- पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं हुई है
- देशभर के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया
- पेट्रोलियम मंत्रालय-कच्चे तेल की कीमतें युद्ध के कारण फरवरी के मुकाबले लगभग 69 प्रतिशत बढ़ीं
4 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधान सभा चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर सोशल मीडिया पर अटकलें बढ़ती जा रही हैं. इस बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी अफवाहों पर विराम लगाते हुए ताजा स्पष्टीकरण जारी किया है. मंत्रालय ने साफ किया कि तेल और डीजल कंपनियों की खुदरा दुकानों पर कीमतों में कोई वृद्धि नहीं हुई है.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने सब साफ कर दिया
एक आधिकारिक रिलीज जारी कर पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया कि अफवाहों के चलते कुछ खुदरा दुकानों पर अफरा-तफरी मची हुई है और लोग बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल खरीद रहे हैं.देश के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है. पेट्रोल और डीजल की नियमित खुदरा कीमतों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और तेल और डीजल कंपनियों की खुदरा दुकानों पर कीमतों में कोई वृद्धि नहीं हुई है".
युद्ध के बीच भी कीमतें स्थिर
मध्यपूर्व एशिया में पिछले करीब दो महीने से जारी युद्ध, गतिरोध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिये ऑयल और गैस टैंकरों की आवाजाही बाधित होने की वजह से अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, नेचुरल गैस और एलपीजी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. लेकिन इसके बावजूद इंडियन ऑयल के मुताबिक:
-- पेट्रोल, डीजल की खुदरा कीमतें अपरिवर्तित बनी हुई हैं, जो देश में कुल पेट्रोल, डीजल की खपत का लगभग 90% है
-- 33 करोड़ घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए घरेलू एलपीजी (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में 07 मार्च के बाद कोई बदलाव नहीं है
-- घरेलू एयरलाइनों (scheduled operations) के लिए एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है
-- पीडीएस केरोसिन की कीमतों में भी बढ़ोतरी नहीं की गई है
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तेल और गैस के आयात पर खर्च बढ़ा
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कार्गो जहाजों की आवाजाही बाधित होने से अंतराष्ट्रीय एनर्जी मार्किट में करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो रही है, जिसकी वजह से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत काफी बढ़ गई है.भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल, 60% एलपीजी और करीब 50% नेचुरल गैस का आयात करता है. ऐसे में पिछले करीब दो महीनों के दौरान महंगे तेल और गैस के आयात पर खर्च भी काफी बढ़ चुका है.
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निरंतर बढ़ रहे कच्चे तेल के दाम
पेट्रोलियम मंत्रालय की Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मध्यपूर्व एशिया में जारी अनिश्चितता की वजह से 29 अप्रैल, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की कीमत बढ़कर US$ 116.52/बैरल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई. सरकारी आकड़ों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी, 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी यानी, मध्यपूर्व युद्ध एशिया में जारी अनिश्चितता की वजह से कच्चा तेल फरवरी, 2026 की औसत कीमत के मुकाबले 29 अप्रैल, 2026 को 47.51 डॉलर प्रति बैरल महंगा हुआ, यानि 68.84 % की बढ़ोतरी हुई है. अप्रैल, 2026 के दौरान कच्चे तेल की औसत कीमत 29 अप्रैल तक 114.25 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर थी. मार्च, 2026 महीने के दौरान भी कच्चे तेल की औसत कीमत 113 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी.
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