भारत और ओमान के बीच हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) के तहत कई भारतीय लेबर-फोकस्ड निर्यातों को शून्य शुल्क पर ओमान में प्रवेश मिलेगा. ये समझौता सोमवार, 1 जून से प्रभावी है. भारत और ओमान ने इस सीईपीए समझौते पर पिछले साल दिसंबर में हस्ताक्षर किए थे, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मस्कट का दौरा किया था. वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आयातक को यह साबित करना होगा कि संबंधित वस्तुएं ओमान में ही निर्मित हैं, तभी उसे शुल्क छूट का लाभ मिलेगा. वित्त मंत्रालय ने रविवार को समझौते के तहत ओमान से आने वाले उत्पादों पर शुल्क रियायतों को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया.
भारत के किन सेक्टर्स को फायदा, ओमान को क्या लाभ?
ओमान ने अपने 98.08 फीसदी टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क पहुंच देने की पेशकश की है, जिससे भारत के 99.38 फीसदी निर्यात को फायदा मिलेगा. इसमें जेम्स एंड ज्वैलरी, कपड़ा, चमड़ा और फुटवियर, खेल सामान, प्लास्टिक और फर्नीचर, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद, दवाइयां और मेडिकल उपकरण और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं.
इसी तरह भारत ने अपनी 77.79 फीसदी टैरिफ लाइनों पर शुल्क में छूट देने की पेशकश की है, जो ओमान से आने वाले 94.81 फीसदी आयात को कवर करती है. हालांकि कुछ संवेदनशील उत्पादों को छूट से बाहर रखा गया है, जैसे कृषि उत्पाद (डेयरी, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू), सोना-चांदी और आभूषण, फुटवियर और खेल सामान, कई बेस मेटल्स का स्क्रैप.
देश के सर्विस सेक्टर को भी मिलेगा फायदा
इस समझौते से भारत के सेवा क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा. ओमान के सेवा आयात में भारत की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना है. समझौते में कंप्यूटर सेवाएं, बिजनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य, शोध और प्रोफेशनल सेवाओं में नए अवसर खुलेंगे.
इस समझौते में भारतीय पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाने पर भी जोर दिया गया है. ओमान ने इन्ट्रा-कॉरपोरेट ट्रांसफरी को 20 से बढ़ाकर 50 फीसदी कोटा किया. इसके अलावा कॉन्ट्रैक्चुअल सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 2 साल (और 2 साल एक्सटेंशन) कर दी.
किन राज्यों और सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा?
इस समझौते से लेबर-फोकस्ड और MSME सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा. खास तौर पर मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेड को इस डील से बड़े फायदे होंगे.
- सूरत, गुजरात- रत्न और आभूषण
- पुणे, महाराष्ट्र- इंजीनियरिंग उत्पाद
- तिरुपुर, तमिलनाडु- रेडीमेड कपड़े
- विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश- समुद्री उत्पाद
- मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश- पीतल और धातु हस्तशिल्प
- कानपुर-आगरा, उत्तर प्रदेश्- चमड़े के जूते
- भदोही-मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश- कालीन और होम टेक्सटाइल
- वेल्लोर-अंबूर, तमिलनाडु- फुटवियर
आईटी और सर्विस सेक्टर की बात करें तो कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना के IT और IT-enabled service प्रोफेशनल्स को ओमान में नए अवसर मिलेंगे. यही नहीं, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजनेस, प्रोफेशनल और R&D सेवाओं में निर्यात भी बढ़ेगा.
किसानों और लघु उद्योगों को बढ़ावा कैसे?
CEPA से कृषि निर्यात को भी बड़ा बूस्ट मिलेगा.
- लाइवस्टॉक/मीट- यूपी, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार
- अंडे- तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र
- मीठे बिस्कुट- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, यूपी
- चीनी कन्फेक्शनरी- कर्नाटक, यूपी, महाराष्ट्र
- शहद- पंजाब, हरियाणा, यूपी, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और उत्तर-पूर्व
दोनों देशों को होंगे फायदे
बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक इस डील से भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 25 में ओमान को भारत का निर्यात 4.1 बिलियन डॉलर था, जो कुल निर्यात का लगभग 0.9 फीसदी है और ये पिछले पांच सालों में 12.4% CAGR से बढ़ा है. इसमें कहा गया है कि यह समझौता भारत के तेल आयात बिल को कम करने और भविष्य में ज्यादा विकल्पों की तलाश में मदद करेगा और यह भी बताया गया कि समझौते में बताए गए मुख्य सेक्टर ओमान को भारत के कुल एक्सपोर्ट का लगभग 39 फीसदी के बराबर है.
- MSME-आधारित सेक्टर को नया बाजार मिलेगा
- एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी और तेल आयात लागत घट सकती है
- भारत ने ओमान को 77.79% टैरिफ लाइनों पर जीरो-ड्यूटी एक्सेस दिया
- ओमान को भारत के 94.81% इंपोर्ट वैल्यू पर लाभ मिलेगा
रिपोर्ट में कहा गया है, 'ये भारत के कुल एक्सपोर्ट बास्केट के लिए अच्छा है, खास तौर पर ऐसे समय में जब अमेरिका द्वारा ज्यादा टैरिफ रेट के कारण लागत का फायदा उठाने के लिए कुछ एक्सपोर्ट को री-रूट किया जा रहा है.' बैंक ने बताया कि जीरो-ड्यूटी डील वैल्यू के हिसाब से ओमान भारत के 99.38% एक्सपोर्ट को कवर करता है और वैल्यू के हिसाब से ओमान से भारत के 94.81 फीसदी इंपोर्ट को कवर करेगा.
भारत ने कई देशों के साथ की है डील
भारत ने हाल के समय में यूके, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ भी इसी तरह के व्यापार समझौते किए हैं, ताकि वैश्विक व्यापार में विविधता लाई जा सके और नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाई जा सके.
इस समझौते में अकाउंटेंसी, टैक्सेशन, आर्किटेक्चर, मेडिकल और उससे जुड़ी सेवाओं जैसे खास क्षेत्र में स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए एंट्री और रहने की शर्तें भी ज्यादा आसान हैं, जिससे प्रोफेशनल एंगेजमेंट और भी गहरा और आसान हो सके.
भारत ने जुलाई 2025 में ब्रिटेन और अप्रैल 2026 में न्यूजीलैंड के साथ ऐसी ही डील साइन की हैं और इस साल 27 जनवरी को यूरोपियन यूनियन (27 देशों का ग्रुप) के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते पर मुहर लगाई. यह अमेरिकी टैरिफ में उथल-पुथल से वैश्विक आर्थिक माहौल में आए बड़े बदलाव के बीच व्यापार में विविधीकरण करने की तेज कोशिशों का हिस्सा है.
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