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थोक महंगाई बढ़ी, टूटा 38 महीने का रिकॉर्ड! ऊर्जा संकट के चलते किन चीजों के बढ़ गए दाम?

ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है. 28 फरवरी को संकट शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई हैं.

थोक महंगाई बढ़ी, टूटा 38 महीने का रिकॉर्ड! ऊर्जा संकट के चलते किन चीजों के बढ़ गए दाम?
WPI Inflation: मार्च में कितनी बढ़ गई थोक महंगाई

देश में खुदरा महंगाई में मामूली बढ़त के बाद थोक महंगाई के आंकड़े कुछ हद तक चिंता बढ़ा सकते हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के बीच ईंधन, बिजली और निर्मित वस्तुओं की कीमतों में आए भारी उछाल के कारण मार्च में थोक महंगाई लगातार पांचवें महीने बढ़कर 3.88 प्रतिशत पर पहुंच गई. थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई पिछले महीने 2.13 प्रतिशत और पिछले साल मार्च में 2.25 प्रतिशत थी. केंद्रीय उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 'मार्च 2026 में महंगाई की सकारात्मक दर मुख्य रूप से कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, अन्य विनिर्माण, गैर-खाद्य वस्तुओं, बुनियादी धातुओं के निर्माण और खाद्य वस्तुओं आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण है.' 

ईंधन और बिजली की लागत बढ़ी   

WPI आंकड़ों के अनुसार, ईंधन और बिजली बास्केट में महंगाई मार्च में बढ़कर 1.05 प्रतिशत हो गई, जो फरवरी में 3.78 प्रतिशत की गिरावट (डिफ्लेशन) पर थी. कच्चे पेट्रोलियम की महंगाई मार्च के दौरान उछलकर 51.57 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि पिछले महीने इसमें 1.29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी.

निर्मित उत्पादों (Manufactured products) की महंगाई फरवरी के 2.92 प्रतिशत से बढ़कर मार्च में 3.39 प्रतिशत हो गई. हालांकि, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार कम होकर 1.90 प्रतिशत रह गई, जो फरवरी में 2.19 प्रतिशत थी. सब्जियों में महंगाई मार्च में घटकर 1.45 प्रतिशत रह गई, जो फरवरी में 4.73 प्रतिशत थी.
 

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पश्चिम एशिया संकट का असर

ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है. 28 फरवरी को संकट शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई हैं. सरकार ने 26 मार्च को पेट्रोल और डीजल दोनों पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी, ताकि ईंधन विक्रेता कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों का बोझ उपभोक्ताओं पर न डालें.

उत्पाद शुल्क में कटौती का निर्णय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तीव्र वृद्धि के जवाब में लिया गया था. पश्चिमी एशिया के संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण एक महीने के भीतर कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई थीं.

खुदरा महंगाई की स्थिति

इसी हफ्ते सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई मार्च में 3.4 प्रतिशत रही, जो पिछले महीने 3.21 प्रतिशत थी. इसका मुख्य कारण कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि थी. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस महीने की शुरुआत में अपनी पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा था. RBI मुख्य रूप से बेंचमार्क उधार दरों पर निर्णय लेने के लिए खुदरा महंगाई पर नजर रखता है.

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