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LPG सप्‍लाई का संकट कब तक सामान्‍य होने की उम्‍मीद है, 1-2 महीने या साल? जानिए ताजा हाल

भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी वैश्विक बाजारों से आयात करता है. इस आयात का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मूज के रास्ते ही भारत आता था.

LPG सप्‍लाई का संकट कब तक सामान्‍य होने की उम्‍मीद है, 1-2 महीने या साल? जानिए ताजा हाल
Hormuz Crisis के बीच भारत में गैस सप्‍लाई की स्थिति क्‍या है?

LPG Supply Chain Disruption Status: मध्य पूर्व (Mid-East) में छिड़े युद्ध और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते 'स्ट्रेट ऑफ होर्मूज' (Strait of Hormuz) में जारी तनाव ने  गैस की ग्‍लोबल सप्‍लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है. जाहिर है कि भारत पर भी इसका प्रभाव पड़ा है. पिछले 47 दिनों से जारी इस सैन्य टकराव के कारण भारत में एलपीजी (LPG) की निर्बाध सप्लाई पर कहीं न कहीं अवरोध जारी है. ऐसे संकेत हैं कि वैश्विक एलपीजी सप्लाई चेन को सामान्य होने में थोड़ा अभी वक्‍त लग सकता है. 

इसके पीछ कई फैक्‍टर्स हैं. अभी ये स्पष्ट नहीं है कि भारत के लिए महत्‍वपूर्ण सप्‍लायर देशों, जैसे कतर में उत्पादन अस्थाई रूप से प्रभावित हुआ है या इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को स्थाई नुकसान पहुंचा है. प्रोडक्‍शन फिर से शुरू हुआ तो पहले की अपेक्षा कितना फर्क पड़ा है.  

होर्मूज का संकट 

भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी वैश्विक बाजारों से आयात करता है. इस आयात का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मूज के रास्ते ही भारत आता था. हालांकि, युद्ध शुरू होने के बाद स्थिति बदल गई है. पिछले आंकड़ों के अनुसार, खाड़ी देशों से होने वाले आयात की हिस्सेदारी घटकर 55 फीसदी रह गई है, जो सप्लाई में आए व्यवधान और भारत की ओर से नए स्रोतों की तलाश (Diversification) को दर्शाता है.

वर्तमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मूज में 15 भारतीय ध्वज वाले कार्गो जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें चार बड़े तेल टैंकर और एक महत्वपूर्ण एलपीजी टैंकर शामिल है. हालांकि अमेरिका ने अपनी ओर से होर्मूज को खोलने के प्रयास किए हैं, लेकिन वहां अभी भी ईरान का नियंत्रण है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.

देश में एलपीजी की मांग 

भारत की वार्षिक एलपीजी मांग लगभग 33 मिलियन टन है, जबकि मार्च के मध्य तक देश की स्टोरेज क्षमता केवल 15 दिनों की खपत के बराबर थी. इस कम स्टोरेज और आयात स्रोतों को बदलने (जैसे अमेरिका या अन्य देशों से मंगाना) के कारण माल ढुलाई (Freight) और बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी हुई है. इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ा है. घरेलू सिलेंडर की कीमतें पिछले महीने 60 रुपये बढ़ चुकी है.  वहीं दूसरी ओर कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 115 रुपये का इजाफा हुआ है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट सेक्टर पर दबाव बढ़ गया है.

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सरकार ने क्‍या कड़े कदम उठाए हैं?

बढ़ते संकट के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भू-राजनीतिक स्थिति से सप्लाई प्रभावित जरूर है, लेकिन वितरकों के पास 'ड्राई-आउट' (स्टॉक खत्म होने) जैसी स्थिति नहीं है. मंत्रालय के अनुसार, ऑनलाइन बुकिंग 98% तक बढ़ गई है और डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है. 

सप्लाई की चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ युद्ध स्तर पर अभियान छेड़ दिया है. 14 अप्रैल 2026 को देश भर में 2100 से अधिक छापे मारे गए और 450 सिलेंडर जब्त किए गए. अब तक 237 वितरकों पर जुर्माना लगाया गया है और 58 वितरकों को निलंबित कर दिया गया है.

पूरी तरह हालात सामान्‍य होने में समय तो लगेगा! 

सप्लाई सामान्य होने में एक महीने से लेकर एक साल तक का समय लग सकता है. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कतर जैसे देशों में LNG प्रोडक्शन प्लांट पर हुए हमलों से कितना नुकसान हुआ है. यदि उत्पादन जल्द शुरू नहीं होता, तो भारत को महंगे विकल्पों पर निर्भर रहना होगा, जिससे सब्सिडी का बोझ और कीमतें दोनों बढ़ सकती हैं. फिलहाल, सरकार रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश देकर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही है.

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