Layoffs in Tech Sectors: अभी हाल ही में बड़े स्तर पर छंटनी को लेकर मल्टीनेशनल कंपनी ऑरेकल (Oracle) चर्चा में रही. कंपनी ने एक झटके में 25,000 से ज्यादा लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया, इनमें 12,000 लोगों की छंटनी तो केवल भारत में ही हुई. अभी ये चर्चा थमी नहीं कि टेक सेक्टर में छंटनी को लेकर एक गंभीर रिपोर्ट सामने आ गई. ऐसी रिपोर्ट, जो डराती भी है और सावधान भी करती है. रिपोर्ट के अनुसार, इस साल टेक सेक्टर में छंटनी तेजी से बढ़ रही है.
5 साल में 10 लाख नौकरियां गईं
ट्रेडिंगप्लेटफॉर्म्स की रिपोर्ट के अनुसार, पहली तिमाही में ही दुनिया भर में 80,000 से ज्यादा नौकरियां जा चुकी हैं और इस साल ये आंकड़ा 3 लाख के पार जा सकता है. इसमें ओरेकल, अमेजन और मेटा जैसी बड़ी कंपनियों का नाम सबसे आगे है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह छंटनी कोविड के बाद आई तेजी के बाद कंपनियों के हायरिंग प्लान को संतुलित करने का हिस्सा है. 2021 से अब तक दुनिया भर में 10 लाख से ज्यादा टेक नौकरियां खत्म हो चुकी हैं.
कंपनियों की बात करें तो ओरेकल ने सबसे ज्यादा 25,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी की है, जो एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस बढ़ाने के तहत की गई है. इसके बाद अमेजन ने करीब 16,000 कर्मचारियों को निकाला, जबकि मेटा ने लगभग 2,400 कर्मचारियों की छंटनी की.
अमेरिका में 61,000 लोगों की छंटनी, भारत में कितनी?
अमेरिका इस मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है, जहां इस साल अब तक कुल छंटनी का लगभग 77 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया है. यहां 62 कंपनियों में 61,000 से ज्यादा नौकरियां खत्म हुई हैं. इसके अलावा, अमेरिका के बाहर छंटनी अलग-अलग देशों में बंटी हुई है. ऑस्ट्रेलिया में करीब 4,450 नौकरियां गईं. वहीं, एशिया में भारत में 2,000 से ज्यादा लोगों की नौकरी गई है. इसके अलावा इजरायल और सिंगापुर में भी एआई स्टार्टअप, ई-कॉमर्स और साइबर सिक्योरिटी कंपनियों में छंटनी हुई है.
किस सेक्टर में कितनी नौकरियां गईं?
सेक्टर के हिसाब से देखें तो क्लाउड, कंप्यूटिंग और सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SAAS) कंपनियों में सबसे ज्यादा करीब 28,000 नौकरियां गईं, जबकि ई-कॉमर्स सेक्टर में लगभग 19,000 लोगों को नौकरी से निकाला गया. जबकि यूरोप के ऑस्ट्रिया, स्वीडन और नीदरलैंड जैसे देशों में सेमीकंडक्टर, टेलीकॉम और आईटी सेवाओं में कटौती देखी गई.
AI स्किल्स और वैल्यू एडिशन से बचेगी नौकरी?
रिपोर्ट में बताया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन इस बदलाव के मुख्य कारण बनकर उभरे हैं. 2026 में लगभग आधी छंटनी AI से जुड़े बदलावों के कारण हुई है. हालांकि, रिपोर्ट ये भी कहती है कि ज्यादातर छंटनी सीधे तौर पर एआई के चलते नौकरियां खत्म होने की वजह से नहीं, बल्कि कंपनियों की ओर से भविष्य के निवेश के लिए लागत कम करने के कदम के रूप में की जा रही है.
इस संबंध में हमने IT एक्सपर्ट प्रभात सिन्हा से बात की. NDTV से बातचीत में उन्होंने बताया कि प्रोफेशनल्स और कंपनियां, दोनों ने ही AI को बहुत जल्दी गंभीरता से नहीं लिया. AI आए लंबा वक्त हो चला है और प्रोफेशल्स को इसमें खुद को काफी पहले अपस्किल करना चाहिए था. कंपनियों को भी अपने कर्मियों की AI स्किलिंग पर ध्यान देना चाहिए था. दूसरी महत्वपूर्ण बात, कंपटीशन के दौर में खुद को हाई वैल्यूड बनाए रखने की है. बात अब केवल मल्टीटास्किंग तक सीमित नहीं रही है. प्रोफेशनल्स को खुद को इस हद तक मूल्यवान बनाए रखने की जरूरत है कि जब भी छंटनी का दौर आए, उस लिस्ट में उनका नाम न आए.
पिछले दिनों ऑरेकल में छंटनी के बाद कर्मचारियों के संगठन NITES ने सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की थी. पत्र में उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि कंपनियों के मुनाफे बढ़ने के बावजूद छंटनी क्यों हो रही. हालांकि रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि कंपनियां अब अपने खर्च को कम करने और एआई में निवेश बढ़ाने के लिए संगठनात्मक बदलाव कर रही हैं, भले ही उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत क्यों न हो.
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