अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'रेसिप्रोकल टैरिफ' को सीमित करने के फैसले के बाद ग्लोबल मार्केट में मिला-जुला असर देखने को मिला. अमेरिकी इक्विटी बाजार में तेजी आई, जबकि बॉन्ड यील्ड बढ़ने और डॉलर में कमजोरी का संकेत मिला. निवेशक अब ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इस फैसले से अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी और आर्थिक दिशा कितनी बदलेगी. ये असर सिर्फ वॉल स्ट्रीट तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि एशियाई, खासकर भारतीय शेयर बाजार पर भी इसका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है.
अमेरिकी बाजारर की बात करें तो फैसले के बाद सकारात्मक माहौल दिखा. न्यूयॉर्क के समयानुसार लगभग 11 बजे S&P 500 करीब 0.4% ऊपर रहा और इसके करीब 300 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई. टेक-हैवी Nasdaq 100 में 0.8% की तेजी आई, जबकि Dow Jones Industrial Average लगभग 0.1% बढ़ा.

टेक और सेमीकंडक्टर स्टॉक्स चमके
सेमीकंडक्टर और टेक कंपनियों से जुड़े इंडेक्स ने बेहतर प्रदर्शन किया. Philadelphia Semiconductor Index में 1.2% और 'Magnificent 7' इंडेक्स में 1.3% की बढ़त रही. यूरोप और वैश्विक बाजारों पर भी असर दिखा, जहां Stoxx Europe 600 और MSCI World Index दोनों करीब 0.4% से 0.8% तक चढ़े.
विश्लेषकों का कहना है कि टैरिफ हटने से आयात पर निर्भर कंपनियों, जैसे मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और ऑटो सेक्टर के लिए लागत का दबाव कम हो सकता है, जिससे मुनाफा बढ़ने की उम्मीद बनी है.
डॉलर कमजोर, बॉन्ड यील्ड में उछाल
जहां इक्विटी बाजार में तेजी दिखी, वहीं बॉन्ड मार्केट पर दबाव बढ़ा. 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर करीब 4.09% पहुंच गई. डॉलर स्पॉट इंडेक्स में लगभग 0.2% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि यूरो और ब्रिटिश पाउंड मजबूत हुए.
जानकारों के मुताबिक, टैरिफ से मिलने वाली सरकारी आय कम होने की आशंका से घाटा बढ़ सकता है और सरकार को ज्यादा उधार लेना पड़ सकता है, जिसका असर बॉन्ड बाजार पर दिख रहा है.
निवेशकों के लिए राहत या नई अनिश्चितता?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपातकालीन कानून का इस्तेमाल करके व्यापक टैरिफ लगाना राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है. हालांकि सेक्टर-विशेष टैरिफ, जैसे स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो सेक्टर अभी भी लागू रहेंगे.
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन अब दूसरे कानूनों के जरिए नए टैरिफ लगाने की कोशिश कर सकता है, जिससे अनिश्चितता बनी रहेगी. Annex Wealth Management के ब्रायन जैकब्सन ने कहा कि आगे चलकर देश-विशेष और सेक्टर-विशेष टैरिफ देखने को मिल सकते हैं.
कमोडिटी और क्रिप्टो में भी हलचल
कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट आई, जबकि सोने में 1% से ज्यादा की तेजी देखी गई. क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी सकारात्मक रुख रहा और बिटकॉइन करीब 1% से ज्यादा चढ़ा.
विश्लेषकों के अनुसार, बाजार अभी इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि आगे ट्रंप प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या कंपनियों को पहले वसूले गए टैरिफ की रिफंड प्रक्रिया शुरू होगी, ये एक बड़ा सवाल है.
भारतीय शेयर बाजार पर कैसा असर होगा?
अमेरिका में S&P 500 और Nasdaq की तेजी अक्सर भारत में भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाती है. विदेशी निवेशक (FII) जोखिम लेने के मूड में आते हैं तो भारतीय बाजार में कैश फ्लो बढ़ सकता है, जिससे निफ्टी और सेंसेक्स को सपोर्ट मिलता है.
अगर डॉलर कमजोर रहता है, तो निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों में ज्यादा पैसा लगाते हैं. इससे बैंकिंग, मिडकैप और कंजम्प्शन सेक्टर में तेजी आ सकती है.
ट्रंप ने फिलहाल 10% ग्लोबल टैरिफ का ऐलान किया है. विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप प्रशासन नए तरीके से टैरिफ ला सकता है. यानी ट्रेड पॉलिसी की अनिश्चितता अभी खत्म नहीं हुई है. इसलिए भारतीय बाजार में असर शॉर्ट टर्म में पॉजिटिव, लेकिन लॉन्ग टर्म में न्यूट्रल से मिक्स्ड असर दिख सकता है.
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