल संयंत्रों की कतार में खड़ा करता है.
- भागीदारी का स्ट्रक्चर: इस मेगा प्रोजेक्ट में हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) की 74% और राजस्थान सरकार की 26% हिस्सेदारी शामिल है.
- स्वच्छ ईंधन का भरोसा: यह प्लांट पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पूरी तरह से BS-VI ग्रेड के पेट्रोल और डीजल का उत्पादन करेगा.
- आयात पर निर्भरता में कमी: यह प्लांट पूरी तरह चालू होने से भारत के सालाना तेल आयात बिल में अरबों रुपये की बचत होने का अनुमान है.
- रोजगार की बहार: परियोजना के निर्माण और संचालन चरण को मिलाकर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को आजीविका मिली है.

पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स होगा असली गेम चेंजर
आम तौर पर पुरानी रिफाइनरियों में केवल पेट्रोल, डीजल और केरोसिन ही बनता था. लेकिन पचपदरा की सबसे बड़ी खासियत इसकी पेट्रोकेमिकल यूनिट है. यह यूनिट प्लास्टिक, टेक्सटाइल, पेंट, फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयों) और कॉस्मेटिक्स उद्योगों के लिए जरूरी कच्चा माल तैयार करेगी. वर्तमान में भारत को इन पेट्रोकेमिकल उत्पादों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है.
सरकार के विजन के अनुसार, ये कॉम्प्लेक्स उत्तर-पश्चिम भारत के लिए एक बहुत बड़ा 'इंडस्ट्रियल इंजन' बनने जा रहा है. इस रिफाइनरी के आसपास एक विशाल पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक पार्क विकसित किया जा रहा है.
इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में यहाँ छोटे-छोटे हजारों नए कारखाने खुलेंगे. जब नए उद्योग लगेंगे, तो स्थानीय युवाओं को नौकरी के लिए गुजरात, महाराष्ट्र या दिल्ली भागने की जरूरत नहीं होगी; उनके अपने घर यानी बालोतरा, बाड़मेर और पूरे राजस्थान में ही रोजगार के शानदार अवसर उपलब्ध होंगे.

रेगिस्तान में चहुंमुखी विकास की नई इबारत
राजस्थान का यह इलाका कभी अपनी वीरानियत और पानी की किल्लत के लिए जाना जाता था. लेकिन आज यहां का नजारा पूरी तरह बदल चुका है. जहां दूर-दूर तक सिर्फ रेत के टीले दिखाई देते थे, वहां आज चमचमाती सड़कें, आधुनिक टाउनशिप और दुनिया की सबसे बेहतरीन तकनीक से लैस पाइपलाइनों का जाल बिछ चुका है.
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का दावा है कि भारत आने वाले वर्षों में तेल की मांग के मामले में दुनिया के सबसे बड़े देशों को पीछे छोड़ देगा. ऐसे समय में पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है. ये रेगिस्तान के सुनहरे भविष्य की शुरुआत है, जो पूरे भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का दम रखती है.
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