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जंग के बीच Google-Microsoft-Amazon जैसी टेक कंपनियों को निशाना क्यों बना रहा ईरान?

जंग के बीच ईरान ने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी टेक कंपनियों को भी निशाना बनाने लगा है. उसका दावा है कि इनकी तकनीक का इस्तेमाल अमेरिका और इजरायल कर रहा है.

जंग के बीच Google-Microsoft-Amazon जैसी टेक कंपनियों को निशाना क्यों बना रहा ईरान?

अमेरिका और इजरायल से हमले का बदला लेने के लिए ईरान अब तक तो खाड़ी देशों और वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बना रहा था लेकिन अब उसने टेक कंपनियों को भी धमकी दे डाली है. ईरान ने अब Google, Microsoft, NVIDIA, Amazon (AWS), Oracle, IBM और Palantir जैसी कंपनियों को निशाना बनाने की धमकी दी है. दिलचस्प बात यह है कि इस लिस्ट में Apple का नाम शामिल नहीं है.

लेकिन ऐसा क्यों? क्योंकि ईरान का दावा है कि इन कंपनियों के क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और AI तकनीक का इस्तेमाल इजरायली और अमेरिकी सेना ईरानी ठिकानों पर सटीक हमलों के लिए कर रही है.

डेटा सेंटर्स पर अटैक: रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 48 घंटों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन में Amazon (AWS) के डेटा सेंटर्स पर ईरानी ड्रोन से हमले की खबरें आई हैं, जिससे वहां भारी आग लगी और सेवाएं प्रभावित हुईं.

कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम: खतरे को देखते हुए इजराइल और खाड़ी देशों में स्थित इन कंपनियों के दफ्तरों को खाली करा दिया गया है. Microsoft, Google और TikTok ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की सलाह दी है.

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पूरे मिडिल ईस्ट के 'डिजिटल हब' पर खतरा

  • खाड़ी देशों में 'रीजनल हब': Google, Microsoft और Amazon (AWS) के बड़े डेटा सेंटर्स सिर्फ इजराइल में नहीं, बल्कि सऊदी अरब, कतर और यूएई (दुबई/अबू धाबी) में भी हैं. ईरान ने इन सभी देशों को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने अमेरिका या इजराइल को जमीन या तकनीकी मदद दी, तो उनके यहां स्थित इन सेंटर्स को निशाना बनाया जाएगा.
  • इंटरनेशनल डेटा केबल: दुनिया का ज्यादातर इंटरनेट ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी केबल्स (Undersea Cables) से गुजरता है, जो रेड सी (लाल सागर) और स्वेज नहर के पास से निकलती हैं. इजराइल और आसपास के इलाकों में कोई भी बड़ा हमला इन केबल्स को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे एशिया से यूरोप का इंटरनेट संपर्क टूट सकता है.
  • बैंकिंग और फाइनेंशियल क्राइसिस: आज लगभग सभी बड़े बैंक क्लाउड और एआई का उपयोग करते हैं. डेटा सेंटर्स पर हमले का मतलब है ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का रुकना, एटीएम का काम न करना और शेयर बाजार में तकनीकी खराबी आना.
  • इजराइली टेक का ग्लोबल दबदबा: दुनिया की लगभग हर बड़ी टेक कंपनी (Apple, Intel, Nvidia) का R&D (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) सेंटर इजराइल में है. यहां चिप डिजाइनिंग और साइबर सिक्योरिटी का मुख्य काम होता है. अगर यहाँ काम रुकता है, तो पूरी दुनिया में लैपटॉप, मोबाइल और एआई (AI) चिप्स की सप्लाई ठप हो जाएगी.

बैंकों को भी बनाया जा रहा निशाना

ईरान ने सिर्फ टेक कंपनियों को ही नहीं बल्कि बैंकों को लेकर भी चेतावनी दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मिडिल ईस्ट में मौजूद उन बैंकों को भी निशाना बनाया जा सकता है जिनका संबंध अमेरिका या इजराइल से है. इसके बाद कई देशों में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. रिपोर्ट में ईरानी पक्ष की ओर से यह भी कहा गया है कि आम लोगों बैंकों से कम से कम एक किलोमीटर की दूरी बनाए रखें. इस तरह की चेतावनी ने पूरे क्षेत्र में डर का माहौल पैदा कर दिया है.

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि हाल ही में हुए हमलों के दौरान तेहरान में एक बैंक को निशाना बनाया गया. इस हमले में बैंक के कुछ कर्मचारियों की मौत भी हुई है, हालांकि सही संख्या सामने नहीं आई है.

रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है. ईरान अब मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बना रहा है. इसके साथ ही कुछ ऐसे खाड़ी देशों को भी टारगेट किया गया है जो अमेरिका के सहयोगी माने जाते हैं.

वहीं, रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने Strait of Hormuz के आस-पास गतिविधियां बढ़ा दी हैं. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है. अगर यहां किसी तरह की रुकावट होती है तो इसका असर खासकर China और India जैसे देशों ज्यादा दिखेगा. 

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