मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग ने दुनिया भर के बाजारों में खलबली मचा दी है. सोमवार सुबह जैसे ही कच्चा तेल (Crude Oil) 20% से ज्यादा उछलकर $117 प्रति बैरल के पार पहुंचा, भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार मच गया.
कच्चे तेल में लगी आग का सबसे बुरा असर भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर पड़ा है.
तेल कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट (Energy Stocks Crash)
सोमवार को HPCL के शेयर 7.75%, BPCL 7.49% और IOC 6.67% तक लुढ़क गए. इसके अलावा सविता ऑयल और गेल (GAIL) के शेयरों में भी 5% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई.

निवेशकों को डर है कि कच्चा तेल महंगा होने से इन कंपनियों की लागत बढ़ेगी और मुनाफा कम होगा. हालांकि, इस माहौल में भी HOEC और डीप इंडस्ट्रीज जैसे कुछ शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं.
क्यों बढ़ रही हैं तेल की कीमतें?
जुलाई 2022 के बाद पहली बार कच्चा तेल $117 के इतने रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंचा है. ईरान के साथ बढ़ते युद्ध की वजह से 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' से होने वाली सप्लाई रुकने का खतरा पैदा हो गया है. हालात इतने बिगड़ गए हैं कि इराक और कुवैत ने तेल का प्रेडक्शन घटाना शुरू कर दिया है, वहीं कतर से आने वाली गैस (LNG) की सप्लाई भी कम हो गई है.
जानकारों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट की जंग कल रुक भी जाए, तो भी टूटे हुए इंफ्रास्ट्रक्चर और बिगड़ी हुई लॉजिस्टिक्स की वजह से तेल की कीमतें महीनों तक ऊंची रह सकती हैं.
भारत के लिए क्यों है यह खतरे की घंटी?
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात (Import) करता है, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक होने के नाते तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है.
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