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टोटल पावर, न पंखा, न पानी, ये रही NVIDIA के लिक्विड-कूल्ड AI मॉन्स्टर्स की पूरी कहानी

NVIDIA के GPU अत्याधुनिक ARM-आधारित CPU और लिक्विड कूलिंग तकनीक से लैस हैं, जो AI के विशाल पैमाने पर समानांतर प्रोसेसिंग को संभव बनाते हैं.

टोटल पावर, न पंखा, न पानी, ये रही NVIDIA के लिक्विड-कूल्ड AI मॉन्स्टर्स की पूरी कहानी
NVIDIA के चिप्‍स की दुनियाभर में है मांग, क्‍यों है, इसका एक उदाहरण यहां देख लीजिए इस स्‍टोरी में.

nVIDIA GPU Story: आज दुनिया एक ऐसी चीज के पीछे भाग रही है, जैसे तेल, रेयर अर्थ या खनिज. वो चीज है NVIDIA का चिप. या ज्यादा सटीक कहें तो NVIDIA का GPU यानी ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट, जो अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इंजन बन चुका है. सरकारें इन्हें चाहती हैं, टेक्नोलॉजी कंपनियों की मांग खत्म नहीं हो रही और जो देश AI का भविष्य तय करना चाहते हैं, उन्हें पता है कि इन चिप्स के बिना उनकी महत्वाकांक्षा केवल सपना बनकर रह जाएगी. NDTV आपको इस बेहद मांग वाली तकनीक को करीब से बता रहा है. यहां कोई छोटा चिप या प्लग-इन कार्ड नहीं, बल्कि मशीनों से भरा एक विशाल रैक मौजूद है, जो अब AI युग की कंप्यूटिंग ताकत की पहचान बन चुका है.

भारत में फिलहाल करीब 38,000 NVIDIA GPU मौजूद हैं. यह आंकड़ा केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सार्वजनिक रूप से बताया था. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने 10,000 और GPU खरीदने को मंजूरी दी है. फिर भी ऐसे समय में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अर्थव्यवस्था, रक्षा, स्वास्थ्य, जलवायु विज्ञान और प्रशासन के केंद्र में आता जा रहा है, यह संख्या बहुत कम मानी जा रही है.

NVIDIA का चिप इतना अहम क्‍यों? 

यह समझने के लिए कि यह NVIDIA सिस्टम आखिर है क्या और इतना अहम क्यों हो गया है, NDTV ने ASUS Technology Pvt Ltd के सर्वर प्रोडक्ट मैनेजर केतन शर्माकलोनी से बात की. ASUS, NVIDIA के बड़े वैश्विक हार्डवेयर पार्टनर्स में से एक है. रैक के पास खड़े होकर शर्माकलोनी ने बताया कि यह कोई सामान्य कंप्यूटर नहीं है. उनके मुताबिक, 'ये साधारण चिप्स या पारंपरिक CPU नहीं हैं. ये ARM-आधारित CPU हैं जिन्हें खुद NVIDIA ने डिजाइन किया है और ये Blackwell GPU की B200 सीरीज के साथ काम करते हैं.'

शर्माकलोनी के अनुसार यह तकनीक इतनी एडवांस है कि इसकी पांचवीं पीढ़ी के सिस्टम अभी भारत में उपलब्ध भी नहीं हैं. हर सिस्टम में GPS ट्रैकिंग यूनिट लगी होती है ताकि इन्हें चोरी-छिपे चीन या रूस न भेजा जा सके. ये सिस्टम ट्रिलियन पैरामीटर वाले बड़े लैंग्वेज मॉडल की ट्रेनिंग और इन्फरेंसिंग को सपोर्ट करते हैं.

सामान्‍य कंप्‍यूटिंग बनाम अनंत कैलकुलेशन 

यह फर्क समझना जरूरी है. पारंपरिक CPU काम को क्रमवार तरीके से प्रोसेस करते हैं और सामान्य कंप्यूटिंग के लिए बने होते हैं. जबकि NVIDIA के GPU विशाल पैमाने पर समानांतर प्रोसेसिंग के लिए तैयार किए गए हैं, जो AI के लिए आदर्श है. AI में अरबों-खरबों कैलकुलेशन एक साथ करनी होती हैं और यही वजह है कि आधुनिक AI सिस्टम इतनी तेजी से टेक्स्ट, तस्वीरें, वीडियो और भविष्यवाणियां तैयार कर पाते हैं.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी भारी कंप्यूटिंग क्षमता को बेहद छोटे फिजिकल स्पेस में समेट दिया गया है. शर्माकलोनी बताते हैं कि पूरा सिस्टम केवल 1U यानी एक यूनिट के आकार में फिट हो जाता है. लेकिन इतनी घनत्व वाली मशीनों के साथ एक बड़ी चुनौती आती है—हीट यानी गर्मी. इतनी ज्यादा गर्मी पैदा होती है कि पारंपरिक कूलिंग तरीके काम ही नहीं करते.

वे कहते हैं, 'इसे ठंडा करने के लिए आप पंखों का इस्तेमाल नहीं कर सकते. इसके लिए लिक्विड कूलिंग चाहिए.'

यह सुनकर सबसे पहले दिमाग में खतरे की घंटी बजती है- पानी और इलेक्ट्रॉनिक्स का मेल हमेशा जोखिम भरा माना जाता है. जब यह सवाल उठाया गया तो शर्माकलोनी मुस्कुराते हुए बोले, 'आप बिल्कुल सही कह रहे हैं. इसलिए इसमें पानी का इस्तेमाल नहीं होता.' 

इसकी जगह एक खास तरह का डाइलेक्ट्रिक लिक्विड इस्तेमाल किया जाता है, जो बिजली का संचालन नहीं करता. यानी अगर यह लीक भी हो जाए तो इलेक्ट्रॉनिक्स को नुकसान नहीं पहुंचाता. AI के दौर में लिक्विड कूलिंग अब कोई अनोखी चीज नहीं, बल्कि जरूरत बन चुकी है.

आखिर इसकी कीमत कितनी है? 

इसके बाद आता है वह सवाल जो पूरे सिस्टम की तस्वीर साफ कर देता है- इसकी कीमत कितनी है? शर्माकलोनी का जवाब सीधा है:- एक पूरा रैक सिस्टम 50 लाख से 55 लाख डॉलर के बीच आता है. यह बेहद बड़ी रकम है और यही बताती है कि दुनिया भर में क्या चल रहा है. 

वे मानते हैं,' हां, यह बहुत महंगा है और इसी वजह से इसकी कमी भी है.' लेकिन केवल कीमत ही वजह नहीं है. NVIDIA के AI सिस्टम की वैश्विक मांग इतनी तेजी से बढ़ी है कि उत्पादन उसकी बराबरी नहीं कर पा रहा. उनके मुताबिक, 'डिमांड बहुत ज्यादा है और प्रोडक्शन कम, इसलिए सप्लाई मांग को पूरा नहीं कर पा रही.'

इसी कारण देश और कंपनियां NVIDIA हार्डवेयर हासिल करने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. पैसा होने के बावजूद ये सिस्टम तुरंत नहीं खरीदे जा सकते. लंबी वेटिंग लिस्ट, सीमित अलोकेशन और खिंची हुई सप्लाई चेन ने NVIDIA के चिप्स को रणनीतिक संपत्ति बना दिया है.

आधुनिक AI की असल तस्‍वीर 

भारत मंडपम में NDTV को जो सिस्टम दिखाया गया, वह केवल एक कंप्यूटर नहीं बल्कि पूरा AI रैक सिस्टम है. शर्माकलोनी बताते हैं, 'एक रैक में 18 सर्वर लगते हैं. यह GB300 सिस्टम है.' एक तरफ 10 सर्वर और दूसरी तरफ 8 सर्वर, जिन्हें हाई-स्पीड इंटरनल नेटवर्किंग से जोड़ा गया है. और यह तो सिर्फ एक बिल्डिंग ब्लॉक है. कई ऐसे रैक आपस में जुड़कर एक क्लस्टर बनाते हैं, जो जनरेटिव AI के लिए सुपरकंप्यूटर बन जाता है.

यही आधुनिक AI की असली तस्वीर है- एक मशीन नहीं, बल्कि GPU के विशाल क्लस्टर जो कंप्यूटेशन की फैक्ट्री की तरह काम करते हैं. लेकिन इस ताकत की कीमत सिर्फ पैसे से नहीं चुकानी पड़ती, बल्कि बिजली की खपत भी बहुत बड़ी होती है. शर्माकलोनी के मुताबिक, एक रैक जितनी बिजली इस्तेमाल करता है, उतनी 50 से 60 घरों के बराबर होती है. यानी हर AI इमेज, हर चैटबॉट जवाब और हर पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन के पीछे असली बिजली खर्च होती है. जैसे-जैसे AI बढ़ेगा, ऊर्जा दक्षता उद्योग और सरकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन जाएगी.

AI इंफ्रा में NVIDIA का बड़ा नाम 

इस बदलाव के केंद्र में NVIDIA है, जिसने खुद को पूरी तरह बदल लिया है. कभी गेमिंग ग्राफिक्स के लिए जानी जाने वाली कंपनी ने दशकों में हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और डेवलपर टूल्स का ऐसा इकोसिस्टम बनाया कि AI क्रांति के लिए वह सबसे तैयार खिलाड़ी बन गई. आज उसके GPU डेटा सेंटर, वैज्ञानिक शोध, जलवायु मॉडल, दवा खोज, स्वायत्त वाहन और राष्ट्रीय AI कार्यक्रमों की रीढ़ बन चुके हैं. AI इंफ्रास्ट्रक्चर की चर्चा होती है तो अक्सर मतलब NVIDIA ही होता है.

कंपनी के संस्थापक और CEO जेनसन हुआंग भी इस बदलाव को खुलकर स्वीकार करते हैं. उनका कहना है, 'पूरी दुनिया AI अपनाने की दौड़ में लगी है,' और वे इसे नई औद्योगिक क्रांति की शुरुआत बताते हैं. उनके मुताबिक, कंप्यूटिंग की मांग इसलिए तेजी से बढ़ी है क्योंकि AI अब इतना सक्षम हो चुका है कि हर कोई इसका इस्तेमाल करना चाहता है. यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सीमित तकनीक नहीं, बल्कि बुनियादी आधार बनती जा रही है.

भारत के लिए इसका मतलब बेहद अहम है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि देश को हजारों NVIDIA GPU की जरूरत होगी. यह एक गंभीर प्रतिबद्धता को दिखाता है, लेकिन वैश्विक संदर्भ में यह भी बताता है कि भारत को अभी लंबा सफर तय करना है. AI रेस में आगे देश बड़े-बड़े GPU क्लस्टर, समर्पित डेटा सेंटर और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहे हैं. ऐसे निवेश के बिना AI के सपने सीमित रह सकते हैं.

NVIDIA के चिप्स की भारी मांग की वजह साफ है. ये विकल्पों की तुलना में बेहतर स्केल होते हैं, AI वर्कलोड के लिए बेहतरीन प्रदर्शन देते हैं और एक मजबूत सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम के साथ आते हैं जिस पर डेवलपर्स भरोसा करते हैं. यही संयोजन एक मजबूत चक्र बना चुका है- ज्यादा यूजर, ज्यादा डेवलपर और और भी मजबूत NVIDIA.

आज हर जगह NVIDIA चिप्स की चर्चा है. NDTV आपको करीब से दिखा रहा है कि इस चर्चा के पीछे असल कहानी क्या है—ये मशीनें, इनकी कीमत, इनकी ऊर्जा खपत और वह भविष्य जिसे ये आकार दे रही हैं.

नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit में यह सिर्फ हार्डवेयर का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उस इंफ्रास्ट्रक्चर की झलक है जो भारत की तकनीकी यात्रा के अगले चरण को तय करेगा.

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