असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई में अब 45 दिनों से भी कम का समय बचा है. ऐसे में सैलरीड लोग अपने एम्प्लॉयर (Employers) से फॉर्म 16 (Form 16) मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. अगर आप सैलरीड कर्मचारी हैं और असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आईटीआर (ITR) भरने की तैयारी कर रहे हैं, तो सिर्फ Form 16 देखकर रिटर्न फाइल करना भारी पड़ सकता है.
अक्सर नौकरीपेशा लोग यह बड़ी गलती कर बैठते हैं कि वे सिर्फ फॉर्म 16 के आधार पर ही टैक्स रिटर्न दाखिल कर देते हैं. अगर आपके पास सैलरी के अलावा कमाई के अन्य जरिए हैं, तो वो इसमें दर्ज नहीं होते. इन्हें छिपाने पर आपको टैक्स डिपार्टमेंट से भारी जुर्माने और ब्याज का नोटिस आ सकता है.
31 जुलाई से पहले इन डॉक्यूमेंट को जरूर करें मैच
गैर-ऑडिट मामलों में ITR फाइल करने की सामान्य अंतिम तारीख 31 जुलाई होती है. हर साल जून में अधिकांश कंपनियां अपने कर्मचारियों को Form 16 जारी करती हैं. कई टैक्सपेयर्स यही मान लेते हैं कि Form 16 में मौजूद जानकारी ही रिटर्न भरने के लिए पर्याप्त है.हालांकि, अगर आपकी कमाई सिर्फ सैलरी तक सीमित नहीं है और आपके पास अन्य आय स्रोत भी हैं, तो केवल Form 16 पर निर्भर रहना सही नहीं होगा.
Form 16 क्या होता है?
Form 16 एक टैक्स सर्टिफिकेट है, जिसे नियोक्ता (Employer) अपने कर्मचारियों को जारी करता है. इसमें पूरे वित्त वर्ष के दौरान दी गई सैलरी और उस पर काटे गए TDS की जानकारी होती है.
Form 16 के दो हिस्से होते हैं ....
पार्ट- A
- कर्मचारी और नियोक्ता की जानकारी
- PAN और TAN डिटेल
- काटे गए और जमा किए गए TDS की जानकारी
पार्ट-B
- सैलरी का पूरा ब्रेकअप
- क्लेम किए गए एक्सेम्प्शन
- विभिन्न सेक्शन के तहत ली गई टैक्स छूट
- टैक्स कैलकुलेशन की जानकारी
बता दें कि Form 16 मुख्य रूप से सैलरी इनकम को दिखाता है. इसमें बैंक ब्याज, डिविडेंड, कैपिटल गेन, किराये की आय या फ्रीलांसिंग जैसी कमाई शामिल नहीं हो सकती.
Form 26AS क्या है और क्यों जरूरी है?
Form 26AS इनकम टैक्स विभाग द्वारा जारी किया जाने वाला एनु्अल टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट है. इसमें PAN से जुड़ी टैक्स संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज होती हैं.इसमें आमतौर पर शामिल होता है...
- नियोक्ता, बैंक या अन्य संस्थाओं द्वारा काटा गया TDS
- टीसीएस (TCS) की जानकारी
- एडवांस टैक्स और सेल्फ-असेसमेंट टैक्स
- प्राप्त हुए इनकम टैक्स रिफंड की जानकारी
- हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन की डिटेल
ITR भरने से पहले Form 16, Form 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) का मिलान करने से ऐसी इनकम की पहचान हो जाती है जो Form 16 में दर्ज नहीं होती.
AIS और Form 26AS में दिख सकती हैं ये अतिरिक्त कमाई
इन डॉक्यूमेंट्स में कई ऐसे इनकम सोर्स नजर आ सकते हैं, जो Form 16 में शामिल नहीं होते, जैसे...
- सेविंग्स अकाउंट का ब्याज
- फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का ब्याज
- डिविडेंड इनकम
- शेयर और म्यूचुअल फंड से कैपिटल गेन
- रेंटल इनकम
- फ्रीलांसिंग या प्रोफेशनल इनकम
- इनकम टैक्स रिफंड पर मिला ब्याज
ITR में जरूर दिखाएं ये 10 तरह की कमाई
Form 16 केवल सैलरी और नियोक्ता द्वारा काटे गए टैक्स की जानकारी देता है. इसलिए टैक्सपेयर्स को अन्य टैक्सेबल आय की जानकारी अलग से ITR में भरनी होती है.
- सेविंग अकाउंट ब्याज (Savings Account Interest): बचत खाते पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल हो सकता है और इसे ITR में दिखाना जरूरी है.
- फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रेकरिंग डिपॉजिट (RD) पर मिलने वाला ब्याज भी आपकी कुल आय का हिस्सा माना जाता है.
- डिविडेंड इनकम (Dividend Income):शेयर या म्यूचुअल फंड से मिलने वाला डिविडेंड ITR में रिपोर्ट करना जरूरी है.
- शेयरों और म्यूच्युअल फंड पर कैपिटल गेन (Capital Gains from Shares and Mutual Funds):शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश से हुए मुनाफे की जानकारी भी रिटर्न में देनी होती है.
- रेंटल इनकम (Rental Income): किराये से होने वाली कमाई को भी आय के रूप में घोषित करना अनिवार्य है.
- फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी इनकम( Freelance or Consultancy Income): फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी या किसी प्रोफेशनल सेवा से हुई कमाई भी ITR में दिखानी होगी.
- इनकम टैक्स रिफंज पर ब्याज (Interest on Income Tax Refund): अगर आपको टैक्स रिफंड मिला है और उस पर ब्याज प्राप्त हुआ है, तो वह भी टैक्सेबल आय हो सकती है.
- फैमिली पेंशन (Family Pension): फैमिली पेंशन से मिलने वाली आय को भी रिटर्न में शामिल करना जरूरी है.
- टैक्सेबल गिफ्ट्स(Taxable Gifts): नियमों के तहत टैक्सेबल कैटेगरी में आने वाले गिफ्ट्स की जानकारी भी देनी होगी.
- विदेशी निवेश और विदेश से हुई कमाई (Foreign Income and Overseas Investment Income): विदेश में निवेश से हुई कमाई या विदेशी आय की जानकारी देना बेहद जरूरी है. इसे छिपाने पर टैक्स विभाग की नजर जल्दी पड़ सकती है.
सिर्फ Form 16 देखकर रिटर्न भरना पड़ सकता है महंगा
अगर आप ITR फाइल करते समय केवल Form 16 पर भरोसा करते हैं और ऊपर बताई गई किसी भी आय को रिपोर्ट नहीं करते, तो इसे अंडर-रिपोर्टिंग माना जा सकता है. ऐसी स्थिति में टैक्स विभाग अतिरिक्त टैक्स, ब्याज और नोटिस जारी कर सकता है. इसलिए AY 2026-27 के लिए ITR दाखिल करने से पहले Form 16, Form 26AS और AIS का मिलान जरूर करें और अपनी सभी इनकम सोर्स को सही तरीके से रिटर्न में शामिल करें. इससे बाद में किसी भी तरह की परेशानी, टैक्स डिमांड या नोटिस से बचा जा सकता है.
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